CJP प्रदर्शन मामले में सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख, मांगा जवाब
CJP प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, छात्र को 5 लाख के मुचलके का नोटिस देने पर CJI ने सवाल उठाया, कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा के अधिकारियों से मांगा जवाब।

प्रतीकात्मक फोटो
नई दिल्ली, दिल्ली। CJP प्रदर्शन को लेकर जारी कानूनी विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट में बताया गया कि एक छात्र को 5 लाख रुपये का निजी मुचलका भरने का नोटिस दिया गया था। यह मामला उस समय सामने आया जब सुप्रीम कोर्ट पहले ही CJP प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को खत्म करने और आगे आपराधिक कार्रवाई नहीं करने का आदेश दे चुका था। CJI सूर्यकांत ने पूछा कि ऐसे स्पष्ट आदेश के बावजूद मजिस्ट्रेट ने नोटिस कैसे जारी कर दिया। [1]
नोटिस पर कोर्ट हैरान
सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के दूसरे वर्ष के छात्र अक्षत त्रिपाठी को ग्रेटर नोएडा के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने नोटिस भेजा था। उनसे शांति बनाए रखने के लिए 5 लाख रुपये का निजी मुचलका देने को कहा गया था। नोटिस में कथित तौर पर उन पर सरकार विरोधी भावनाएं भड़काने और प्रदर्शन में शामिल होने से जुड़ी बातें कही गई थीं। हालांकि बाद में यह नोटिस वापस ले लिया गया। सुनवाई के दौरान वकील ने अदालत के सामने इस कार्रवाई को गंभीर मामला बताया।
CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस पर हैरानी जताई। पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना भी शामिल थे। अदालत ने याद दिलाया कि 1 सितंबर के आदेश में प्रदर्शन से जुड़े छात्रों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने की बात साफ तौर पर कही गई थी। CJI ने कहा कि आदेश की भाषा इतनी स्पष्ट थी कि कोई सामान्य व्यक्ति भी उसका अर्थ समझ सकता है। अदालत ने सवाल उठाया कि उसके बावजूद प्रशासन ने छात्र को इस तरह का नोटिस कैसे भेज दिया।
पुराने आदेश का हवाला
सुप्रीम कोर्ट ने पहले CJP प्रदर्शन से जुड़े छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR को खत्म करने का आदेश दिया था। इसके साथ ही अदालत ने साफ किया था कि प्रदर्शन में शामिल होने वाले छात्रों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। इसी आदेश का हवाला देते हुए छात्र की ओर से पेश वकील ने कहा कि नया नोटिस अदालत के निर्देश के विपरीत है। उन्होंने इसे छात्रों में डर पैदा करने वाली कार्रवाई बताया और कहा कि इसका असर देशभर के छात्रों पर पड़ सकता है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी पूछा कि क्या वकील को जानकारी है कि संबंधित नोटिस बाद में वापस ले लिया गया था। वकील ने कहा कि उन्हें नोटिस वापस लिए जाने की जानकारी मीडिया रिपोर्टों से मिली। इसके बाद CJI ने स्पष्ट किया कि छात्रों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने का आदेश बिल्कुल साफ था। अदालत ने ग्रेटर नोएडा के जिला मजिस्ट्रेट और संबंधित अधिकारियों से इस मामले में स्पष्टीकरण लेने की बात कही। अब प्रशासन को यह बताना होगा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद नोटिस क्यों जारी हुआ।
मजिस्ट्रेट से मांगा जवाब
CJP प्रदर्शन से जुड़ा यह मामला अब प्रशासनिक कार्रवाई और न्यायिक आदेश के पालन के सवाल से जुड़ गया है। अदालत ने संकेत दिया कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश के बाद किसी छात्र के खिलाफ नई दंडात्मक प्रक्रिया शुरू करना गंभीर विषय है। हालांकि संबंधित मजिस्ट्रेट के खिलाफ अभी अंतिम कार्रवाई का फैसला नहीं हुआ है। कोर्ट का अगला कदम अधिकारियों से मिलने वाले स्पष्टीकरण पर निर्भर करेगा। फिलहाल छात्र को दिया गया नोटिस वापस लिया जा चुका है और सुप्रीम कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लिया है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। इसमें शामिल आरोप और प्रशासनिक कार्रवाई से जुड़े विवरण न्यायालय में रखी गई जानकारी तथा उपलब्ध रिपोर्टों पर आधारित हैं और संबंधित अधिकारियों की अंतिम जवाबदेही न्यायिक प्रक्रिया का विषय है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।