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चार मंजिला इमारत झुकी, मचा हड़कंप, खतरे में लोगों की सुरक्षा

दिल्ली में चार मंजिला इमारत झुकी तो हड़कंप मच गया। लोगों को बाहर निकाला गया, इलाका घेरा गया और गिरने के खतरे की जांच शुरू हुई। प्रशासन सतर्क है।

By अजय त्यागी
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चार मंजिला इमारत दूसरी इमारत से अलग होते हुए

चार मंजिला इमारत दूसरी इमारत से अलग होते हुए

गांधी नगर, दिल्ली। चार मंजिला इमारत अचानक झुकने से आसपास रहने वाले लोगों में अफरा तफरी मच गई। एहतियात के तौर पर भवन को खाली करा लिया गया और उसके आसपास का इलाका घेर दिया गया। पुलिस ने लोगों को इमारत के पास जाने से रोक दिया। नगर निगम की टीम मौके पर पहुंची और भवन की हालत का निरीक्षण किया। इंडो एशियन न्यूज सर्विस की एक रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों ने सुरक्षा को देखते हुए इमारत को फिलहाल खाली रखा है और हालात पर नजर रखी जा रही है।  [विडियो]  [1]

सुरक्षा में कार्रवाई

घटना की सूचना मिलने के बाद नगर निगम, पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं। पूर्व मेयर श्याम सुंदर अग्रवाल ने बताया कि सूचना मिलने पर वह भी घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने दो मकानों के बीच दरार देखी और पाया कि चार मंजिला इमारत थोड़ा झुकी हुई थी। अधिकारियों ने संरचना का निरीक्षण किया और भवन के गिरने का खतरा सामने आया। इसके बाद संभावित जनहानि रोकने के लिए लोगों को बाहर निकाल दिया गया। भवन मालिक को नोटिस भी जारी किया गया है। प्रभावित हिस्से में लोगों की आवाजाही रोककर सुरक्षा व्यवस्था कायम रखी गई।

पूर्व मेयर ने कहा कि भवन को समय रहते खाली कराया गया और इससे संभावित जनहानि को टालने में मदद मिली। उन्होंने दिल्ली में जर्जर और खतरनाक इमारतों के खिलाफ कार्रवाई की जरूरत बताई। उनका सवाल था कि पांच या छह मंजिला इमारतें बनने के दौरान नगर निगम के अधिकारी कहां थे। उन्होंने कुछ अधिकारियों की कथित मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग भी की। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। प्रशासन की ओर से फिलहाल भवन की स्थिति पर नजर रखी जा रही है और लोगों को खतरे वाले हिस्से से दूर रखा गया है।

पुराने भवनों पर सवाल

यह घटना दिल्ली के घनी आबादी वाले इलाकों में पुराने और कमजोर भवनों की सुरक्षा पर सवाल खड़े करती है। पूर्व मेयर ने ऐसे भवनों की पहचान कर समय रहते कार्रवाई की जरूरत बताई है। उनका कहना है कि अगर जर्जर ढांचों की पहले जांच हो जाए तो किसी बड़े हादसे से बचा जा सकता है। यह मामला सत्य निकेतन में 6 सितंबर को हुए भवन हादसे के कुछ दिन बाद सामने आया है। वहां इमारत गिरने से कम से कम 7 लोगों की मौत हुई थी और भवन का इस्तेमाल लड़कों के लिए पीजी आवास के तौर पर हो रहा था।

गांधी नगर की घटना में फिलहाल किसी जनहानि की सूचना नहीं है। प्रभावित इलाके को घेरकर रखा गया है और झुकी इमारत की स्थिति का आगे आकलन किया जा रहा है। चार मंजिला इमारत को लेकर बना खतरा स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा रहा है। प्रशासन की प्राथमिकता लोगों को भवन से दूर रखना और किसी संभावित हादसे को रोकना है। अधिकारियों की जांच के बाद ही स्थिति की गंभीरता और आगे की कार्रवाई पूरी तरह स्पष्ट होगी। फिलहाल इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कायम है और लोगों से सावधानी बरतने की अपील की गई है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। भवन की संरचनात्मक स्थिति और लगाए गए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष संबंधित अधिकारियों की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief