रुपया फिर कमजोर, RBI की मदद पर भी भारी पड़ रहे ये दो कारण
रुपया फिर कमजोर हो रहा है और महंगा कच्चा तेल तथा बढ़ती अमेरिकी बॉन्ड यील्ड ने भारतीय मुद्रा पर दबाव बढ़ा दिया है। RBI की कोशिशों के बावजूद बाजार में चिंता बढ़ी।

प्रतीकात्मक फोटो
मुंबई, महाराष्ट्र। रुपया फिर कमजोर होने की राह पर है और शुक्रवार को भारतीय मुद्रा के 95.62 से 95.68 प्रति डॉलर के दायरे में खुलने की उम्मीद जताई गई थी। गुरुवार को रुपया 95.44 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। Reuters की एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 3 कारोबारी सत्रों में रुपया करीब 1% कमजोर हो चुका है। पिछले सप्ताह Reserve Bank of India की मदद से रुपया 94.30 प्रति डॉलर के 2 महीने के उच्च स्तर तक पहुंचा था लेकिन अब महंगे कच्चे तेल और अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बढ़ती चिंता ने उस सुधार पर दबाव डाल दिया है। [1]
तेल ने बढ़ाई चिंता
रुपया फिर कमजोर होने के पीछे इस समय सबसे बड़ा दबाव कच्चे तेल की कीमतों का है। गुरुवार को Brent crude में 6% से ज्यादा की तेजी आई और एशियाई कारोबार में इसकी कीमत करीब 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। इस सप्ताह Brent करीब 12% चढ़ चुका है जबकि इससे पहले वाले सप्ताह में भी इसमें 8% की बढ़त हुई थी। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और प्रमुख समुद्री रास्तों पर हमलों की वजह से तेल की आपूर्ति बाधित होने की आशंका बढ़ी है। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है इसलिए कीमतों में लंबी तेजी से देश के बाहरी खाते और महंगाई पर दबाव पड़ सकता है।
अमेरिकी यील्ड भी भारी
तेल के साथ अमेरिकी Treasury yields में बढ़ोतरी ने रुपये की मुश्किल और बढ़ा दी है। अमेरिका के महंगाई आंकड़ों के बाद बाजार में Federal Reserve की अगली बैठक में ब्याज दर बढ़ने की संभावना मजबूत हुई है। 10 साल की अमेरिकी Treasury yield करीब 5% तक पहुंच गई है। ऊंची अमेरिकी यील्ड निवेशकों के लिए डॉलर आधारित संपत्तियों को ज्यादा आकर्षक बना सकती है और इससे उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव बढ़ता है। एशियाई शेयर बाजारों में भी कमजोरी देखी गई और कई क्षेत्रीय मुद्राएं नीचे आईं। ऐसे माहौल में भारतीय मुद्रा को भी लगातार बिकवाली दबाव का सामना करना पड़ रहा है।
RBI की राह कठिन
Reserve Bank of India ने पिछले सप्ताह विदेशी भारतीयों की उम्मीद से काफी ज्यादा जमा राशि आने के बाद रुपये को मजबूत करने में मदद की थी। उस समय रुपया करीब 95.70 से सुधरकर 94.30 प्रति डॉलर के 2 महीने के उच्च स्तर तक पहुंच गया था। लेकिन मौजूदा हालात में केंद्रीय बैंक के लिए उसी तरह आक्रामक तरीके से मुद्रा को सहारा देना आसान नहीं माना जा रहा। Reuters से बातचीत में एक बैंक के मुद्रा कारोबारी ने संकेत दिया कि जब दबाव डालने वाले बाहरी कारण इतने मजबूत हों तो रुपये को लगातार आक्रामक तरीके से बचाना मुश्किल हो सकता है। अब बाजार की नजर RBI की अगली प्रतिक्रिया पर है।
आम आदमी पर असर
रुपया फिर कमजोर रहने और तेल महंगा होने का असर सिर्फ विदेशी मुद्रा बाजार तक सीमित नहीं रह सकता। भारत में महंगे कच्चे तेल से आयात बिल बढ़ सकता है और लंबे समय तक कीमतें ऊंची रहने पर महंगाई तथा आर्थिक वृद्धि पर दबाव बन सकता है। दूसरी तरफ अमेरिका में ऊंची Treasury yields और संभावित ब्याज दर बढ़ोतरी से डॉलर मजबूत रहने की संभावना रुपये के लिए चुनौती बनी हुई है। अगर पश्चिम एशिया का तनाव और तेल की तेजी लंबे समय तक जारी रही तो भारतीय मुद्रा पर दबाव और बढ़ सकता है। फिलहाल रुपया फिर कमजोर होने के साथ बाजार की सबसे बड़ी चिंता तेल और डॉलर दोनों का एक साथ मजबूत होना है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। विदेशी मुद्रा और कच्चे तेल की कीमतें वैश्विक घटनाक्रम, केंद्रीय बैंक की नीतियों, निवेश प्रवाह और बाजार की परिस्थितियों के अनुसार तेजी से बदल सकती हैं इसलिए किसी भी आर्थिक या निवेश संबंधी निर्णय से पहले ताजा आधिकारिक आंकड़ों की पुष्टि करनी चाहिए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।