पाटन बस स्टैंड की बदहाली पर सवाल, दुर्गंध से यात्री रुमाल से ढकते मुंह
पाटन बस स्टैंड की बदहाली ने यात्रियों और स्थानीय लोगों की परेशानी बढ़ा दी। नाले में कचरे का अंबार और सड़ांध भरे पानी से यहाँ रुकना भी मुश्किल।

पाटन बस स्टैंड की बदहाली
नीमकाथाना, राजस्थान (शिंभू सिंह शेखावत)। पाटन बस स्टैंड की बदहाली इन दिनों प्रशासनिक अनदेखी की तस्वीर दिखा रही है। तहसील का दर्जा हासिल होने के बावजूद बस स्टैंड पर सफाई व्यवस्था बेहद खराब बताई जा रही है। यहां बने गंदे नाले में कचरे का अंबार लगा है और पानी की निकासी नहीं होने से सड़ांध भरा दलदल बन गया है। बस का इंतजार करने वाले यात्रियों को भयंकर दुर्गंध का सामना करना पड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि कई यात्रियों को 5 मिनट खड़ा रहना भी मुश्किल लग रहा है और वे मजबूरी में रुमाल से मुंह ढककर बस का इंतजार करते नजर आते हैं।
नाले में कचरा डालने का आरोप
पाटन बस स्टैंड की बदहाली को बढ़ाने में आसपास के दुकानदारों की कथित मनमानी भी सामने आ रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई दुकानदार डस्टबिन का इस्तेमाल करने के बजाय रोजाना निकलने वाला कचरा सीधे खुले नाले में डाल रहे हैं। इससे नाले में कचरा लगातार जमा होता गया और पानी का बहाव रुक गया। अब कचरा सड़ने से दलदल जैसी स्थिति बन गई है। स्थानीय लोगों के मुताबिक लंबे समय से सफाई नहीं होने के कारण दुर्गंध बढ़ती जा रही है। खुले में जमा गंदगी से मच्छरों का प्रकोप और संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ने की आशंका है।
बस स्टैंड पर रोजाना दूरदराज से यात्री आते जाते हैं और उन्हें इसी गंदगी के बीच बसों का इंतजार करना पड़ता है। स्थानीय निवासियों और यात्रियों का कहना है कि पाटन को तहसील का दर्जा तो मिल गया लेकिन बुनियादी सुविधाओं की स्थिति संतोषजनक नहीं है। उनका कहना है कि जिस बस स्टैंड पर रोजाना सैकड़ों लोगों की आवाजाही होती है वहां सफाई और कचरा प्रबंधन की पुख्ता व्यवस्था होनी चाहिए। लोगों का सवाल है कि अगर दुकानदार खुले नाले में कचरा डाल रहे हैं तो जिम्मेदार विभाग उनकी निगरानी और कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा है।
प्रशासन से कार्रवाई की मांग
पाटन बस स्टैंड की बदहाली को लेकर अब स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ती दिख रही है। लोगों का कहना है कि गंदगी और दुर्गंध केवल यात्रियों की परेशानी नहीं है बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा भी बन सकता है। पानी जमा रहने से मच्छरों की समस्या बढ़ सकती है और आसपास का वातावरण भी प्रभावित हो रहा है। नागरिकों की मांग है कि नाले की तत्काल सफाई कराकर पानी की निकासी बहाल की जाए और नियमित सफाई की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही नाले में कचरा डालने वाले दुकानदारों की पहचान कर नियमों के तहत कार्रवाई की जाए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पाटन बस स्टैंड की बदहाली पर केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा। प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को मौके का निरीक्षण कर समस्या का स्थायी समाधान निकालना चाहिए। यात्रियों के लिए स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना जिम्मेदार विभागों की प्राथमिकता होनी चाहिए। लोगों ने सवाल उठाया है कि क्या प्रशासन किसी गंभीर स्वास्थ्य संकट का इंतजार कर रहा है। अब जनता सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने और खुले नाले में कचरा डालने पर रोक लगाने की ठोस कार्रवाई चाहती है ताकि बस स्टैंड आने वाले यात्रियों को राहत मिल सके।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट स्थानीय लोगों और उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। नाले में कचरा डालने और प्रशासनिक लापरवाही से संबंधित आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है और संबंधित पक्षों का पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता दी जानी चाहिए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।