सत्ता की चाबी पर नजर, बाड़ेबंदी ने नतीजों से पहले बढ़ाई सियासी हलचल
घटा मतदान, 154 निर्दलीय और भाजपा की बाड़ेबंदी ने भीलवाड़ा नगर निगम चुनाव का गणित उलझा दिया है। अब 14 सितंबर के नतीजे तय करेंगे सत्ता की चाबी किसके हाथ जाएगी।

प्रतीकात्मक फोटो
भीलवाड़ा, राजस्थान (पंकज पोरवाल)। नगर निगम बनने के बाद पहली बार हुए आम चुनाव में मतदान प्रतिशत घटने और बड़ी संख्या में निर्दलीय प्रत्याशियों के मैदान में उतरने से सियासी तस्वीर उलझ गई है। 70 वार्डों वाले निगम में 2,96,682 मतदाताओं में से 1,89,390 ने वोट डाले और मतदान 63.84 प्रतिशत रहा। यह 2021 के नगर परिषद चुनाव के 67.13 प्रतिशत से 3.29 प्रतिशत कम है। अब 14 सितंबर को मतगणना होगी। उससे पहले भाजपा की ओर से प्रत्याशियों की बाड़ेबंदी ने चर्चाओं को और तेज कर दिया है और सत्ता की चाबी पर नजरें टिक गई हैं।
कम वोट का असर
इस चुनाव में भाजपा ने सभी 70 वार्डों में अधिकृत प्रत्याशी उतारे जबकि कांग्रेस 53 वार्डों तक ही सीमित रही। कांग्रेस के कई प्रत्याशियों को समय पर चुनाव चिह्न नहीं मिलने का असर भी उसके आंकड़े पर पड़ा। दूसरी ओर 154 निर्दलीयों की मौजूदगी ने मुकाबले को सीधा भाजपा बनाम कांग्रेस नहीं रहने दिया। कई वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशियों ने दोनों प्रमुख दलों के उम्मीदवारों को चुनौती दी। इसलिए कम मतदान का फायदा किसे मिला और किसका गणित बिगड़ा यह सवाल अभी खुला है। परिणाम के बाद ही साफ होगा कि निर्दलीयों ने सत्ता की चाबी किस दिशा में मोड़ी और किस दल की उम्मीदों पर असर डाला।
कांग्रेस की कमजोर मौजूदगी के बावजूद पार्टी नतीजों का इंतजार कर रही है। गुरुवार को कांग्रेस कार्यालय में अपेक्षाकृत शांत माहौल रहा और प्रत्याशियों की बाड़ेबंदी को लेकर किसी पदाधिकारी के संपर्क की जानकारी सामने नहीं आई। निर्दलीय प्रत्याशी भी फिलहाल राजनीतिक दलों से दूरी बनाए हुए हैं। किसी ने किसी दल से फोन आने या बाड़ेबंदी में बुलाए जाने की पुष्टि नहीं की है। हालांकि जिन वार्डों में निर्दलीयों का प्रदर्शन मजबूत रहा है वहां नतीजों के बाद उनकी अहमियत अचानक बढ़ सकती है। ऐसे में सत्ता की चाबी कई वार्डों के मामूली अंतर से निकलकर निर्दलीयों तक पहुंचने की संभावना चर्चा में है।
भाजपा का पुराना दबदबा
भीलवाड़ा नगर परिषद के वर्ष 2000 से अब तक के छह चुनावों में भाजपा का दबदबा रहा है। वर्ष 2000 में विनोद कुमार अग्रवाल भाजपा से चेयरमैन बने जबकि 2005 में कांग्रेस के ओमप्रकाश नराणीवाल सभापति रहे। वर्ष 2010 में भाजपा के भगवती लाल बहेड़िया सभापति बने लेकिन निधन के बाद दिनेश शर्मा ने कार्यवाहक जिम्मेदारी संभाली और उपचुनाव में अनिल बल्दवा सभापति बने। वर्ष 2015 में ललिता समदानी चेयरमैन बनीं। बाद में दीपिका कंवर, ललिता समदानी, कांग्रेस की मंजू पोखरना और भाजपा की मंजू चेचाणी ने भी यह जिम्मेदारी संभाली। इससे भाजपा का लंबा राजनीतिक प्रभाव दिखता है।
वर्ष 2021 में भी नगर परिषद के 70 वार्ड थे। भाजपा को 31, कांग्रेस को 22 और निर्दलीयों को 17 वार्ड मिले थे। किसी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला तो राजनीतिक जोड़तोड़ के जरिए भाजपा ने बोर्ड बनाया और राकेश पाठक चेयरमैन बने। बाद में नगर परिषद को नगर निगम में क्रमोन्नत किया गया और राकेश पाठक भीलवाड़ा के पहले महापौर बने। इस इतिहास के कारण मौजूदा चुनाव भाजपा के लिए केवल बोर्ड बनाने की लड़ाई नहीं है बल्कि पुराने राजनीतिक वर्चस्व को बनाए रखने की परीक्षा भी है। वहीं कांग्रेस के सामने सत्ता समीकरण बदलने की चुनौती है और निर्दलीय फिर सत्ता की चाबी बन सकते हैं।
बाड़ेबंदी ने बढ़ाई हलचल
मतगणना में अभी समय है लेकिन भाजपा ने परिणाम से पहले अपने प्रत्याशियों की बाड़ेबंदी शुरू कर दी। पार्टी ने प्रत्याशियों को फोन कर बुलाया और देर रात बसों के जरिए उन्हें जयपुर की ओर रवाना किया। इस दौरान सांसद दामोदर अग्रवाल, भाजपा जिलाध्यक्ष प्रशांत मेवाड़ा और पूर्व विधायक विट्ठलशंकर अवस्थी भी मौजूद रहे। बताया गया कि सभी प्रत्याशियों के मोबाइल फोन स्विच ऑफ करवा दिए गए। भाजपा इसे संगठनात्मक रणनीति के रूप में देख रही है लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे बहुमत के आंकड़े को लेकर सतर्कता से जोड़कर देखा जा रहा है। नतीजे आने से पहले यह कदम सत्ता की चाबी को लेकर भाजपा की गंभीर तैयारी का संकेत माना जा रहा है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 70 वार्डों वाले नगर निगम में भाजपा एक बार फिर सत्ता कायम रख पाएगी या कांग्रेस वापसी का रास्ता बनाएगी। घटा मतदान, भाजपा के 70 प्रत्याशी, कांग्रेस के 53 अधिकृत उम्मीदवार और 154 निर्दलीय इस चुनाव के चार बड़े समीकरण हैं। कई वार्डों में बागियों ने भी अधिकृत प्रत्याशियों के सामने चुनौती खड़ी की है। यदि किसी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला तो 2021 की तरह निर्दलीय पार्षद फिर निर्णायक हो सकते हैं। ऐसे में 14 सितंबर की मतगणना सिर्फ जीत हार नहीं बताएगी बल्कि यह भी तय करेगी कि सत्ता की चाबी आखिर किसके हाथ लगी।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। चुनावी संभावनाओं और राजनीतिक समीकरणों से संबंधित आकलन उपलब्ध तथ्यों पर आधारित हैं और अंतिम परिणाम की भविष्यवाणी नहीं माने जाने चाहिए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।