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उदयपुर संभाग में भाजपा की बड़ी बढ़त, कई निकायों में बदला गणित

उदयपुर संभाग के निकाय चुनाव परिणामों में भाजपा की बड़ी बढ़त। शहरी निकाय में कांग्रेस से काफी ज्यादा सीटें हासिल की हैं और कई जगह मुकाबला दिलचस्प रहा।

By अजय त्यागी
1 min read
Advertisement002309202602.jpg advertisement13Aug2026%20copy.jpg प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

उदयपुर, राजस्थान। राजस्थान निकाय चुनाव के नतीजों में उदयपुर संभाग की तस्वीर तेजी से साफ हुई है। उदयपुर नगर निगम में भाजपा ने 80 वार्डों में से 53 पर जीत दर्ज की जबकि कांग्रेस 23 वार्डों तक सिमट गई। बाकी सीटों पर दूसरे दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों का प्रदर्शन रहा। इन आंकड़ों ने शहर की स्थानीय राजनीति में भाजपा की बड़ी बढ़त को साफ कर दिया है। राज्यभर में जारी मतगणना के बीच उदयपुर का परिणाम कांग्रेस के लिए खासा झटका माना जा रहा है।  [1]

उदयपुर में बदला गणित

उदयपुर नगर निगम का चुनाव इस बार शुरुआत से ही हाई प्रोफाइल मुकाबला बना हुआ था। यहां कुल 80 वार्डों के लिए मतदान हुआ और दूसरे चरण में 67.26 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। भाजपा और कांग्रेस ने लगभग हर महत्वपूर्ण इलाके में पूरी ताकत झोंकी थी। नतीजे आने के बाद भाजपा ने स्पष्ट बढ़त बनाते हुए 53 वार्ड अपने नाम किए। कांग्रेस को 23 सीटें मिलीं। इससे निगम में सत्ता की तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई है और भाजपा का पलड़ा मजबूत दिखाई दे रहा है।

इस परिणाम का महत्व इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि उदयपुर नगर निगम लंबे समय से दोनों प्रमुख दलों के लिए प्रतिष्ठा का सवाल रहा है। चुनाव प्रचार के दौरान स्थानीय मुद्दों के साथ शहर के विकास और राजनीतिक पकड़ को लेकर भी जोरदार मुकाबला हुआ। अब नतीजों ने भाजपा को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया है। कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपने कमजोर प्रदर्शन की वजह तलाशना होगी। खासकर उन वार्डों में जहां पार्टी को उम्मीद के मुकाबले कम समर्थन मिला वहां संगठन की रणनीति पर सवाल उठ सकते हैं।

सलूंबर में कांटे का खेल

संभाग के सलूंबर नगर परिषद में तस्वीर उदयपुर नगर निगम से बिल्कुल अलग नजर आई। यहां कुल 25 वार्डों में भाजपा ने 12 सीटें जीतीं जबकि कांग्रेस 11 वार्डों पर रही। एक सीट बाप और एक सीट निर्दलीय उम्मीदवार के खाते में गई। यानी भाजपा बहुमत से एक कदम दूर रह गई और बोर्ड गठन के लिए निर्दलीय पार्षद की भूमिका अहम हो गई है। यहां भाजपा की बड़ी बढ़त नहीं बल्कि सत्ता के लिए जरूरी समर्थन जुटाने का सवाल सबसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है।

सलूंबर का परिणाम यह भी दिखाता है कि पूरे संभाग में चुनावी मुकाबला एक जैसा नहीं रहा। जहां उदयपुर में भाजपा ने बड़ी संख्या में वार्ड जीतकर मजबूत स्थिति बनाई वहीं सलूंबर में केवल एक सीट का अंतर रह गया। ऐसे में निर्दलीय पार्षद का फैसला बोर्ड की दिशा तय कर सकता है। स्थानीय समीकरण और पार्षदों की आपसी सहमति अब बेहद महत्वपूर्ण होगी। यही वजह है कि आने वाले दिनों में सलूंबर की राजनीति पर सभी की नजर बनी रहेगी और छोटे दलों की भूमिका भी चर्चा में रहेगी।

संभाग में सियासी संदेश

उदयपुर संभाग में निकाय चुनाव के नतीजों को सिर्फ स्थानीय जीत हार के रूप में देखना आसान नहीं होगा। दक्षिण राजस्थान में बाप के बढ़ते प्रभाव और भाजपा कांग्रेस के बीच मुकाबले के कारण यहां का राजनीतिक माहौल पहले से अलग रहा है। चुनाव से पहले बाप ने आदिवासी इलाकों से बाहर भी अपनी मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश की थी। ऐसे में निकाय परिणामों में भाजपा की बड़ी बढ़त कांग्रेस के लिए संगठनात्मक स्तर पर सोचने का मौका भी है और अगले बड़े चुनावों के लिए चेतावनी भी।

राज्यभर की तस्वीर में भी भाजपा कई बड़े नगर निगमों में मजबूत प्रदर्शन करती नजर आई है। उपलब्ध ताजा अपडेट में उदयपुर में भाजपा 53 और कांग्रेस 23 वार्डों पर पहुंची थी जबकि बीकानेर में कांग्रेस ने बढ़त बनाई। यानी पूरे राजस्थान में मुकाबला एकतरफा नहीं रहा और अलग अलग शहरों में अलग कहानी सामने आई। उदयपुर संभाग के नतीजे खास तौर पर इसलिए अहम हैं क्योंकि यहां शहरी मतदाताओं के साथ स्थानीय सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरण भी चुनावी नतीजों को प्रभावित करते हैं।

अब आगे क्या 

अब निगाहें निर्वाचित पार्षदों के अगले राजनीतिक कदम और बोर्ड गठन पर रहेंगी। उदयपुर नगर निगम में भाजपा की बड़ी बढ़त के चलते पार्टी के लिए सत्ता का रास्ता काफी आसान दिखाई दे रहा है जबकि कांग्रेस को विपक्ष की भूमिका में जाना पड़ सकता है। दूसरी ओर सलूंबर जैसे निकायों में समीकरण अलग हैं जहां निर्दलीय या छोटे दल निर्णायक साबित हो सकते हैं। कुल मिलाकर उदयपुर संभाग के निकाय चुनाव परिणामों ने भाजपा की बड़ी बढ़त को सामने रखा है और कांग्रेस के लिए नई राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। चुनाव परिणामों के शुरुआती और अपडेट होते आंकड़ों में आधिकारिक घोषणा या संशोधन के कारण बदलाव संभव है इसलिए अंतिम पुष्टि के लिए राज्य निर्वाचन आयोग के अधिकृत परिणामों को प्राथमिक माना जाना चाहिए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief