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दिव्यांग नीति अटकी, कानून बदला लेकिन नई राष्ट्रीय नीति अब तक नहीं

दिव्यांग नीति अटकी, 2016 के कानून के 10 साल बाद भी नई राष्ट्रीय नीति नहीं बनी। 2006 में बनी नीति अब भी लागू है और बदलाव का इंतजार जारी है।

By अजय त्यागी
1 min read
advertisement13Aug2026%20copy.jpg प्रतीकात्मक फोटो

प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली, दिल्ली। दिव्यांग लोगों के अधिकारों से जुड़े कानून को लागू हुए 10 साल हो चुके हैं लेकिन नई राष्ट्रीय नीति अब तक तैयार नहीं हो सकी है। मौजूदा राष्ट्रीय नीति 2006 में अपनाई गई थी। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने 2022 में नई नीति की जरूरत मानते हुए मसौदे पर संबंधित पक्षों से सुझाव मांगे थे। इसके बावजूद संशोधित नीति अब तक अधिसूचित नहीं हुई। दिव्यांग नीति अटकी रहने से अधिकारों को अलग अलग सरकारी क्षेत्रों से जोड़ने वाला आधुनिक राष्ट्रीय ढांचा अब भी इंतजार में है।  [1]

नीति क्यों रुकी

नई राष्ट्रीय नीति तैयार करने के लिए गठित टास्क फोर्स ने 12 अक्टूबर 2021 को अपना मसौदा सरकार को सौंपा था। इसके बाद संबंधित पक्षों से सुझाव मांगे गए और प्रतिक्रिया देने की अंतिम तारीख 30 सितंबर 2022 तय की गई थी। लेकिन परामर्श प्रक्रिया के करीब 4 साल बाद भी नई नीति अधिसूचित नहीं हुई। अब संगठन ने सरकार से पूछा है कि सुझावों के बाद संशोधित मसौदा तैयार हुआ या नहीं और आगे परामर्श की कोई योजना है या नहीं। साथ ही नई नीति को अधिसूचित करने की संभावित तारीख बताने की मांग की गई है।

नई नीति की जरूरत इसलिए भी बढ़ी क्योंकि 2006 के बाद देश में कई अहम बदलाव हुए। 2016 में दिव्यांग लोगों के अधिकारों से जुड़ा नया कानून लागू हुआ जिसने 1995 के कानून की जगह ली। भारत ने दिव्यांग लोगों के अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र समझौते की पुष्टि भी की। इसके अलावा 2020 में राष्ट्रीय शिक्षा नीति अपनाई गई। सरकार ने नई नीति के मसौदे में इन बदलावों को स्वीकार किया था। इसके बावजूद दिव्यांग नीति अटकी रहने से पुरानी राष्ट्रीय नीति ही लागू है और बदलते कानूनी माहौल के मुताबिक एक समन्वित व्यवस्था का इंतजार बना हुआ है।

अधिकारों पर सवाल

Doctors with Disabilities Agents of Change संगठन ने सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय और दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग को पत्र भेजकर नीति में हो रही देरी पर सवाल उठाए हैं। संगठन ने कहा कि मौजूदा स्थिति स्पष्ट की जाए और बताया जाए कि संशोधित मसौदा किस चरण में है। उसने आगे की सलाह प्रक्रिया और नई नीति की अधिसूचना की समय सीमा भी पूछी है। संगठन के मुताबिक दिव्यांग लोगों के अधिकारों को स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा और दूसरे क्षेत्रों से जोड़ने के लिए ऐसी राष्ट्रीय नीति जरूरी है जो स्पष्ट, मापने योग्य और पर्याप्त संसाधनों के साथ लागू की जा सके।

संगठन ने मसौदे में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और सरकारी खरीद व्यवस्था से जुड़ी कमियों की ओर भी ध्यान दिलाया है। उसके अनुसार स्वास्थ्य मंत्रालय की प्रस्तावित स्वास्थ्य पहुंच संबंधी व्यवस्था के साथ पर्याप्त तालमेल नहीं है। सरकारी खरीद में वस्तुओं और सेवाओं को दिव्यांग लोगों के लिए सुगम बनाने की जरूरत भी पर्याप्त रूप से शामिल नहीं है। संगठन ने अधिकार आधारित और जरूरत के मुताबिक सुविधा देने वाली व्यवस्था पर जोर दिया है। अब सरकार के जवाब पर नजर है। दिव्यांग नीति अटकी रहने का समाधान संशोधित नीति के अंतिम रूप और अधिसूचना से ही स्पष्ट होगा।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। संशोधित राष्ट्रीय नीति की स्थिति और उसके लागू होने की समय सीमा सरकार के आधिकारिक फैसलों के अनुसार बदल सकती है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief