गांवों तक पेंशन पहुंचाएगी पेंशन सखी, सरकार की नई तैयारी
पेंशन सखी से गांवों में बढ़ेगी पेंशन की पहुंच। सरकार ग्रामीण परिवारों को सामाजिक सुरक्षा से जोड़ने और पेंशन की जानकारी आसान बनाने की तैयारी में है।

पेंशन सखी योजना का आगाज
नई दिल्ली, दिल्ली। पेंशन सखी के जरिए ग्रामीण भारत में पेंशन की पहुंच बढ़ाने की तैयारी है। ग्रामीण विकास विभाग और पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण ने ग्रामीण परिवारों को सामाजिक सुरक्षा से जोड़ने के लिए समझौता किया है। IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस पहल में दीनदयाल अंत्योदय योजना, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के सामुदायिक नेटवर्क का इस्तेमाल होगा। बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट सखियां और प्रशिक्षित सामुदायिक कार्यकर्ता लोगों को पेंशन की जानकारी देंगे, नामांकन में मदद करेंगे और आगे की प्रक्रिया समझाएंगे। खास जोर ग्रामीण महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों तक पहुंच बढ़ाने पर रहेगा। [1]
गांव तक पहुंचेगी जानकारी
पेंशन सखी पहल के जरिए ग्रामीण इलाकों में पेंशन को लेकर जागरूकता और वित्तीय समझ बढ़ाने की कोशिश होगी। प्रशिक्षित महिलाएं और सामुदायिक संसाधन व्यक्ति लोगों को अलग अलग पेंशन विकल्पों की जानकारी देंगे। वे स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों, ग्रामीण महिलाओं, लखपति दीदियों और दूसरे जरूरतमंद वर्गों तक पहुंच बनाएंगे। दूरदराज के इलाकों में स्थानीय स्तर पर जानकारी और मदद मिलने से उन लोगों के लिए पेंशन से जुड़ना आसान हो सकता है जिन्हें अब तक औपचारिक सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी सीमित रूप से मिली है। यह नेटवर्क गांवों में पेंशन संबंधी सवालों का जवाब देने और प्रक्रिया समझाने में भी मदद करेगा।
ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव रोहित कंसल ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों से जुड़े परिवारों की बचत की आदतें, आजीविका का चक्र और जोखिम अलग हो सकते हैं। ऐसे में सामाजिक सुरक्षा को ग्रामीण परिवारों की आर्थिक मजबूती से जोड़ना जरूरी है। उन्होंने पेंशन जागरूकता और वित्तीय साक्षरता के लिए ईमानदारी, पारदर्शिता और भरोसे को अहम बताया। इसी सोच के तहत प्रशिक्षित बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट सखियों और दूसरे वित्तीय रूप से जागरूक सामुदायिक कार्यकर्ताओं को पेंशन सखी की भूमिका दी जाएगी। इससे ग्रामीण परिवारों को लंबी अवधि की आर्थिक सुरक्षा समझने और उपलब्ध विकल्पों के बारे में जानकारी हासिल करने में स्थानीय स्तर पर मदद मिलने की उम्मीद है।
पेंशन की राह आसान
इस साझेदारी के तहत ग्रामीण परिवारों में पेंशन उत्पादों की जानकारी और स्वीकार्यता बढ़ाने पर भी जोर रहेगा। पेंशन सखी के जरिए राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली यानी एनपीएस सहित उपलब्ध पेंशन विकल्पों की जानकारी ग्रामीण लोगों तक पहुंचाई जाएगी। पीएफआरडीए की पूर्णकालिक सदस्य ममता शंकर ने बढ़ती जीवन प्रत्याशा और बदलती जनसांख्यिकी के बीच रिटायरमेंट प्लानिंग की जरूरत पर जोर दिया। ग्रामीण क्षेत्रों में कई परिवारों की औपचारिक रिटायरमेंट और सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था तक पहुंच सीमित है। स्थानीय स्तर पर जानकारी और नामांकन में मदद मिलने से पेंशन की प्रक्रिया समझना आसान हो सकता है और ज्यादा लोग समय रहते भविष्य की आर्थिक सुरक्षा पर विचार कर सकते हैं।
इस पहल की पहुंच और कामकाज पर नजर रखने के लिए डिजिटल डैशबोर्ड, मोबाइल और वेब आधारित समाधान तथा विशिष्ट पहचान आधारित ट्रैकिंग का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे जागरूकता अभियान, नामांकन और प्रदर्शन की निगरानी में मदद मिलेगी। सरकार और पीएफआरडीए की साझेदारी का लक्ष्य ग्रामीण भारत में पेंशन साक्षरता बढ़ाने के साथ वित्तीय समावेशन और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करना है। खास बात यह है कि महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों के मजबूत नेटवर्क को इस अभियान की ताकत बनाया जा रहा है। पेंशन सखी के जरिए उन ग्रामीण परिवारों तक पहुंचने की कोशिश है जो अभी औपचारिक रिटायरमेंट सुरक्षा से दूर हैं।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। पेंशन योजनाओं, एनपीएस और पात्रता से जुड़ी वास्तविक शर्तें संबंधित आधिकारिक नियमों के अनुसार ही मान्य होंगी। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।