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निकाय चुनाव में कांग्रेस की जीत ने बदला सियासी गणित, भाजपा को झटका

निकाय चुनाव के नतीजों में कांग्रेस की जीत ने सियासी समीकरण बदल दिए हैं। भाजपा को बड़ा झटका लगा है और कई जगह निर्दलीयों की भूमिका भी अहम दिखी।

By अजय त्यागी
1 min read
Advertisement002309202602.jpg advertisement13Aug2026%20copy.jpg जीत का जश्न

जीत का जश्न

बीकानेर, राजस्थान। राजस्थान निकाय चुनाव के नतीजों में बीकानेर संभाग से बड़ी सियासी तस्वीर सामने आई है। बीकानेर नगर निगम में कांग्रेस ने 80 में से 42 वार्ड जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है। भाजपा 27 सीटों पर रही जबकि 10 सीटों पर निर्दलीय और 1 सीट पर आरएलपी उम्मीदवार ने जीत दर्ज की। इन आंकड़ों ने स्थानीय राजनीति में कांग्रेस की जीत को सबसे बड़ी खबर बना दिया है।  [1]

निगम में बहुमत

बीकानेर नगर निगम में बहुमत का आंकड़ा 41 सीटों का था और कांग्रेस ने 42 सीटें जीतकर यह आंकड़ा पार कर लिया। यानी बोर्ड गठन के लिए पार्टी को किसी दूसरे दल के सहारे की जरूरत नहीं रहने वाली है। चुनाव में भाजपा ने भी कई वार्डों में मुकाबला किया लेकिन वह कांग्रेस से काफी पीछे रह गई। वहीं निर्दलीयों ने 10 सीटें जीतकर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई और आरएलपी को 1 सीट मिली। ऐसे में कांग्रेस की जीत ने नगर निगम की सत्ता का गणित साफ कर दिया है।

वार्ड स्तर के नतीजों पर नजर डालें तो कांग्रेस ने कई इलाकों में मजबूत प्रदर्शन किया है। शुरुआती और अंतिम घोषित परिणामों में पार्टी के कई उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की जबकि भाजपा के भी कुछ मजबूत चेहरे चुनाव जीतने में सफल रहे। निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी अलग अलग वार्डों में अपनी पकड़ दिखाई। खास बात यह रही कि 80 वार्डों वाले निगम में कांग्रेस बहुमत की सीमा से ऊपर पहुंच गई। इससे स्थानीय स्तर पर संगठन की रणनीति और उम्मीदवारों के प्रदर्शन को लेकर पार्टी के भीतर उत्साह बढ़ना तय माना जा रहा है।

पालिकाओं में तस्वीर

बीकानेर जिले की 6 नगर पालिकाओं में भी चुनावी मुकाबला खासा दिलचस्प रहा। नोखा, श्रीडूंगरगढ़, लूणकरणसर, देशनोक, नापासर और खाजूवाला में कुल 270 वार्डों के लिए मतदान हुआ था। इन पालिकाओं में कुल 75.73 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। लूणकरणसर में 81.70 प्रतिशत मतदान सबसे ज्यादा रहा जबकि नापासर में 68.90 प्रतिशत मतदान हुआ। इन आंकड़ों से साफ है कि स्थानीय निकाय चुनाव को लेकर ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में मतदाताओं ने अच्छी दिलचस्पी दिखाई।

उपलब्ध चुनावी अपडेट में नोखा में सीपीआईएम के प्रदर्शन ने भी ध्यान खींचा है जबकि देशनोक और श्रीडूंगरगढ़ में कांग्रेस के मजबूत प्रदर्शन की तस्वीर सामने आई है। इससे यह संकेत मिलता है कि बीकानेर संभाग की स्थानीय राजनीति सिर्फ भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर तक सीमित नहीं रही। अलग अलग इलाकों में स्थानीय चेहरे निर्दलीय उम्मीदवार और दूसरे दल भी प्रभाव डाल रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस की जीत के साथ साथ क्षेत्रीय स्तर पर बदलते राजनीतिक समीकरण भी इस चुनाव की बड़ी कहानी बनकर सामने आए हैं।

सियासी असर बड़ा

इन नतीजों का असर सिर्फ नगर निगम या नगर पालिका की सत्ता तक सीमित नहीं माना जा रहा है। राजस्थान के 309 शहरी निकायों में हुए चुनावों को प्रदेश की बड़ी राजनीतिक तस्वीर से जोड़कर देखा जा रहा है। बीकानेर में कांग्रेस का स्पष्ट बहुमत भाजपा के लिए स्थानीय संगठन और चुनावी रणनीति पर नए सिरे से सोचने का संकेत है। दूसरी तरफ कांग्रेस के लिए यह नतीजा कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने वाला है। खासकर उस समय जब राज्य की राजनीति में दोनों प्रमुख दलों के बीच लगातार मुकाबला बना हुआ है।

अब निगाहें आगे होने वाले महापौर और अध्यक्ष पद के चुनाव पर भी रहेंगी। नगर निगम के पार्षदों का परिणाम सामने आने के बाद स्थानीय सत्ता का अगला चरण शुरू होगा। बीकानेर नगर निगम में बहुमत का आंकड़ा पार कर चुकी कांग्रेस के लिए रास्ता फिलहाल साफ दिखाई दे रहा है जबकि भाजपा को विपक्ष की भूमिका निभानी होगी। कुल मिलाकर कांग्रेस की जीत ने बीकानेर संभाग की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी है और आने वाले दिनों में इसके असर को करीब से देखा जाएगा।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। चुनावी परिणामों और स्थानीय निकायों से जुड़े आंकड़े समय के साथ आधिकारिक स्तर पर अपडेट या संशोधित हो सकते हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief