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समायिक दिवस पर गूंजा समता का संदेश, साध्वीश्री ने समझाया महत्व

पर्युषण महापर्व के तृतीय दिवस समायिक दिवस पर श्रावक श्राविकाओं ने साध्वीश्री के प्रवचन सुने और समायिक साधना के जरिए आत्मचिंतन किया। 

By अजय त्यागी
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पर्युषण महापर्व के तृतीय दिवस समायिक दिवस पर आत्माराधना

पर्युषण महापर्व के तृतीय दिवस समायिक दिवस पर आत्माराधना

मुंबई, महाराष्ट्र। पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व के तृतीय दिवस समायिक दिवस पर महाप्रज्ञ पब्लिक स्कूल कालबादेवी में श्रद्धा साधना और आत्माराधना का विशेष वातावरण देखने को मिला। बड़ी संख्या में श्रावक श्राविकाओं ने उपस्थित होकर साध्वीश्री के प्रवचन सुने और समायिक के माध्यम से आत्मचिंतन तथा आध्यात्मिक साधना का लाभ लिया। कार्यक्रम की शुरुआत तेरापंथ युवक परिषद दक्षिण मुंबई के मंगलाचरण से हुई। इसके साथ ही पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। निर्धारित समय में समायिक साधना करते हुए श्रद्धालुओं ने सांसारिक गतिविधियों से विराम लेकर संयम आत्मनिरीक्षण और आध्यात्मिक उन्नति की दिशा में कदम बढ़ाया।

समता का संदेश

शासनश्री साध्वीश्री कंचनप्रभाजी ने समायिक के महत्व को समझाते हुए कहा कि यह साधना व्यक्ति को एक मुहूर्त के लिए मुनि जैसा जीवन जीने की दिशा में ले जाती है। उन्होंने ठाणं सूत्र के आधार पर विशेष अच्छेरों का वर्णन भी सुनाया। साध्वीश्री ने जैन शासन में गुरु नेतृत्व और चरित्र पालन की महत्ता को रेखांकित करते हुए इसे सौभाग्य का विषय बताया। उनके प्रवचन में समायिक को केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि सांसारिक कामों से कुछ समय के लिए उपरत होकर स्वयं की ओर लौटने वाली साधना के रूप में समझाया गया। इससे आत्मचिंतन का संदेश प्रमुखता से सामने आया।

शासनश्री साध्वीश्री मंजुरेखाजी ने कहा कि सामायिक का अर्थ समता को प्रतिष्ठित करना है और समता के बिना परिवार तथा समाज का संचालन मुश्किल है। उन्होंने व्यक्तिगत जीवन में भी समता की जरूरत बताते हुए क्रोध और अहंकार के बढ़ते प्रभाव पर चिंता जताई। उनके अनुसार ईगो के कारण बढ़ता क्रोध इंसान की जिंदगी बिगाड़ सकता है। इसलिए क्रोध का शमन जरूरी है। प्रवचन के जरिए यह संदेश दिया गया कि भीतर की अशांति को नियंत्रित किए बिना बाहरी संबंधों में स्थिरता लाना कठिन है। समता को साधना जीवन को संतुलित बनाने का माध्यम बन सकती है।

भक्ति में रंगा माहौल

समायिक दिवस के दौरान साध्वीश्री मंजूरेखाजी उदितप्रभाजी निर्भयप्रभाजी और चेलनाश्रीजी ने मधुर गीत प्रस्तुत कर वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया। साध्वीश्री चेलनाश्रीजी ने भी इस अवसर पर विशेष प्रस्तुति दी। कार्यक्रम का संयोजन शासनश्री साध्वी मंजूरेखाजी ने किया। प्रवचन साधना और गीतों के बीच श्रद्धालुओं की सहभागिता ने आयोजन को भावपूर्ण रूप दिया। पूरे कार्यक्रम में पर्युषण महापर्व की आध्यात्मिक भावना दिखाई दी। समायिक दिवस का उद्देश्य केवल धार्मिक विधि तक सीमित नहीं रहा बल्कि आत्मनिरीक्षण संयम और समता जैसे मूल्यों को दैनिक जीवन से जोड़ने का प्रयास भी दिखाई दिया।

आयोजन में अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद के राष्ट्रीय सहमंत्री अंकुर लुणीया प्रकाशन प्रभारी महेश परमार और जोनल कॉर्डिनेटर कमलेश भंसाली की विशेष उपस्थिति रही। आचार्य महाप्रज्ञ विद्यानिधि फाउंडेशन श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा तेरापंथ युवक परिषद तेरापंथ महिला मंडल और अणुव्रत समिति दक्षिण के पदाधिकारियों सहित सदस्यों की भी गरिमामयी मौजूदगी रही। इससे आयोजन में संगठनात्मक सहभागिता भी दिखाई दी। पर्युषण के दौरान धर्माराधना के प्रति बढ़ता उत्साह और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भागीदारी सामूहिक साधना की तस्वीर पेश करती रही।

साधना का संदेश

समायिक दिवस का आयोजन श्रद्धालुओं के लिए आत्मचिंतन संयम और साधना की प्रेरणा लेकर आया। कार्यक्रम में दिए गए संदेशों का केंद्र समता आत्मनिरीक्षण और क्रोध के शमन पर रहा। साध्वीश्री के प्रवचनों ने धार्मिक साधना को रोजमर्रा के जीवन के व्यवहार से जोड़ने की कोशिश की। श्रद्धालुओं की सहभागिता ने भी पर्युषण महापर्व के प्रति उत्साह को सामने रखा। आयोजन के दौरान स्वाध्याय प्रवचन गीत और साधना के जरिए आध्यात्मिक वातावरण बना रहा। दक्षिण मुंबई के तेरापंथ समाज से जुड़े विभिन्न संगठनों और पदाधिकारियों की मौजूदगी ने कार्यक्रम को सामूहिक स्वरूप दिया और धार्मिक जागरूकता का संदेश मजबूत किया।

इस आयोजन की जानकारी दक्षिण मुंबई सभा मीडिया प्रभारी नितेश धाकड़ और तेरापंथ युवक परिषद दक्षिण मुंबई के उपाध्यक्ष दर्शन डागलिया ने दी। समायिक दिवस के मौके पर हुए कार्यक्रम ने पर्युषण महापर्व की साधना परंपरा को केंद्र में रखा और श्रद्धालुओं को कुछ समय के लिए सांसारिक गतिविधियों से विराम लेकर स्वयं के भीतर देखने का अवसर दिया। समता को जीवन में उतारने क्रोध पर नियंत्रण रखने और आत्मचिंतन को व्यवहार का हिस्सा बनाने का संदेश पूरे आयोजन में प्रमुख रहा। इसी वजह से यह अवसर धार्मिक अनुष्ठान के साथ आत्मसुधार और सामूहिक आध्यात्मिक जागरूकता का संदेश भी देता नजर आया।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। धार्मिक प्रवचनों में व्यक्त विचार संबंधित साध्वीश्री और वक्ताओं के हैं तथा यह रिपोर्ट उपलब्ध कराई गई कार्यक्रम संबंधी जानकारी पर आधारित है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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