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नाबालिग हिरासत मामले में पुलिस पर FIR, 15 से ज्यादा अफसर घिरे

नाबालिगों की हिरासत और मारपीट के आरोपों पर मानवाधिकार आयोग सख्त, पुलिस पर FIR के निर्देश, आयुक्त समेत 15 से ज्यादा अफसर जांच के घेरे में।

By अजय त्यागी
1 min read
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प्रतीकात्मक फोटो

प्रतीकात्मक फोटो

पुणे, महाराष्ट्र। पुणे पुलिस पर 8 नाबालिगों को हत्या के एक मामले में कथित तौर पर 5 दिन तक अवैध हिरासत में रखने और सार्वजनिक रूप से उनके साथ मारपीट करने के गंभीर आरोप लगे हैं। महाराष्ट्र राज्य मानवाधिकार आयोग ने मामले की जांच के बाद पुलिस महानिदेशक को पुणे पुलिस आयुक्त समेत 15 से ज्यादा पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है। पुलिस पर FIR के निर्देश के साथ आयोग ने 4 नाबालिगों के अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों से होने का भी उल्लेख किया है। टीएनएन की एक रिपोर्ट के अनुसार मामले में मानवाधिकार उल्लंघन की पुष्टि हुई है।  [1]

मामला कैसे खुला

मामले में कुछ नाबालिगों ने हत्या के एक केस में पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया था। आरोप है कि इसके बाद उन्हें पुलिस थाने में 5 दिन तक गैरकानूनी तरीके से रखा गया और बाद में सार्वजनिक तौर पर घुमाया गया। इसी दौरान उनके साथ मारपीट किए जाने का भी आरोप है। परिवार के एक सदस्य ने हिरासत पर सवाल उठाया तो किशोरों को किशोर न्याय बोर्ड के सामने पेश किया गया। इसके बाद महाराष्ट्र राज्य मानवाधिकार आयोग ने पूरे मामले की तह तक जाने के लिए तथ्य खोजी टीम बनाई। टीम ने प्रभावित लोगों के बयान दर्ज किए और मौके पर जाकर हालात की जानकारी जुटाई।

आयोग ने जांच में सीसीटीवी फुटेज और पुलिस केस डायरी की भी जांच की। अधिकारियों से जुड़े दस्तावेजों और प्रभावित परिवारों की बातों को मिलाकर टीम ने अपनी रिपोर्ट तैयार की। आयोग के मुताबिक जांच में मानवाधिकारों के उल्लंघन के संकेत मिले। इसी आधार पर कार्रवाई को आगे बढ़ाया गया। पुलिस पर FIR का निर्देश केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहा बल्कि इसमें पुलिस आयुक्त से लेकर कांस्टेबल तक 15 से ज्यादा अधिकारियों का जिक्र है। आयोग ने यह भी सिफारिश की कि जिन अधिकारियों पर आरोप हैं उनके खिलाफ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण कानून की संबंधित धाराओं पर भी विचार किया जाए।

आदेश में क्या कहा

आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति सेवानिवृत्त ए एम बदर और सदस्य न्यायमूर्ति सेवानिवृत्त स्वप्ना जोशी तथा आईपीएस सेवानिवृत्त संजय कुमार ने मामले पर गंभीर रुख अपनाया। आयोग ने कहा कि तथ्य खोजी जांच की रिपोर्ट और उसके साथ जुड़े दस्तावेजों को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 173 के तहत एफआईआर माना जाए। साथ ही संबंधित जांच तेजी से पूरी करने का निर्देश दिया गया। आयोग की टीम में विशेष पुलिस महानिरीक्षक दत्ता कराले, रजिस्ट्रार विजय केदार और एसपी विश्वास पांढरे शामिल थे। टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के साथ उपलब्ध रिकॉर्ड और फुटेज की भी पड़ताल की।

पुलिस की ओर से मामले पर फिलहाल विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। रिपोर्ट के मुताबिक पुणे के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि उन्होंने मानवाधिकार आयोग का आदेश नहीं देखा है और इसलिए उस पर टिप्पणी नहीं कर सकते। इस पूरे मामले में पुलिस पर FIR का निर्देश इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि आरोप सीधे नाबालिगों की हिरासत और उनके साथ कथित मारपीट से जुड़े हैं। आयोग की कार्रवाई अब जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया का रास्ता तय करेगी। फिलहाल आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष अदालत और संबंधित जांच के बाद ही सामने आएगा।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। नाबालिगों की हिरासत, मारपीट और पुलिस अधिकारियों के खिलाफ लगाए गए आरोप जांच और संबंधित आधिकारिक प्रक्रिया के अधीन हैं और आरोपों को अंतिम दोषसिद्धि नहीं माना जाना चाहिए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief