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वाणी संयम जरूरी, साध्वीजी ने बताया शब्दों से कैसे बनता है माहौल

वाणी संयम पर दक्षिण मुंबई में हुए कार्यक्रम में साध्वीजी कंचनप्रभाजी ने वाणी को व्यक्तित्व की पहचान बताया। मीठे शब्दों और सोच समझकर बोलने का संदेश दिया गया।

By अजय त्यागी
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पर्युषण महापर्व - वाणी संयम दिवस

पर्युषण महापर्व - वाणी संयम दिवस

दक्षिण मुंबई, महाराष्ट्र। वाणी संयम को जीवन में संतुलन और मधुर संबंधों की अहम कड़ी बताते हुए दक्षिण मुंबई में प्रेरक कार्यक्रम आयोजित हुआ। शासन श्री साध्वीजी कंचनप्रभाजी ने कहा कि वाणी हमारे व्यक्तित्व की पहचान है और एक मीठा शब्द क्रोध की अग्नि को शांत कर सकता है। उन्होंने कहा कि जब वाणी में अहंकार आ जाता है तो वहीं से माहौल और परिवेश असंतुलित होने लगता है। इसलिए वाणी संयम के साथ बोलना और शब्दों के प्रभाव को समझना जरूरी है। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को व्यवहार में मधुरता और विचारों में स्पष्टता रखने की प्रेरणा दी गई।

वाणी की पहचान

शासन श्री साध्वीजी मंजुरेखाजी ने कहा कि वाणी संयम का संबंध केवल बोलने के तरीके से नहीं बल्कि व्यक्ति के विचार और व्यवहार से भी है। उन्होंने बताया कि सुख प्राप्त करने का आधार समाज और परिवार है और इनके बीच व्यक्ति का चिंतन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अगर कोई बात सोच समझकर कही जाए तो वह प्रेरणा बन सकती है और उसके शब्दों की मूल्यवत्ता बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि वाणी की मधुरता से व्यक्ति के संस्कारों का पता चलता है। साध्वी उदितप्रभाजी ने वाणी संयम क्यों जरूरी है विषय पर सुंदर प्रस्तुति देकर इस संदेश को सहज और प्रभावी तरीके से सामने रखा।

कार्यक्रम में साध्वीजी कंचनप्रभाजी ने अक्षरों के माध्यम से उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध किया। उनकी प्रस्तुति में शब्दों की शक्ति और वाणी संयम के महत्व को प्रभावशाली ढंग से सामने रखा गया। साध्वीजी मंजुरेखाजी ने भगवान पार्श्व के पूर्व जन्मों का प्रसंग प्रस्तुत करते हुए जीवन के उतार चढ़ाव में समता बनाए रखने का संदेश दिया। उन्होंने समझाया कि परिस्थितियां चाहे जैसी हों व्यक्ति को धैर्य और संतुलन नहीं छोड़ना चाहिए। कार्यक्रम में आध्यात्मिक चिंतन के साथ दैनिक जीवन में व्यवहार सुधारने और संबंधों को मजबूत बनाने की सीख भी दी गई।

प्रमुख उपस्थिति

तेरापंथ महिला मंडल दक्षिण मुंबई के मंगलाचरण के बाद कार्यक्रम की शुरुआत हुई। बॉम्बे सभा के अध्यक्ष सुरेंद्र कोठारी और उनकी टीम ने अपनी उपस्थिति से आयोजन की शोभा बढ़ाई। श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा मुंबई से मंत्री गौतम दांगी, कोषाध्यक्ष रिंकू बाफना, बाबूलाल समदरिया, गणपतलाल डागलिया, नवरतन गन्ना, महेंद्र तातेड़, गौतम कोठारी, भंवरलाल कर्णावत, मानक धींग, दिनेश सुतरिया, नरेंद्र सिंघवी, अर्जुन चौधरी, राजेश कोठारी, सुभाष मेहता, दिनेश धाकड़, नितेश धाकड़, सुरेश डागलिया, कुलदीप बैद और गिरीश सिसोदिया सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

आचार्य महाप्रज्ञ विद्यानिधि फाउंडेशन से पूर्व अध्यक्ष किशनलाल डागलिया, मंत्री लक्ष्मीलाल डागलिया और कोषाध्यक्ष प्रकाश सिसोदिया भी मौजूद रहे। दक्षिण मुंबई सभा से अध्यक्ष देवेंद्र डागलिया, मंत्री पवन बोलिया और कोषाध्यक्ष अशोक धींग ने सहभागिता की। तेयुप दक्षिण मुंबई से अध्यक्ष सुमित सुराणा और मंत्री श्रेयांस मुनोत तथा महिला मंडल दक्षिण मुंबई की अध्यक्षा लतिका डागलिया उपस्थित रहीं। निर्मल भंसाली, पारस कछारा सहित अन्य गणमान्य लोगों ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की। जानकारी तेयुप दक्षिण मुंबई उपाध्यक्ष दर्शन डागलिया और मुंबई सभा के प्रचार मंत्री नितेश धाकड़ ने दी।

संदेश का असर

कार्यक्रम में वाणी संयम को केवल धार्मिक शिक्षा नहीं बल्कि रोजमर्रा के जीवन का जरूरी व्यवहार बताया गया। साध्वीजी के संदेशों में परिवार, समाज और व्यक्तिगत संबंधों में शब्दों की भूमिका पर विशेष जोर रहा। मीठी वाणी से तनाव कम करने और संवाद को बेहतर बनाने की बात सामने आई। वहीं अहंकार से भरे शब्दों से पैदा होने वाले असंतुलन से बचने की सीख दी गई। उपस्थित लोगों के लिए यह संदेश खास तौर पर उपयोगी रहा कि बोलने से पहले विचार करना और सामने वाले की भावनाओं को समझना रिश्तों में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। इसी सोच के साथ कार्यक्रम का संदेश लोगों तक पहुंचा।

वाणी संयम ही ऐसा अभ्यास है जो व्यक्ति के विचार, व्यवहार और रिश्तों तीनों पर असर डाल सकता है। दक्षिण मुंबई में आयोजित इस कार्यक्रम में साध्वीजी कंचनप्रभाजी और साध्वीजी मंजुरेखाजी ने अलग अलग उदाहरणों और प्रस्तुतियों के माध्यम से शब्दों की शक्ति समझाई। साध्वी उदितप्रभाजी ने भी अपने विषय के जरिए वाणी पर नियंत्रण की जरूरत बताई। कार्यक्रम में मौजूद समाज के पदाधिकारियों और सदस्यों ने आध्यात्मिक संदेशों को सुना। आयोजन का मूल संदेश यही रहा कि वाणी संयम अपनाकर व्यक्ति अपने व्यवहार को संतुलित कर सकता है और परिवार तथा समाज में मधुरता बढ़ा सकता है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट उपलब्ध कराई गई जानकारी पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। कार्यक्रम में उपस्थित व्यक्तियों और पदाधिकारियों के नाम आयोजकों द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर प्रस्तुत किए गए हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief