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नेत्रदान से रोशनी का संदेश, 70 लोगों ने लिया नेत्रदान का सामूहिक प्रण

मौत के बाद रोशनी का संदेश कोटा में दिखा, 70 लोगों ने लिया नेत्रदान का संकल्प और समाज से इस मुहिम को पूरे साल आगे बढ़ाने की अपील की गई।

By अजय त्यागी
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वरिष्ठ नेत्र सर्जन डॉ. सुरेश पाण्डेय तथा डॉ. विदुषी शर्मा को सम्मानित किया

वरिष्ठ नेत्र सर्जन डॉ. सुरेश पाण्डेय तथा डॉ. विदुषी शर्मा को सम्मानित किया

कोटा, राजस्थान (राहुल पारीक)। मौत के बाद रोशनी का संकल्प कोटा में एक जागरूकता अभियान के समापन समारोह में नजर आया। राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़े के तहत सुवि नेत्र चिकित्सालय के कॉन्फ्रेंस हॉल में हुए कार्यक्रम में चिकित्सकों, करीब 70 स्टाफ सदस्यों और रोगियों के परिजनों ने नेत्रदान का संकल्प लिया। कार्यक्रम में आई बैंक सोसायटी कोटा चैप्टर के अध्यक्ष डॉ. के.के. कंजोलिया सहित पदाधिकारी, चिकित्सक और समाजसेवी मौजूद रहे। नेत्रदान की मुहिम को आगे बढ़ाने के लिए अस्पताल के निदेशक और वरिष्ठ नेत्र सर्जन डॉ. सुरेश पाण्डेय तथा डॉ. विदुषी शर्मा को आई बैंक सोसायटी की ओर से सम्मानित किया गया। इस पहल ने लोगों को मौत के बाद रोशनी देने की सोच से जोड़ने का संदेश दिया।

मौत के बाद भी मदद

डॉ. के.के. कंजोलिया और डॉ. सुरेश पाण्डेय ने कहा कि नेत्रदान मानव सेवा का ऐसा संकल्प है जिससे मृत्यु के बाद भी किसी जरूरतमंद के जीवन में रोशनी लाई जा सकती है। चिकित्सकों ने कॉर्निया प्रत्यारोपण, नेत्रदान की प्रक्रिया, जरूरी समय सीमा और परिवार की सहमति से जुड़े अहम पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने लोगों से नेत्रदान को लेकर मन में बनी भ्रांतियों को दूर करने और परिवार के साथ इस विषय पर पहले से बातचीत करने की अपील की। मौत के बाद रोशनी की यह मुहिम तभी प्रभावी हो सकती है जब परिवार को प्रक्रिया की सही जानकारी हो और जरूरत के समय आई बैंक को समय पर सूचना दी जाए। कार्यक्रम में इसी समझ को आम लोगों तक पहुंचाने पर खास जोर दिया गया।

सालभर जागरूकता जरूरी

समारोह में समाजसेवी संदीप चांदीवाला और अपना घर आश्रम के सतीश गुप्ता ने नेत्रदान को सेवा और परोपकार का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। वक्ताओं ने कहा कि जागरूकता केवल नेत्रदान पखवाड़े तक सीमित नहीं रहनी चाहिए बल्कि युवाओं और परिवारों के बीच पूरे साल इस मुद्दे पर खुलकर संवाद होना चाहिए। लोगों को यह समझाने की कोशिश की गई कि नेत्रदान किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद भी दूसरे इंसान के लिए उम्मीद बन सकता है। कार्यक्रम में युवाओं और परिवारों से अपील की गई कि वे इस विषय पर संकोच छोड़कर जानकारी हासिल करें और अपनी इच्छा परिवार के साथ साझा करें। मौत के बाद रोशनी देने वाली यह मुहिम लगातार आगे बढ़े तो जरूरतमंद लोगों के लिए नई उम्मीद पैदा हो सकती है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। नेत्रदान से संबंधित किसी भी निर्णय से पहले अधिकृत आई बैंक या योग्य चिकित्सकीय विशेषज्ञ से प्रक्रिया और पात्रता की जानकारी अवश्य प्राप्त करें। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief