समान अवसर से बदलेगी सोच, बच्चों को क्षमता के मुताबिक मिले साथ
बीकानेर के प्रेरणा कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने बच्चों की क्षमता, शिक्षा, स्वास्थ्य और समान अवसर पर जोर दिया, अभिभावकों को भी दिए अहम सुझाव।
कार्यक्रम को संबोधित करते वक्ता
बीकानेर, राजस्थान। अधिवक्ता संजय रंगा लाइफ फाउंडेशन संस्थान की ओर से स्वर्गीय संजय रंगा की पुण्य स्मृति में धरणीधर ऑडिटोरियम में प्रेरणा कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बच्चों और दिव्यांगजनों के समावेशन, उनकी क्षमताओं की पहचान, शिक्षा, स्वास्थ्य और अभिभावकों की भूमिका पर विशेषज्ञों ने विचार रखे। संस्थान की अध्यक्ष एडवोकेट पारूल रंगा ने कहा कि हर बच्चा अपनी अलग क्षमता और विशेषता रखता है। जरूरत उसकी रुचि और योग्यता पहचानकर उसे आगे बढ़ने का मौका देने की है। कार्यक्रम में समान अवसर को बच्चों के बेहतर भविष्य की अहम जरूरत बताया गया और परिवार तथा समाज की साझा जिम्मेदारी पर जोर दिया गया।
क्षमता की पहचान
एडवोकेट पारूल रंगा ने कहा कि बच्चों की तुलना करने के बजाय उनकी अलग क्षमता और रुचि को समझना जरूरी है। उन्होंने कहा कि परिवार और शिक्षक मिलकर ऐसा माहौल बनाएं जहां बच्चे अपनी योग्यता के अनुसार आगे बढ़ सकें। डॉ हिमांशु भाटिया ने अपनी पुस्तक पर चर्चा करते हुए अभिभावकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि माता पिता को बच्चों की योग्यता और क्षमता समझनी चाहिए तथा किसी समस्या के संकेत दिखाई देने पर समय पर चिकित्सकीय परामर्श और उपचार करवाना चाहिए। उनके अनुसार समय पर पहचान और उचित सहयोग बच्चों के विकास में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। परिवार की सक्रिय भूमिका से समान अवसर की सोच को व्यवहार में उतारना आसान होगा।
डॉ भाटिया ने बच्चों की दैनिक दिनचर्या और व्यवहार पर ध्यान देने की भी बात कही। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों को मोबाइल और टीवी से दूर रखने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि बच्चों को एक समय में एक ही कार्य या निर्देश देना बेहतर है। एक साथ कई काम देने से उन पर अनावश्यक दबाव पड़ सकता है। बच्चों की क्षमता और समझ के अनुसार गतिविधियां तय करने से उन्हें सीखने में आसानी होती है। उन्होंने बच्चों की छोटी उपलब्धियों को भी प्रोत्साहित करने पर जोर दिया। उनका कहना था कि धैर्यपूर्वक बच्चे को समझने और उसकी जरूरत के अनुसार सहयोग देने से आत्मविश्वास बढ़ता है। यही रवैया समान अवसर को वास्तविक आधार दे सकता है।

पढ़ाई का दबाव
डॉ पराज सिंघवी ने शिक्षा के दौरान बच्चों पर पड़ने वाले दबाव को कम करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि अभिभावकों और शिक्षकों को बच्चों की क्षमता के अनुसार अध्ययन करवाना चाहिए। एक साथ बहुत अधिक कार्य देने के बजाय छोटी और सहज गतिविधियों से शुरुआत करना बेहतर है। उन्होंने बच्चों को प्रतिदिन एक पेज पढ़ने जैसी सरल गतिविधियों से जोड़ने का सुझाव दिया। उनका कहना था कि पढ़ाई को बोझ बनाने के बजाय सहज और रुचिकर बनाया जाना चाहिए। लगातार पढ़ाई करवाने के बजाय बीच बीच में ब्रेक देना जरूरी है। हर बच्चे की सीखने की गति अलग होती है इसलिए समान अवसर का मतलब सभी से एक जैसी अपेक्षा रखना नहीं बल्कि उनकी जरूरत के अनुसार सहयोग देना है।
डॉ श्याम अग्रवाल ने बच्चों की रुचि को सीखने की प्रक्रिया का आधार बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यदि बच्चा चित्र बनाना कहानी सुनाना या खेलना पसंद करता है तो इन्हीं गतिविधियों के माध्यम से उसे सीखने के लिए प्रेरित किया जा सकता है। बच्चों पर अपनी पसंद थोपने के बजाय उनकी रुचि समझना जरूरी है। पसंद की गतिविधि से जुड़ने पर बच्चा सहजता से सीखता है और उसका आत्मविश्वास बढ़ता है। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों की प्रतिभा विकसित करने के लिए सकारात्मक वातावरण उपलब्ध कराने की बात कही। डॉ अमित पुरोहित ने भी बच्चों और दिव्यांगजनों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण विकसित करने पर जोर दिया और उनकी सीमाओं के बजाय संभावनाओं को देखने का संदेश दिया।
सम्मान और सहयोग
डॉ अमित पुरोहित ने कहा कि समाज में प्रत्येक व्यक्ति को सम्मान और आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि परिवार, शिक्षक और समाज मिलकर ऐसा वातावरण तैयार करें जिसमें बच्चे सुरक्षित, स्वीकार्य और सम्मानित महसूस करें। अलग अलग क्षमताओं वाले बच्चों को उनकी जरूरत के अनुसार सहयोग देना उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। उन्होंने कहा कि बच्चों और दिव्यांगजनों को उनकी सीमाओं से नहीं बल्कि उनकी संभावनाओं से देखना जरूरी है। इससे समाज में स्वीकार्यता बढ़ेगी और परिवारों को भी बच्चों के विकास के लिए बेहतर दिशा मिलेगी। उनका संदेश था कि समान अवसर केवल नीति या विचार नहीं बल्कि रोजमर्रा के व्यवहार का हिस्सा होना चाहिए।
संस्थान के सचिव एडवोकेट राकेश रंगा ने कहा कि संस्थान स्वर्गीय संजय रंगा की स्मृति को समाज के लिए उपयोगी और सार्थक कार्यों के माध्यम से जीवित रखने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि बच्चों और दिव्यांगजनों के लिए अवसर पैदा करना, उनकी क्षमताओं को स्वीकार करना और सम्मानपूर्वक आगे बढ़ने में सहयोग देना संस्थान के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है। कार्यक्रम में शिवकुमार रंगा, अजय रंगा, प्रवीण रंगा, रोहित, शिवकुमारी, अमित पुरोहित, डॉ अंजून रंगा, प्रज्ञा व्यास, नेहा आचार्य, डॉ रोहित किराडू, हरिहर व्यास, नीतेश रंगा और सुनीता सहित कई लोग मौजूद रहे। आयोजकों ने कहा कि समान अवसर और सम्मान की सोच को मजबूत करना ही प्रेरणा कार्यक्रम का मुख्य संदेश है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
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