17 करोड़ के नकली नोट से मचा हड़कंप, मैनेजर गिरफ्तार, NIA की जांच तेज
17 करोड़ के नकली नोट मिलने के बाद बैंक मैनेजर गिरफ्तार, NIA ने जांच तेज की, केस डायरी और बैंक रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं, नेटवर्क की तलाश जारी।

17 करोड़ के नकली नोट
सहारनपुर, उत्तर प्रदेश। 17 करोड़ के नकली नोट मिलने के मामले में जांच अब अहम मोड़ पर पहुंच गई है। पंजाब नेशनल बैंक की करेंसी चेस्ट से 17 करोड़ 29 लाख रुपये की नकली भारतीय मुद्रा मिलने के बाद फरार चल रहे बैंक मैनेजर अमित कुमार को NIA ने चंडीगढ़ से गिरफ्तार कर लिया है। वह इस मामले में नामजद प्रमुख आरोपियों में शामिल था। गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इतनी बड़ी रकम बैंक की करेंसी चेस्ट तक कैसे पहुंची और इसके पीछे कौन लोग थे। [1]
मैनेजर की गिरफ्तारी
मामला 29 अगस्त को सामने आया था। सदर बाजार थाना पुलिस को PNB की करेंसी चेस्ट में नकली नोट होने की जानकारी मिली थी। जांच में नकली करेंसी की कुल रकम 17 करोड़ 29 लाख रुपये सामने आई। शुरुआती पड़ताल में बैंक के 3 कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध मिली और तीनों को निलंबित कर दिया गया। इसके बाद स्थानीय पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए NIA ने 3 सितंबर को केस अपने स्तर पर दर्ज कर जांच शुरू की और अमित कुमार की तलाश तेज कर दी।
अमित कुमार उस समय करेंसी चेस्ट से जुड़े अहम पद पर था और बैंक की नकदी व्यवस्था में उसकी भूमिका थी। केस दर्ज होने के बाद वह फरार हो गया था। जांच टीमों ने हरियाणा में कई संभावित ठिकानों पर तलाश की और आखिरकार उसकी मौजूदगी चंडीगढ़ में मिली। गिरफ्तारी के बाद अब उससे पूछताछ के जरिए नकली करेंसी की पूरी कड़ी समझने की कोशिश होगी। जांच एजेंसी यह भी देख रही है कि बैंक कर्मचारियों की कथित भूमिका कितनी बड़ी थी और उनके संपर्क किन लोगों से थे।
रिकॉर्ड से खुलेगा राज
अब NIA स्थानीय पुलिस की केस डायरी और जांच से जुड़े दस्तावेजों को भी अपने रिकॉर्ड में शामिल कर रही है। केस डायरी में दर्ज बयान, बरामदगी का विवरण और अब तक सामने आए साक्ष्य एजेंसी के लिए अहम होंगे। जांच का एक बड़ा सवाल यह है कि 17 करोड़ के नकली नोट आखिर करेंसी चेस्ट तक किस रास्ते से पहुंचे। एजेंसी यह भी पता लगाने में जुटी है कि क्या इसके पीछे कोई संगठित गिरोह था और क्या नकली नोटों को बैंकिंग व्यवस्था में खपाने की कोई योजना बनाई गई थी।
जांच का दायरा बैंक खातों और बड़ी नकदी निकासी तक भी पहुंच सकता है। करेंसी चेस्ट से सटी शाखा में कई बड़े कारोबारियों के खाते होने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में संदिग्ध खातों से हुई बड़ी नकदी निकासी के पैटर्न को जांचा जा सकता है। बैंक के लेनदेन रिकॉर्ड, कैश निकासी से जुड़े दस्तावेज और CCTV फुटेज भी अहम सुराग दे सकते हैं। जांच एजेंसी यह समझने की कोशिश करेगी कि बैंक से निकली बड़ी रकम कहां गई और उसका नकली नोटों से कोई संबंध था या नहीं।
RBI रिकॉर्ड भी जांच में अहम
जांच में RBI के जयपुर कार्यालय भेजी गई करीब 1 करोड़ रुपये की नकदी का पहलू भी सामने आया है। यह रकम 5 अगस्त को करेंसी चेस्ट से भेजी गई थी और उसमें बड़ी संख्या में खराब तथा फटे नोट बताए गए थे। गिनती के दौरान करीब 4 लाख रुपये की कमी भी सामने आई थी। अब जांच एजेंसी अलग अलग रिकॉर्ड और नकदी की आवाजाही का मिलान कर रही है। 17 करोड़ के नकली नोट मामले में मैनेजर की गिरफ्तारी के बाद एजेंसी को उम्मीद है कि पूरे नेटवर्क की अहम कड़ियां सामने आ सकती हैं।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। मामले में शामिल आरोपों और संदिग्ध भूमिकाओं को जांच के आधार पर प्रस्तुत किया गया है और किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना अंतिम न्यायिक प्रक्रिया का विषय है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।