कौशल विकास के मंच पर घुंघरू से तूफान तक, उमेश राव ने बांधा समां
कौशल विकास कार्यक्रम में घुंघरू, जानवरों और तूफान की हूबहू आवाजों के साथ राजनेताओं और अभिनेताओं की मिमिक्री ने छात्रों को मंत्रमुग्ध किया।

कौशल विकास कार्यक्रम
पाटन, राजस्थान (शिंभू सिंह शेखावत)। राजकीय महाविद्यालय पाटन में 10 सितंबर 2026 को राष्ट्रीय सेवा योजना और कौशल विकास प्रशिक्षण के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय कौशल विकास कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत प्राचार्य डॉ. मदन लाल मीणा के प्रेरणादायक संबोधन से हुई। उन्होंने विद्यार्थियों को पारंपरिक शिक्षा के साथ कौशल उन्नयन और व्यावहारिक ज्ञान की अहमियत समझाई। उनका कहना था कि आज के दौर में पढ़ाई के साथ उपयोगी हुनर विकसित करना भी जरूरी है। कार्यक्रम का संचालन सहायक आचार्य रीतु शर्मा ने किया। आयोजन में महाविद्यालय का समस्त स्टाफ और बड़ी संख्या में छात्र छात्राएं मौजूद रहे।
आवाजों ने मचाई धूम
कार्यक्रम का सबसे खास आकर्षण प्रसिद्ध वॉइस आर्टिस्ट उमेश राव रहे। उन्होंने मंच पर अपनी आवाज के हुनर का ऐसा प्रदर्शन किया कि विद्यार्थी और प्राध्यापक हैरान रह गए। उन्होंने घुंघरू की खनक, अलग अलग जानवरों की आवाज और प्राकृतिक तूफान की ध्वनि को अपनी आवाज से जीवंत कर दिया। उनकी प्रस्तुति सुनकर ऐसा लगा मानो ये आवाजें मंच के आसपास ही मौजूद हों। इसके बाद उन्होंने देश के प्रमुख राजनेताओं और प्रसिद्ध अभिनेताओं की हूबहू मिमिक्री कर खूब तालियां बटोरीं। उमेश राव की प्रस्तुति ने कार्यक्रम को मनोरंजन के साथ सीखने का यादगार अवसर बना दिया।
आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों में रचनात्मक कौशल को बढ़ावा देना और उन्हें इस क्षेत्र में मौजूद करियर की संभावनाओं से परिचित कराना रहा। वॉइस आर्टिस्ट की प्रस्तुति ने यह दिखाया कि आवाज की कला भी मेहनत और अभ्यास से विकसित होने वाला हुनर है। विद्यार्थियों के लिए यह अनुभव इसलिए भी खास रहा क्योंकि उन्होंने एक ऐसे क्षेत्र की संभावनाओं को करीब से देखा जो सामान्य पढ़ाई से अलग है। कार्यक्रम में कौशल विकास को केवल नौकरी से जुड़ी तकनीकी क्षमता तक सीमित नहीं रखा गया बल्कि रचनात्मक अभिव्यक्ति और अपनी प्रतिभा को पहचानने से भी जोड़ा गया।
हुनर से करियर तक
प्राचार्य डॉ. मदन लाल मीणा ने अपने संबोधन में विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान पर ध्यान देने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पारंपरिक शिक्षा के साथ कौशल उन्नयन विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए बेहतर तरीके से तैयार कर सकता है। इसी सोच के तहत कार्यक्रम में आवाज की कला और मिमिक्री को उदाहरण के रूप में सामने रखा गया। विद्यार्थियों ने उमेश राव की प्रस्तुति के दौरान अलग अलग ध्वनियों और आवाजों की बारीकियां देखीं। इससे उन्हें अपनी रचनात्मक रुचियों को पहचानने और उन्हें भविष्य के संभावित करियर विकल्पों से जोड़ने का अवसर मिला।

राष्ट्रीय सेवा योजना के साथ आयोजित इस कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को कक्षा से बाहर सीखने का भी मौका दिया। कार्यक्रम के दौरान मंच संचालन की जिम्मेदारी सहायक आचार्य रीतु शर्मा ने संभाली और पूरे आयोजन में ऊर्जा बनी रही। अंत में सभी के प्रति आभार व्यक्त किया गया। बड़ी संख्या में छात्र छात्राओं की मौजूदगी से साफ रहा कि विद्यार्थियों में नए कौशल सीखने और अलग क्षेत्रों को समझने की रुचि है। कौशल विकास के जरिए प्रतिभा को पहचानने और व्यावहारिक अनुभव हासिल करने का संदेश कार्यक्रम का प्रमुख केंद्र रहा।
हुनर बना आकर्षण
कार्यक्रम में उमेश राव की आवाजों की प्रस्तुति ने विद्यार्थियों को यह समझने का मौका दिया कि रचनात्मकता को भी एक उपयोगी कौशल में बदला जा सकता है। घुंघरू की खनक से लेकर जानवरों की आवाज और तूफान की ध्वनि तक उनकी प्रस्तुति ने सभागार में अलग ही माहौल बना दिया। राजनेताओं और अभिनेताओं की मिमिक्री ने कार्यक्रम में मनोरंजन का रंग भी भर दिया। प्राचार्य के संदेश और वॉइस आर्टिस्ट की प्रस्तुति ने मिलकर विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ हुनर विकसित करने की जरूरत का संदेश दिया। आयोजन के अंत में विद्यार्थियों और स्टाफ ने कार्यक्रम के अनुभव को सराहा।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। कार्यक्रम में प्रस्तुत विचार और कलात्मक प्रस्तुतियां संबंधित वक्ताओं और कलाकार से जुड़ी हैं तथा किसी कौशल को करियर में बदलने की सफलता व्यक्ति की प्रतिभा प्रयास और अवसरों पर निर्भर करती है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।