गवरी में दिखी मेवाड़ संस्कृति, जोगणिया माता मंदिर में उमड़ा जनसैलाब
जोगणिया माता शक्तिपीठ में गवरी की पारंपरिक प्रस्तुतियों ने भक्ति के माहौल में मेवाड़ संस्कृति के रंग भर दिए। 3 हजार श्रद्धालुओं ने महाप्रसादी ग्रहण की।

प्रतीकात्मक फोटो
भीलवाड़ा, राजस्थान (पंकज पोरवाल)। जोगणिया माता शक्तिपीठ में रविवार को ढोल की थाप, रंग बिरंगी वेशभूषा और माता रानी के जयकारों के बीच भक्ति के साथ मेवाड़ की लोक संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला। चित्तौड़गढ़ जिले के भदेसर से आए भील समाज के कलाकारों ने पारंपरिक गवरी नृत्य की प्रस्तुतियां देकर मंदिर परिसर को लोक उत्सव में बदल दिया। गवरी में दिखी मेवाड़ संस्कृति का यह नजारा देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटे। कलाकारों की प्रस्तुतियों के दौरान पूरा परिसर भक्ति और लोक रंग से सराबोर नजर आया तथा श्रद्धालुओं ने उत्साह के साथ कलाकारों का हौसला बढ़ाया।
गवरी ने बांधा समां
भदेसर से पहुंचे भील समाज के कलाकारों ने मेवाड़ की पारंपरिक लोक शैली पर आधारित अलग अलग प्रस्तुतियां दीं। गवरी नृत्य का नेतृत्व मोटा भाई गोवरिया ने किया। उनके साथ कालूराम, गोदलाल, गोपीलाल और लोहान सहित अन्य कलाकार दल में शामिल रहे। कलाकारों की पारंपरिक वेशभूषा और ढोल की थाप ने माहौल को खास बना दिया। गवरी में दिखी मेवाड़ संस्कृति ने श्रद्धालुओं को लोक परंपराओं से रूबरू कराया। मंदिर परिसर में मौजूद लोगों ने प्रस्तुतियों को खूब सराहा और कलाकारों के साथ लोक उत्सव के इस रंग का आनंद लिया।
गवरी की प्रस्तुतियों के दौरान माता रानी के जयकारे भी लगातार गूंजते रहे। धार्मिक स्थल पर लोक कला और भक्ति का ऐसा मेल देखने के लिए श्रद्धालुओं में खास उत्साह नजर आया। कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति के जरिए मेवाड़ की पुरानी लोक परंपरा को जीवंत रूप में सामने रखा। कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में लोग गवरी देखने के लिए जुटे रहे। गवरी में दिखी मेवाड़ संस्कृति ने मंदिर परिसर के माहौल को और आकर्षक बना दिया। पारंपरिक नृत्य, वेशभूषा और वाद्य की थाप के बीच श्रद्धालुओं की सहभागिता ने आयोजन को यादगार बना दिया।

मंदिर में उमड़ी भीड़
कार्यक्रम के दौरान श्री जोगणिया माता शक्तिपीठ प्रबंध एवं विकास संस्थान के अध्यक्ष सत्यनारायण जोशी ने गवरी नृत्य दल के कलाकारों का स्वागत किया। रविवार को माता के दर्शन के लिए भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। मंदिर परिसर में लगातार बनी भीड़ के कारण पूरे दिन नवरात्रि जैसा माहौल नजर आया। श्रद्धालु माता के दर्शन के साथ गवरी की प्रस्तुतियों का आनंद लेते रहे। धार्मिक आस्था के बीच लोक संस्कृति की मौजूदगी ने आयोजन को विशेष बना दिया। गवरी में दिखी मेवाड़ संस्कृति ने दूर दूर से पहुंचे श्रद्धालुओं को भी अपनी ओर आकर्षित किया।
मोतिपुर, आसींद निवासी अरविंद सेन की ओर से माता रानी को छप्पन भोग अर्पित किया गया। इसके बाद करीब 3 हजार श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसादी की व्यवस्था की गई। श्रद्धालुओं ने प्रसादी ग्रहण कर माता का आशीर्वाद लिया। छप्पन भोग और महाप्रसादी के आयोजन से मंदिर परिसर में धार्मिक उत्साह और बढ़ गया। बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी के बीच भोजन प्रसादी की व्यवस्था की गई। गवरी में दिखी मेवाड़ संस्कृति के साथ श्रद्धालुओं की सामूहिक सहभागिता और महाप्रसादी ने पूरे आयोजन को धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से खास बना दिया।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। धार्मिक आयोजन, गवरी प्रस्तुति और श्रद्धालुओं की संख्या से संबंधित विवरण उपलब्ध कराई गई आयोजकीय जानकारी पर आधारित हैं। धार्मिक मान्यताओं और आस्थाओं से जुड़े उल्लेख संबंधित श्रद्धालुओं और आयोजकों की मान्यताओं के संदर्भ में हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।