BRICS से भारत को फायदा नहीं दिखा, कांग्रेस के दावे पर BJP का वार
BRICS से भारत को फायदा नहीं मिला या तस्वीर कुछ और है। चिदंबरम के बयान पर BJP ने पलटवार किया है। दिल्ली में होने वाली BRICS बैठक से पहले सियासी बहस तेज हो गई है।

प्रतीकात्मक फोटो
नई दिल्ली, दिल्ली। BRICS से भारत को फायदा हुआ या नहीं, इस सवाल ने दिल्ली में होने वाले शिखर सम्मेलन से पहले सियासी बहस तेज कर दी है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद पी चिदंबरम ने हाल के BRICS सम्मेलनों के नतीजों पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें पिछले 2 या 3 सम्मेलनों में भारत को कोई ठोस फायदा नजर नहीं आया। TOI की एक रिपोर्ट के अनुसार, चिदंबरम ने कहा कि पहले के BRICS सम्मेलनों से कुछ ठोस फायदे दिखाई देते थे लेकिन हाल के आयोजनों में ऐसा नहीं दिखा। उनके बयान पर BJP ने तीखा पलटवार किया है। [1]
चिदंबरम ने क्या कहा
चिदंबरम का सवाल ऐसे समय आया है जब भारत 12 और 13 सितंबर को 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहा है। उन्होंने BRICS के अलावा SCO, G20 और QUAD जैसे बहुपक्षीय मंचों से मिलने वाले वास्तविक फायदे पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि हाल के 2 या 3 BRICS सम्मेलनों में उन्हें भारत के लिए कोई स्पष्ट लाभ दिखाई नहीं दिया। उनके इस बयान ने विदेश नीति और बहुपक्षीय कूटनीति को लेकर नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। सवाल यह है कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय मंचों से भारत को सीधे आर्थिक या रणनीतिक फायदे के रूप में क्या हासिल हो रहा है।
BJP ने किया पलटवार
कांग्रेस के इस हमले पर BJP ने पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष को भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका नजर नहीं आती। BJP ने BRICS के बढ़ते प्रभाव और भारत की उसमें भूमिका को उपलब्धि के तौर पर पेश किया। पार्टी की ओर से कहा गया कि BRICS सम्मेलनों के दौरान भारत का निर्यात बढ़ा है और समूह का वैश्विक आर्थिक महत्व भी काफी बड़ा है। BJP नेता नितिन नबीन ने चिदंबरम के बयान को विपक्ष की पुरानी सोच से जोड़ते हुए निशाना साधा। इस राजनीतिक टकराव ने BRICS की उपयोगिता को लेकर चल रही बहस को और ज्यादा सुर्खियों में ला दिया है।
दिल्ली में बड़ा सम्मेलन
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन की तैयारियां तेज हैं। भारत 2026 में BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और राजधानी में 12 और 13 सितंबर को प्रमुख देशों के नेता जुटेंगे। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन समेत कई बड़े नेताओं की मौजूदगी प्रस्तावित है। भारत के लिए यह सम्मेलन सिर्फ मेजबानी का कार्यक्रम नहीं बल्कि वैश्विक दक्षिण, आर्थिक सहयोग और बदलती विश्व व्यवस्था में अपनी भूमिका मजबूत करने का मौका भी है। ऐसे में कांग्रेस और BJP के बीच शुरू हुई बहस राजनीतिक तौर पर काफी अहम हो गई है।
फायदे पर असली सवाल
BRICS से भारत को फायदा हुआ या नहीं, इसका जवाब केवल किसी एक सम्मेलन के नतीजों से तय करना आसान नहीं है। इस समूह में आर्थिक सहयोग, व्यापार, वित्तीय व्यवस्था और विकास से जुड़े कई मुद्दे उठते रहे हैं। भारत ने भी BRICS के जरिए वैश्विक संस्थाओं में सुधार और विकासशील देशों की आवाज मजबूत करने पर जोर दिया है। दूसरी तरफ आलोचकों का कहना है कि इन बैठकों से जमीन पर मिलने वाले ठोस परिणामों को स्पष्ट रूप से दिखाना जरूरी है। इसी अंतर ने चिदंबरम के सवाल को राजनीतिक बहस का मुद्दा बना दिया है और BJP के जवाब ने इसे और गरमा दिया है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। विभिन्न राजनीतिक दलों और नेताओं के बयान उनके अपने राजनीतिक दृष्टिकोण को दर्शाते हैं और BRICS से होने वाले वास्तविक लाभ का आकलन अलग आर्थिक तथा रणनीतिक मानकों पर किया जा सकता है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।