निजी अस्पताल पर एक्शन, लाइसेंस निलंबित, रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के आदेश
मरीज के परिजनों से कथित दुर्व्यवहार की शिकायत के बाद अस्पताल का लाइसेंस निलंबित, नई भर्ती और नई सेवाओं पर रोक, जांच में रिकॉर्ड और CCTV सुरक्षित रहेंगे।

एक्शन में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी
रांची, झारखंड। लाइसेंस निलंबित होने के बाद रिंग रोड स्थित ट्यूलिप हॉस्पिटल पर स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई चर्चा में है। 10 सितंबर को अस्पताल में हुई कथित घटना को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने सिविल सर्जन को जांच और जरूरी कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बाद अस्पताल का पंजीकरण और लाइसेंस अंतरिम रूप से निलंबित कर दिया गया। विभाग ने नए मरीजों के ओपीडी पंजीकरण और नई क्लिनिकल सेवाओं पर रोक लगाई है। पहले से भर्ती मरीजों का इलाज जारी रखने के निर्देश दिए गए हैं। कार्रवाई विस्तृत जांच और सक्षम प्राधिकारी के अगले आदेश तक प्रभावी रहेगी। [1]
मामला और कार्रवाई
ट्यूलिप हॉस्पिटल में मरीज के परिजनों के साथ कथित दुर्व्यवहार और मारपीट की शिकायत सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया। मामले को गंभीर मानते हुए मंत्री ने तत्काल जांच के निर्देश दिए। इसके बाद सिविल सर्जन की ओर से अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई की गई। लाइसेंस निलंबित करने का फैसला फिलहाल अंतरिम है और अंतिम निर्णय विस्तृत जांच के बाद लिया जाएगा। विभाग यह पता लगाने में जुटा है कि 10 सितंबर को अस्पताल में वास्तव में क्या हुआ था और शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।
अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट्स से जुड़े कानून और झारखंड के संबंधित नियमों के तहत की गई है। आदेश के मुताबिक निलंबन के दौरान नए ओपीडी मरीजों का पंजीकरण और इलाज, नए IPD मरीजों की भर्ती, नई इलेक्टिव सर्जरी और अन्य नई क्लिनिकल सेवाएं शुरू नहीं की जा सकेंगी। हालांकि पहले से भर्ती मरीजों को इलाज से वंचित नहीं किया जाएगा। अस्पताल को उनकी चिकित्सा व्यवस्था बनाए रखने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानांतरण में सहयोग करने का निर्देश दिया गया है।
रिकॉर्ड रहेंगे सुरक्षित
लाइसेंस निलंबित करने के साथ स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल के रिकॉर्ड और साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का आदेश दिया है। इसमें मरीजों की केस शीट, ओपीडी और IPD रजिस्टर, उपचार से जुड़े दस्तावेज, सहमति पत्र, जांच रिपोर्ट और ड्यूटी रिकॉर्ड शामिल हैं। कर्मचारियों की उपस्थिति, CCTV फुटेज और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक डेटा को भी सुरक्षित रखना होगा। किसी रिकॉर्ड को बदलने, नष्ट करने या साक्ष्य से छेड़छाड़ करने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। जांच के दौरान यही दस्तावेज घटना की वास्तविक स्थिति समझने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
अस्पताल प्रबंधन को जांच में पूरा सहयोग करने और मांगे गए दस्तावेज उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है। मामले की विस्तृत जांच के दौरान संबंधित लोगों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल की जा सकती है। अस्पताल परिसर में नए मरीजों के पंजीकरण और भर्ती पर रोक की सूचना लगाने को भी कहा गया है ताकि मरीजों और उनके परिजनों को स्थिति की जानकारी रहे। प्रशासन की कोशिश है कि कार्रवाई के दौरान पहले से भर्ती मरीजों को परेशानी न हो। जांच के निष्कर्ष के बाद ही अस्पताल के खिलाफ आगे की कार्रवाई तय होगी।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। अस्पताल और संबंधित पक्षों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि विस्तृत जांच के बाद ही होगी तथा अंतरिम प्रशासनिक कार्रवाई को किसी पक्ष की अंतिम दोषसिद्धि नहीं माना जाना चाहिए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।