ईरानी हमला: अमेरिकी विमान क्षतिग्रस्त, जॉर्डन में बढ़ा युद्ध का खतरा
ईरानी हमले के दौरान कई अमेरिकी विमान क्षतिग्रस्त होने की खबर है। रिपोर्ट के मुताबिक एक A10 विमान का पंख टूट गया और करीब 8 F15 विमानों को नुकसान हुआ।

जॉर्डन एयरबेस पर खड़े अमेरिकी विमान
तेहरान, ईरान। ईरान की ओर से जॉर्डन में एक अमेरिकी एयरबेस पर किए गए हमले में कई अमेरिकी सैन्य विमान क्षतिग्रस्त होने की खबर सामने आई है। NDTV ने CBS की रिपोर्ट के हवाले से बताया कि एक A10 Thunderbolt विमान को नुकसान पहुंचा और उसका एक पंख गायब हो गया। इसके अलावा करीब 8 F15 विमानों को हल्का नुकसान होने की बात कही गई। अमेरिकी सेना ने हमले से बचाव के लिए 30 से ज्यादा Patriot मिसाइलें दागीं। अमेरिकी विमान क्षतिग्रस्त होने की खबर ने पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव को फिर सामने ला दिया है। [1]
एयरबेस पर हमला
रिपोर्ट के मुताबिक हमला रात के समय हुआ और अमेरिकी सैन्य ठिकाना निशाने पर था। ईरान की ओर से किए गए हमले के दौरान अमेरिकी रक्षा प्रणाली ने कई मिसाइलों को रोकने की कोशिश की। Patriot मिसाइलों के इस्तेमाल से पता चलता है कि हमले को गंभीर खतरे के तौर पर लिया गया। जॉर्डन का भौगोलिक स्थान इस संघर्ष में खास महत्व रखता है क्योंकि वह क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण स्थान है। हमले में कितने हथियार इस्तेमाल हुए और उनका पूरा असर कितना रहा इसकी जानकारी अभी सीमित है लेकिन हमले में अमेरिकी विमान क्षतिग्रस्त हुए हैं।
कितना नुकसान हुआ
अमेरिकी विमान क्षतिग्रस्त होने की जानकारी में A10 Thunderbolt का नुकसान सबसे ज्यादा बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार विमान का एक पंख गायब हो गया। इसके अलावा करीब 8 F15 विमानों को हल्का नुकसान हुआ। हालांकि इन विमानों की परिचालन क्षमता पर कितना असर पड़ा है इसकी विस्तृत आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। सैन्य संघर्ष में किसी उपकरण के क्षतिग्रस्त होने और उसके पूरी तरह बेकार होने में अंतर होता है। इसलिए उपलब्ध रिपोर्ट को इसी सीमा में समझना जरूरी है। आगे अमेरिकी सेना की ओर से अधिक जानकारी आने पर तस्वीर साफ हो सकती है।
तनाव और बढ़ा
ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष का असर पहले ही ऊर्जा बाजार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ रहा है। जॉर्डन में अमेरिकी ठिकाने पर हमला तनाव का नया संकेत माना जा रहा है। यदि इस तरह के हमले बढ़ते हैं तो अमेरिका की सैन्य प्रतिक्रिया भी तेज हो सकती है। इससे पश्चिम एशिया में संघर्ष के और फैलने की आशंका बढ़ेगी। भारत सहित दुनिया के कई देशों की नजर इस घटनाक्रम पर है क्योंकि लंबे सैन्य तनाव से तेल आपूर्ति और वैश्विक बाजार दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। सैन्य नुकसान से जुड़े आंकड़े उपलब्ध रिपोर्टों पर आधारित हैं और स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अलग से आवश्यक हो सकती है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।