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सऊदी पाइपलाइन बंद, हूतियों के कब्जे से तेल रास्तों पर मंडराया संकट

सऊदी पाइपलाइन बंद से होने से तेल आपूर्ति पर दबाव बढ़ा, हूतियों ने लाल सागर के अहम रास्ते पर कब्जा कर संकट को और गहरा दिया।

By अजय त्यागी
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सऊदी अरब ने ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को बंद कर दिया है(फोटो- एपी)

सऊदी अरब ने ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को बंद कर दिया है(फोटो- एपी)

रियाद, सऊदी अरब। सऊदी पाइपलाइन बंद होने से पश्चिम एशिया के तेल बाजार में नई चिंता पैदा हो गई है। सऊदी ऊर्जा मंत्रालय ने बताया कि ड्रोन हमले के बाद देश की अहम ईस्ट वेस्ट तेल पाइपलाइन को एहतियाती कदम के तौर पर रोक दिया गया। इसी बीच यमन के हूती विद्रोहियों ने लाल सागर के दक्षिणी प्रवेश द्वार पर मौजूद मायून द्वीप पर कब्जा कर लिया। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब होर्मुज जलडमरूमध्य में पहले से तनाव के कारण सऊदी अरब लाल सागर के रास्ते तेल भेजने पर ज्यादा निर्भर था। इस घटनाक्रम ने वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।  [1]

तेल रास्ते पर वार

ईस्ट वेस्ट पाइपलाइन सऊदी अरब के पूर्वी तेल क्षेत्रों से कच्चा तेल लाल सागर के तट तक पहुंचाने वाला बेहद अहम रास्ता है। इसका निर्माण 1980 के दशक में हुआ था और होर्मुज जलडमरूमध्य में संकट के दौरान इसका महत्व और बढ़ गया। इस रास्ते के जरिए सऊदी अरब अपने तेल को समुद्री मार्ग से एशिया और दूसरे बाजारों तक पहुंचाने का विकल्प बनाए रखता है। सऊदी अधिकारियों के मुताबिक पाइपलाइन को ड्रोन हमले के बाद अस्थायी तौर पर बंद किया गया है। हमले में नुकसान हुआ और कुछ लोग घायल भी हुए हैं। अधिकारियों ने इसे फिलहाल एहतियाती कदम बताया है।

सऊदी विदेश मंत्रालय के अनुसार पाइपलाइन के रियाद और मदीना क्षेत्रों को कई ड्रोन ने निशाना बनाया और ये ड्रोन इराक से आए थे। हालांकि हमले की जिम्मेदारी किसी खास संगठन पर सीधे तौर पर नहीं डाली गई है। इराक ने हमले की निंदा करते हुए मामले की जांच शुरू करने की बात कही है। सऊदी अरब ने भी तत्काल जवाबी कार्रवाई नहीं करने का फैसला किया है ताकि इराक को जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कदम उठाने का मौका मिल सके। सैटेलाइट तस्वीरों में मदीना के पास पाइपलाइन के रास्ते के करीब धुआं दिखाई देने की जानकारी सामने आई है। सऊदी पाइपलाइन बंद करने के इस पूरे घटनाक्रम से तेल आपूर्ति की सुरक्षा पर सवाल बढ़े हैं।

हूतियों की बढ़त

यमन में इस बीच हूती विद्रोहियों ने लाल सागर के प्रवेश क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। उन्होंने मायून द्वीप पर कब्जा कर लिया है जिसे पेरिम के नाम से भी जाना जाता है। यह छोटा लेकिन बेहद रणनीतिक द्वीप बाब अल मंदब जलडमरूमध्य के भीतर स्थित है। हूतियों ने इससे पहले लाल सागर के तटीय शहर मोखा पर भी नियंत्रण हासिल किया था। इस इलाके पर पकड़ मजबूत होने से समुद्री जहाजों की आवाजाही और सऊदी तेल निर्यात के लिए जोखिम बढ़ गया है। खासकर तब जब होर्मुज मार्ग में तनाव के कारण लाल सागर सऊदी तेल के लिए अहम वैकल्पिक रास्ता बन चुका था।

बाब अल मंदब एशिया, यूरोप और मध्य पूर्व के बीच समुद्री व्यापार का महत्वपूर्ण रास्ता है। हूतियों की हालिया बढ़त से इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है और सऊदी तेल निर्यात के सामने एक साथ कई मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। स्थिति बिगड़ने पर जहाजों को लाल सागर से हटाकर स्वेज नहर या अफ्रीका के आसपास लंबा रास्ता अपनाना पड़ सकता है। इससे यात्रा का समय और परिवहन लागत दोनों बढ़ सकते हैं। तेल बाजार पहले ही क्षेत्रीय तनाव से दबाव में है और किसी नए हमले से कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल का खतरा बढ़ सकता है।

यमन युद्ध का डर

सऊदी पाइपलाइन बंद होने के इस पूरे घटनाक्रम का असर केवल तेल कारोबार तक सीमित नहीं है। यमन में तेज होती लड़ाई से 2022 के बाद बनी नाजुक शांति पर भी खतरा मंडरा रहा है। पिछले एक सप्ताह में 46,000 से ज्यादा लोग हिंसा के कारण अपने घर छोड़ चुके हैं। हूती विद्रोहियों और यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के बीच संघर्ष लंबे समय से जारी है और सऊदी अरब सरकार के समर्थन में युद्ध में शामिल रहा है। अब लाल सागर के तट और बाब अल मंदब के आसपास हूतियों की बढ़त ने सैन्य तनाव के साथ मानवीय संकट को भी गहरा कर दिया है। सऊदी पाइपलाइन बंद होने से स्थिति की गंभीरता और बढ़ गई है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। युद्ध, तेल आपूर्ति और समुद्री मार्गों से जुड़े घटनाक्रम तेजी से बदल सकते हैं इसलिए ताजा स्थिति के लिए आधिकारिक सूचनाओं को प्राथमिकता दें। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief