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झील को बचाने की मुहिम तेज, ग्लेशियर का पानी बनेगा नई उम्मीद

70% सिकुड़ी त्सो कर झील को बचाने की तैयारी है। ग्लेशियर से रोज 320 मिलियन लीटर तक पानी लाकर झील को फिर भरने की योजना पर काम शुरू हो गया है।

By अजय त्यागी
1 min read
Advertisement002309202602.jpg advertisement13Aug2026%20copy.jpg त्सो कर झील - फाइल फोटो

त्सो कर झील - फाइल फोटो

लेह, लद्दाख। झील 70% सिकुड़ चुकी है और पिछले एक दशक में इसका जल क्षेत्र करीब 11,000 एकड़ से घटकर लगभग 3,200 एकड़ रह गया है। अब प्रशासन ने त्सो कर झील को बचाने के लिए ग्लेशियर के पानी को झील तक पहुंचाने की योजना शुरू की है। इसके लिए करीब 11.5 किलोमीटर दूर स्थित रुपशो खारनाक ग्लेशियर स्ट्रीम का पानी प्राकृतिक ढलान के जरिए मोड़ा जा रहा है। गर्मियों में इस धारा से रोज करीब 320 मिलियन लीटर पानी मिलने का अनुमान है।  [1]

पानी की नई राह

झील को बचाने की योजना के तहत ग्लेशियर का पानी तीन प्राकृतिक गड्ढों से होकर त्सो कर झील तक पहुंचेगा। पहले गड्ढे का क्षेत्र करीब 270 एकड़ है, जबकि दूसरे और तीसरे का क्षेत्र क्रमशः 24 और 10 एकड़ है। पानी के बहाव को नियंत्रित करने के लिए चेक डैम और आरसीसी पाइप लगाए जा रहे हैं। तीसरा गड्ढा झील से केवल 400 मीटर दूर है। प्रशासन ने नई भारी कंक्रीट नहर बनाने के बजाय मिट्टी की नहर और पुराने कंक्रीट चैनल का इस्तेमाल करने की योजना बनाई है।

काम सितंबर की शुरुआत में शुरू हुआ और 9 सितंबर से करीब 20 क्यूसेक पानी पहले गड्ढे की ओर मोड़ा जा रहा है। प्रशासन के मुताबिक चार दिन में गड्ढे का करीब 20% हिस्सा भर गया था। तीनों गड्ढों की कुल जल भंडारण क्षमता करीब 1,230 मिलियन लीटर बताई गई है। इन जल क्षेत्रों से नए मीठे पानी के आर्द्र क्षेत्र भी बन सकते हैं। प्रशासन को उम्मीद है कि पहला पानी अक्टूबर के पहले सप्ताह में त्सो कर तक पहुंच जाएगा और झील की पूरी बहाली का लक्ष्य अक्टूबर 2027 तक हासिल किया जा सकता है।

पर्यावरण को उम्मीद

त्सो कर सिर्फ पानी का भंडार नहीं बल्कि लद्दाख के ऊंचाई वाले नाजुक पर्यावरण का अहम हिस्सा है। झील का क्षेत्र घटने से प्रवासी पक्षियों के लिए उपलब्ध आवास और स्थानीय चरागाहों पर असर पड़ा है। त्सो कर के आसपास कई परिवार पश्मीना बकरियां पालते हैं और कुछ चरवाहों को चारे की तलाश में अपने घरों से 50 से 75 किलोमीटर दूर तक जाना पड़ रहा है। प्रशासन को उम्मीद है कि पानी लौटने से घास के मैदान और चराई क्षेत्र दोबारा विकसित होंगे और स्थानीय लोगों को राहत मिलेगी।

झील को बचाने से पक्षियों के लिए नए आवास बनने की भी उम्मीद है। तीनों प्राकृतिक गड्ढे आगे चलकर मीठे पानी की आर्द्रभूमि का रूप ले सकते हैं। त्सो कर क्षेत्र प्रवासी पक्षियों और काली गर्दन वाली सारस जैसी महत्वपूर्ण प्रजातियों के लिए जाना जाता है। प्रशासन के मुताबिक जल क्षेत्र बढ़ने से यहां का पारिस्थितिक संतुलन मजबूत हो सकता है। झील 70% सिकुड़ी होने के बाद शुरू हुई यह मुहिम सफल रहती है तो ऊंचाई वाले इलाकों में पर्यावरण बहाली के लिए इसे एक अहम उदाहरण माना जा सकता है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। झील की बहाली का अंतिम परिणाम जल प्रवाह, मौसम और परियोजना के वास्तविक क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief