गणपति का राजस्थानी श्रृंगार, 1008 मोदकों से होगा भव्य महायज्ञ
गणेश चतुर्थी पर सांवरिया सेठ मंदिर में भगवान गणपति का राजस्थानी श्रृंगार किया गया। राजस्थानी पाग, लाल पोशाक और मोतियों से सजे गणपति महाराज।

प्रतीकात्मक फोटो
भीलवाड़ा, राजस्थान (पंकज पोरवाल)। गणेश चतुर्थी पर माधव गोशाला स्थित श्री सांवरिया सेठ मंदिर में भक्ति और राजस्थानी संस्कृति का अनूठा रंग देखने को मिला। जलझूलनी एकादशी मेले एवं गणेशोत्सव के तहत मंदिर के प्रवेश द्वार और गर्भगृह के बाहर विराजमान भगवान श्री गणेश का पंडित आनंद के सानिध्य में विशेष श्रृंगार किया गया। गणपति महाराज को सुनहरे गोटे से सजी लाल रंग की नवीन पोशाक पहनाई गई। मस्तक पर गहरे लाल रंग की राजस्थानी शैली की पाग सजाई गई। गणपति का राजस्थानी श्रृंगार श्रद्धालुओं के लिए खास आकर्षण रहा और मंदिर परिसर भक्ति के साथ पारंपरिक रंग में नजर आया।
शाही अंदाज में सजे गणपति
गणपति महाराज के मस्तक पर सजाई गई राजस्थानी पाग में सफेद मोतियों का काम किया गया था। इसके साथ मुकुट, मोर शिखा और कलंगी ने श्रृंगार को और आकर्षक बना दिया। गले में बहुपरतीय मोतियों के कंठहार और अन्य आभूषण पहनाए गए। दोनों ओर पीले और गुलाबी फूलों की मालाओं से सजावट की गई। पत्थर के मेहराबदार आले में लाल वस्त्र की पृष्ठभूमि पर सफेद फूलों और कमल की कलियों से की गई सजावट ने वातावरण को खास बना दिया। गणपति का राजस्थानी श्रृंगार श्रद्धालुओं को धार्मिक आस्था के साथ स्थानीय कला और परंपरा की झलक भी दिखाता नजर आया।
विशेष पूजा अर्चना के बाद गणपति महाराज को मोदकों का भोग लगाया गया और श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरित किया गया। मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं ने आकर्षक श्रृंगार के दर्शन किए और भगवान गणेश से सुख समृद्धि की मंगलकामना की। जलझूलनी एकादशी मेले और गणेशोत्सव के बीच मंदिर में धार्मिक गतिविधियों का माहौल बना हुआ है। गणपति का राजस्थानी श्रृंगार इस आयोजन का प्रमुख आकर्षण रहा। पारंपरिक पोशाक और आभूषणों से सजे भगवान गणेश की छवि ने मंदिर परिसर में भक्ति और उत्सव का रंग और गहरा कर दिया।

मोदकों से होगा महायज्ञ
जलझूलनी एकादशी के तहत 17 सितंबर को मंदिर परिसर में 11 विद्वान पंडितों के सानिध्य में 1008 मोदक गणपति महायज्ञ का आयोजन किया जाएगा। धार्मिक आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह है। इसके बाद 19 सितंबर को प्रभु श्री सांवरिया सेठ और गणपति महाराज को 56 भोग धराया जाएगा। 56 भोग के बाद महाआरती और महाप्रसाद का आयोजन भी होगा। मंदिर में होने वाले इन आयोजनों को लेकर तैयारियां की जा रही हैं और धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से इसमें शामिल होने की अपील की गई है।
श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए पुर क्षेत्र की ओर संचालित नगर ई बसों के फेरे बढ़ाकर रूट को नौगांवा मार्ग तक विस्तारित किया गया है। इससे माधव गोशाला और सांवरिया सेठ मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर परिवहन सुविधा मिलने की उम्मीद है। धार्मिक आयोजनों के दौरान बढ़ने वाली आवाजाही को देखते हुए परिवहन व्यवस्था में किया गया यह बदलाव उपयोगी माना जा रहा है। गणपति का राजस्थानी श्रृंगार देखने के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के साथ आगामी महायज्ञ और 56 भोग में शामिल होने वालों को भी इससे सुविधा मिलने की उम्मीद है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
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