रूसी सेना में भर्ती का आरोप, स्टडी वीजा पर गए 3 युवक लापता
स्टडी वीजा पर रूस गए यूपी के 3 युवक रूसी सेना में भर्ती होने के बाद डेढ़ महीने से लापता हैं। परिजनों ने सरकार से सुरक्षित वापसी की गुहार लगाई।
प्रतीकात्मक फोटो
मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश। रूसी सेना में भर्ती किए जाने के आरोपों ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 3 परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। मुजफ्फरनगर के शक्ति पुंडीर और हिमांशु शर्मा तथा शामली के आशु कुमार पढ़ाई और बेहतर करियर की उम्मीद लेकर स्टडी वीजा पर रूस गए थे। परिवारों के मुताबिक तीनों युवक वहां एक ही कमरे में रहते थे। अब करीब डेढ़ महीने से उनका संपर्क नहीं हो पा रहा है। परिजन किसी अनहोनी की आशंका से परेशान हैं और केंद्र सरकार तथा विदेश मंत्रालय से तत्काल हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं। [1]
परिजन परेशान
परिजनों का कहना है कि रूस पहुंचने के बाद युवकों के पासपोर्ट कथित तौर पर वहां के प्रशासन ने अपने कब्जे में ले लिए। आरोप है कि इसके बाद उन पर रूसी सेना में भर्ती होने का दबाव बनाया गया। मुजफ्फरनगर के बाढ़ गांव निवासी हिमांशु शर्मा की मां सुमन देवी और चाचा प्रवेश शर्मा ने बताया कि हिमांशु को बंधक जैसी स्थिति में डाल दिया गया। शामली के हसनपुर लुहारी निवासी आशु कुमार के परिवार ने भी अधिकारियों को शिकायत देकर मदद मांगी है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और परिवारों की शिकायत के आधार पर मामला सामने आया है।
इन तीनों युवकों के परिवारों के मुताबिक वे रूस पढ़ाई और बेहतर भविष्य की उम्मीद में गए थे। परिवारों को सबसे बड़ा झटका तब लगा जब अचानक बातचीत बंद हो गई। शक्ति पुंडीर के पिता विपिन के अनुसार बेटे से आखिरी बार 30 जुलाई को फोन पर बात हुई थी। शक्ति ने कथित तौर पर बताया था कि उसका पासपोर्ट ले लिया गया है और उसे सेना में भेजा जा रहा है। उसने यह भी कहा था कि वह सेना में नहीं रहना चाहता। इसके बाद तीनों युवकों के मोबाइल फोन लगातार बंद बताए जा रहे हैं।
संपर्क टूटा
30 जुलाई के बाद संपर्क टूटने से परिवारों की बेचैनी लगातार बढ़ती गई। रक्षाबंधन के दौरान भी परिजन अपने बेटों और भाइयों से बात नहीं कर सके। परिवारों का कहना है कि सामान्य स्थिति में वे लगातार संपर्क में रहते थे लेकिन अचानक मोबाइल बंद होने से उनकी चिंता बढ़ गई। शक्ति पुंडीर और हिमांशु शर्मा के परिवारों के बाद आशु कुमार के परिजन भी प्रशासन के पास पहुंचे हैं। इस पूरे मामले में अभी यह स्पष्ट नहीं है कि युवकों की मौजूदा स्थिति क्या है और वे रूस में किस स्थान पर हैं।
परिवारों ने मुजफ्फरनगर के जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय से तत्काल कदम उठाने की मांग की है। उनकी मांग है कि भारतीय दूतावास के माध्यम से रूस में फंसे युवकों की जानकारी जुटाई जाए और उन्हें सुरक्षित भारत वापस लाया जाए। परिवारों का कहना है कि उनके पास अपने बच्चों की स्थिति को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं है। इसी वजह से हर गुजरता दिन उनकी चिंता बढ़ा रहा है। किसान मजदूर संगठन के नेताओं ने भी सरकार से मामले में तेजी दिखाने और युवकों के रेस्क्यू की अपील की है।
सरकार से मदद
मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि आखिर स्टडी वीजा पर रूस पहुंचे इन युवकों के साथ वास्तव में क्या हुआ। परिवारों का आरोप है कि पासपोर्ट जब्त किए गए और दबाव बनाकर उन्हें रूसी सेना में भर्ती कराया गया। दूसरी ओर अभी तक सार्वजनिक तौर पर ऐसी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है जो इन आरोपों की पूरी तरह पुष्टि करती हो। इसलिए मामले को आरोप और पारिवारिक शिकायत के स्तर पर ही देखा जाना जरूरी है। भारतीय अधिकारियों की ओर से युवकों की स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही तस्वीर साफ होगी।
इस मामले ने रूस जाने वाले भारतीय युवाओं की सुरक्षा और वहां काम या पढ़ाई के दौरान सामने आने वाले जोखिमों पर भी सवाल खड़े किए हैं। परिवारों की प्राथमिकता फिलहाल किसी आरोप की बहस नहीं बल्कि अपने बेटों की सुरक्षित वापसी है। रूसी सेना में भर्ती के आरोपों के बीच परिजन चाहते हैं कि भारत सरकार और विदेश मंत्रालय रूस के संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर युवकों की स्थिति की पुष्टि करें। फिलहाल तीनों परिवारों को आधिकारिक सूचना का इंतजार है और उनकी नजर सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। युवकों को रूसी सेना में भर्ती किए जाने संबंधी दावे परिजनों के आरोपों और उपलब्ध रिपोर्टों पर आधारित हैं और इसकी स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि की प्रतीक्षा है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।