कौसरबाग अतिक्रमण पर HC का बड़ा आदेश, अवैध कब्जों पर कार्रवाई तय
पुणे में कौसरबाग अतिक्रमण को लेकर हाईकोर्ट सख्त, PMC को अवैध ढांचों पर कानून के मुताबिक नोटिस और कार्रवाई पूरी करने का निर्देश दिया गया है।

कौसरबाग अतिक्रमण
पुणे, महाराष्ट्र। कौसरबाग अतिक्रमण को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने पुणे नगर निगम यानी PMC को कार्रवाई का निर्देश दिया है। 10 सितंबर के आदेश में अदालत ने इलाके की प्रमुख सड़कों पर कथित अतिक्रमण और अनधिकृत व्यावसायिक गतिविधियों का मुद्दा उठाया। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, कौसरबाग रेजिडेंट्स फोरम ने सार्वजनिक सड़कों, फुटपाथ, खुले स्थानों और खेल मैदानों पर कथित कब्जे की शिकायत की थी। अदालत ने कहा कि सड़कों के किनारे अतिक्रमण रोकना संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है। [1]
अदालत ने दिखाई सख्ती
हाईकोर्ट की पीठ ने कौसरबाग अतिक्रमण मामले की पहली सुनवाई में ही साफ संकेत दिया कि सार्वजनिक जगहों पर कब्जे को लेकर प्रशासन को जिम्मेदारी निभानी होगी। मुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत एम सेठना की पीठ ने संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगकर याचिका लंबित रखने के बजाय कार्रवाई का रास्ता चुना। अदालत ने ढांचों के मालिकों को कानून के मुताबिक नोटिस जारी करने और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है। PMC ने भी आदेश देखने के बाद उचित कदम उठाने की बात कही है।
कौसरबाग में कारोबारी गतिविधियां खास तौर पर रमजान के दौरान बढ़ जाती हैं। इस दौरान फल और खाने पीने की कई अस्थायी दुकानें लगती हैं और स्थानीय निवासियों के मुताबिक फुटपाथ तथा सड़क किनारे की जगहों पर भी कब्जे बढ़ जाते हैं। निवासियों ने ट्रैफिक जाम और घरों तक पहुंच में परेशानी की शिकायत की है। उनकी मांग है कि अस्थायी स्टॉल और खाने पीने की दुकानों को सड़कों के बजाय किसी खुले स्थान पर व्यवस्थित किया जाए ताकि कारोबार भी चलता रहे और लोगों की आवाजाही भी प्रभावित न हो।
PMC पर बढ़ा दबाव
याचिकाकर्ताओं ने अवैध ढांचों और बिना जरूरी अनुमति चल रही व्यावसायिक गतिविधियों पर कार्रवाई की मांग की है। इनमें होटल, रेस्टोरेंट, सड़क किनारे के विक्रेता, अस्थायी ढांचे और मैरिज हॉल जैसी गतिविधियों को नियमों के दायरे में लाने की मांग शामिल है। इसके अलावा अवैध पार्किंग, अनधिकृत रिक्शा स्टैंड और डबल पार्किंग रोकने की भी मांग की गई है। निवासियों ने एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड के लिए रास्ता खुला रखने तथा सफाई, कचरा प्रबंधन और जल निकासी व्यवस्था सुधारने की मांग भी उठाई है।
कौसरबाग अतिक्रमण पर अदालत के निर्देश के बाद अब नजर PMC की अगली कार्रवाई पर है। निवासियों का कहना है कि उन्होंने पिछले 2 वर्षों से अधिकारियों के सामने समस्या उठाई, लेकिन जमीन पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। उनकी शिकायतों में सड़क जाम, प्रदूषण और कुछ व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में अग्नि सुरक्षा मानकों की कमी जैसे मुद्दे भी शामिल हैं। अब अदालत के निर्देश के बाद प्रशासन को कानून के मुताबिक आगे बढ़ना होगा। असली परीक्षा यह होगी कि नोटिस और कानूनी प्रक्रिया के बाद अवैध गतिविधियों पर कितनी प्रभावी कार्रवाई होती है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। इस रिपोर्ट में उल्लिखित अतिक्रमण और अनधिकृत गतिविधियों से जुड़े आरोप याचिकाकर्ताओं और स्थानीय निवासियों की शिकायतों के संदर्भ में हैं। संबंधित मामलों में कार्रवाई निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार होगी। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।