राजाराम स्वर्णकार को मिला शेखर सम्मान, याद आए चंद्रशेखर जोशी
वरिष्ठ साहित्यकार, गीतकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता राजाराम स्वर्णकार को शेखर सम्मान, चंद्रशेखर जोशी की जन्म जयंती पर साहित्य और समाज की यादें फिर जीवंत हुईं।

राजाराम स्वर्णकार को शेखर सम्मान
बीकानेर, राजस्थान। साहित्य संस्कृति खेल और सामाजिक सरोकारों को जीवन का हिस्सा बनाकर लोगों को जोड़ने वाले स्वर्गीय चंद्रशेखर जोशी की जन्म जयंती पर आयोजित समारोह में वरिष्ठ साहित्यकार गीतकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता राजाराम स्वर्णकार को शेखर सम्मान से सम्मानित किया गया। सखा संगम की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में सम्मान से ज्यादा चर्चा उस विरासत की रही जिसे चंद्रशेखर जोशी अपने पीछे छोड़ गए। मुख्य अतिथि जनसंपर्क विभाग के उपनिदेशक डॉ हरिशंकर आचार्य रहे। अध्यक्षता सखा संगम अध्यक्ष एन डी रंगा ने की। विशिष्ट अतिथि साहित्यकार कवि कथाकार राजेन्द्र जोशी रहे।
यादों का सिलसिला
मुख्य अतिथि डॉ हरिशंकर आचार्य ने कहा कि चंद्रशेखर जोशी ने अपनी प्रतिभा को किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रखा था। साहित्य के साथ सांस्कृतिक गतिविधियों और खेल प्रशासन में भी उन्होंने उल्लेखनीय भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि समाज किसी व्यक्ति को केवल उसके पद या उपलब्धियों के कारण लंबे समय तक याद नहीं रखता, बल्कि उसके व्यवहार और लोगों को साथ लेकर चलने की क्षमता भी उसकी पहचान बनती है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे एन डी रंगा ने जोशी को विचारों से समृद्ध, सरल और मृदुभाषी व्यक्तित्व बताते हुए कहा कि वे हर आयोजन में आत्मीयता भर देते थे।
रंगा ने कहा कि सखा संगम की ओर से शुरू किया गया शेखर सम्मान चंद्रशेखर जोशी के इन्हीं मानवीय और सांस्कृतिक मूल्यों को जीवित रखने की कोशिश है। विशिष्ट अतिथि राजेन्द्र जोशी ने कहा कि चंद्रशेखर जोशी मूल रूप से उत्सवधर्मी व्यक्तित्व के धनी थे। उनका मानना था कि उत्सव केवल खुशी मनाने का मौका नहीं बल्कि समाज को आपस में जोड़ने का जरिया भी है। राजाराम स्वर्णकार को दिया गया सम्मान इसी सोच को आगे बढ़ाने वाला कदम बताया गया। समारोह में उनकी स्मृतियों के साथ यह बात भी उभरी कि जोशी का प्रभाव लोगों के बीच उनके सहज व्यवहार से बना था।
सम्मान का मतलब
समीक्षक अशफाक कादरी ने सम्मानित साहित्यकार राजाराम स्वर्णकार के व्यक्तित्व और कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि स्वर्णकार केवल रचनाकार की भूमिका तक सीमित नहीं हैं बल्कि साहित्यिक गतिविधियों के सक्रिय संवाहक भी हैं। सम्मान ग्रहण करते हुए राजाराम स्वर्णकार ने इसे बेहद आत्मीय और भावनात्मक सम्मान बताया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान ऐसे व्यक्तित्व की स्मृति से जुड़ा है जिसने साहित्य संस्कृति और समाज के बीच लगातार संवाद कायम रखा। इस मौके पर सम्मान की गरिमा के साथ उस विरासत को याद किया गया जिसने बीकानेर के सांस्कृतिक माहौल को प्रभावित किया।

मुक्ति संस्थान के अध्यक्ष एडवोकेट हीरालाल हर्ष ने कहा कि चंद्रशेखर जोशी ने अपने जीवनकाल में बीकानेर की सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को नई ऊर्जा दी। उन्होंने कहा कि जोशी खुद एक उत्सव की तरह थे और जहां जाते वहां लोगों को जोड़ने वाला माहौल बन जाता था। कार्यक्रम के दौरान सोहनलाल जोशी और मंजूर अली चांदवानी ने उनसे जुड़ी अपनी स्मृतियां साझा कीं। इन संस्मरणों के जरिए समारोह में मौजूद लोगों के सामने जोशी के व्यक्तित्व का मानवीय पक्ष भी सामने आया। श्रद्धांजलि के साथ राजाराम स्वर्णकार के साहित्यिक योगदान को सम्मानित करने का भाव भी प्रमुख रहा।
विरासत का संदेश
कार्यक्रम में नागेश्वर जोशी, मेघातिथि जोशी और शशि शेखर ने भी अपने विचार रखे। वक्ताओं के संबोधन में साहित्य संस्कृति और सामाजिक जुड़ाव के बीच चंद्रशेखर जोशी की भूमिका को रेखांकित किया गया। आयोजन का स्वर सिर्फ स्मरण तक सीमित नहीं रहा बल्कि उनके विचारों को आगे बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया गया। सखा संगम ने शेखर सम्मान के जरिए इसी विरासत को एक नई कड़ी देने की कोशिश की है। राजाराम स्वर्णकार का चयन भी साहित्यिक योगदान और गतिविधियों से जुड़े उनके लंबे सक्रिय सरोकारों को सम्मान देने के रूप में सामने आया। समारोह में मौजूद लोगों ने इसे आत्मीय अवसर माना।
कार्यक्रम का संचालन युवा कवि शंशाक शेखर जोशी ने किया। समारोह में चंद्रशेखर जोशी की स्मृतियों को साझा करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई और साहित्यकार राजाराम स्वर्णकार को सम्मान प्रदान किया गया। पूरे आयोजन में साहित्यिक सक्रियता, सांस्कृतिक जुड़ाव और सामाजिक सरोकार एक साथ दिखाई दिए। यही वह विरासत है जिसे सखा संगम आगे बढ़ाने की बात कर रहा है। राजाराम स्वर्णकार के सम्मान ने समारोह को एक स्पष्ट साहित्यिक केंद्र दिया, जबकि चंद्रशेखर जोशी की स्मृतियों ने इसे भावनात्मक आधार दिया। इस तरह आयोजन सम्मान और स्मरण के साथ सामाजिक जुड़ाव का संदेश भी दे गया।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। समारोह में व्यक्त विचार संबंधित वक्ताओं के हैं और आयोजन से जुड़े विवरण आयोजकों द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी पर आधारित हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।