रेपो रेट बढ़ेगा, महंगाई ने RBI के सामने बढ़ाई ब्याज दर की चिंता
रेपो रेट बढ़ेगा या नहीं, इस पर RBI के अगले फैसले की नजर है। महंगाई बढ़ने से अक्टूबर में ब्याज दर बढ़ाने की अटकलें तेज हुई हैं।

प्रतीकात्मक फोटो
नई दिल्ली, दिल्ली। रेपो रेट बढ़ेगा या नहीं, अब इस सवाल पर बाजार और कर्ज लेने वालों की नजर टिक गई है। खुदरा और थोक महंगाई में तेज बढ़ोतरी के बाद भारतीय रिजर्व बैंक पर ब्याज दर को लेकर दबाव बढ़ने की आशंका है। IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, Systematix Group का अनुमान है कि अक्टूबर की मौद्रिक नीति समिति की बैठक में RBI ब्याज दर बढ़ाने की दिशा में पहला संकेत दे सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा 5.25 प्रतिशत रेपो रेट को लंबे समय तक बनाए रखना बढ़ती महंगाई के रुख से मेल नहीं खा रहा है। [1]
महंगाई ने बढ़ाई चिंता
अगस्त में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.82 प्रतिशत पहुंच गई है, जबकि थोक महंगाई 9.92 प्रतिशत तक पहुंच गई। खाद्य कीमतों में तेजी के साथ कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भी महंगाई का दबाव बढ़ा रही हैं। ऐसे माहौल में रेपो रेट बढ़ेगा तो इसका असर कर्ज की लागत पर पड़ सकता है। Systematix Group के मुताबिक महंगाई अक्टूबर और नवंबर तक 6 प्रतिशत के पार जा सकती है। रिपोर्ट में अल नीनो से खाद्य आपूर्ति पर असर और लगातार महंगे कच्चे तेल को भी महंगाई के लिए बड़ा जोखिम बताया गया है।
हालांकि ब्याज दर बढ़ाने का फैसला अभी तय नहीं है और अंतिम निर्णय RBI की मौद्रिक नीति समिति ही करेगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर महंगाई का दबाव लगातार बना रहता है तो केंद्रीय बैंक के सामने दरों को सख्त करने का विकल्प मजबूत हो सकता है। इसका सीधा असर होम लोन, कार लोन और दूसरे फ्लोटिंग रेट वाले कर्ज पर पड़ सकता है। दूसरी तरफ ऊंची ब्याज दरें बचत करने वालों के लिए जमा पर बेहतर रिटर्न का रास्ता भी खोल सकती हैं। इसलिए अगले MPC फैसले को बाजार बेहद करीब से देख रहा है।
अक्टूबर बैठक पर नजर
Systematix Group की रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि अक्टूबर की MPC बैठक से RBI के रुख में बदलाव के शुरुआती संकेत मिल सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक महंगाई बढ़ने की मौजूदा रफ्तार और थोक कीमतों में दबाव को देखते हुए आगे ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। मौजूदा रेपो रेट 5.25 प्रतिशत है और रिपोर्ट में इसे आगे 6.5 प्रतिशत के करीब जाने की संभावना जताई गई है। हालांकि यह अनुमान है, कोई आधिकारिक फैसला नहीं। इसलिए बाजार की नजर महंगाई के अगले आंकड़ों और RBI के संकेतों पर रहेगी।
महंगाई के आगे बढ़ने के कई कारण बताए गए हैं। खाद्य आपूर्ति पर मौसम का असर, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और थोक महंगाई में लगातार मजबूती आगे भी कीमतों पर दबाव डाल सकती है। ऐसे में रेपो रेट बढ़ेगा तो आर्थिक गतिविधियों और आम लोगों की उधारी लागत पर असर पड़ने की संभावना रहेगी। दूसरी ओर RBI के लिए महंगाई को काबू में रखना उसकी मौद्रिक नीति की अहम प्राथमिकता है। इसलिए आने वाले महीनों में महंगाई और ब्याज दर के बीच संतुलन सबसे बड़ा मुद्दा रहेगा और अक्टूबर की बैठक पर सबकी नजर होगी।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। ब्याज दरों से जुड़े संभावित बदलाव विश्लेषकों के अनुमान हैं और अंतिम फैसला RBI की मौद्रिक नीति समिति करेगी। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।