2028 की रेस के लिए सरकार ने बनाया नया फॉर्मूला 1 टास्क फोर्स
फॉर्मूला 1 टास्क फोर्स के गठन के साथ भारत में मोटरस्पोर्ट्स की बड़ी वापसी पर चर्चा तेज हो गई है। सरकार अब 2028 में रेस की संभावना का आकलन करेगी।

प्रतीकात्मक फोटो
नई दिल्ली, दिल्ली। फॉर्मूला 1 टास्क फोर्स के गठन के साथ भारत में विश्वस्तरीय मोटरस्पोर्ट्स की वापसी की संभावना फिर चर्चा में आ गई है। बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने भारत में फॉर्मूला 1 को फिर शुरू करने की संभावनाओं और चुनौतियों का अध्ययन करने के लिए 10 सदस्यीय टास्क फोर्स बनाने की घोषणा की है। समिति की अध्यक्षता नीति आयोग के कार्यक्रम निदेशक और सलाहकार युगल किशोर जोशी करेंगे। इसमें खेल मंत्रालय के संयुक्त सचिव कुणाल, मोटरस्पोर्ट्स महासंघ के प्रतिनिधि और पर्यटन तथा वाणिज्य विभाग से जुड़े सदस्य भी शामिल होंगे। सरकार का लक्ष्य 2028 में भारत में रेस आयोजित करने की व्यवहारिकता देखना है। [1]
वापसी की वजह
फॉर्मूला 1 टास्क फोर्स को भारत में मोटरस्पोर्ट्स की वापसी से जुड़ी व्यापक चुनौतियों का अध्ययन करना होगा। भारत ने आखिरी बार 2013 में फॉर्मूला 1 रेस की मेजबानी की थी। इसके बाद प्रशासनिक, कर और अन्य संबंधित समस्याओं के कारण रेस भारत से हट गई। अब सरकार की कोशिश केवल रेस आयोजित करने तक सीमित नहीं बल्कि मोटरस्पोर्ट्स के लिए टिकाऊ विकास का रोडमैप तैयार करने की है। समिति नीति संबंधी बदलावों और उन बाधाओं की पहचान करेगी जो भविष्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर की रेस की मेजबानी में सामने आ सकती हैं। इससे खेल के साथ पर्यटन और व्यावसायिक गतिविधियों को भी संभावित लाभ मिल सकता है।
2028 पर नजर
फॉर्मूला 1 टास्क फोर्स के सामने 2028 का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन इसे अभी अंतिम आयोजन की घोषणा नहीं माना जा सकता। समिति को पहले व्यवहारिकता, लागत, बुनियादी ढांचे, कर व्यवस्था, सुरक्षा और आयोजन संबंधी नियमों का अध्ययन करना होगा। अंतरराष्ट्रीय रेस के लिए विश्वस्तरीय ट्रैक, टीमों की सुविधाएं, दर्शक व्यवस्था और परिवहन नेटवर्क जरूरी होते हैं। भारत के पास मोटरस्पोर्ट्स के लिए पहले का अनुभव मौजूद है, लेकिन लंबे अंतराल के बाद वापसी के लिए नए निवेश और संस्थागत तैयारी की जरूरत पड़ सकती है। टास्क फोर्स की रिपोर्ट और सरकार की आगे की नीति से ही यह स्पष्ट होगा कि 2028 की संभावना कितनी व्यावहारिक बनती है।
राज्यों की भूमिका
फॉर्मूला 1 टास्क फोर्स में उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र सरकार के प्रतिनिधित्व को भी शामिल किया गया है। इससे संकेत मिलता है कि संभावित आयोजन के लिए राज्य सरकारों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। दोनों राज्यों के पास बड़े शहर, परिवहन ढांचा और औद्योगिक आधार मौजूद है, लेकिन रेस की मेजबानी के लिए विशिष्ट सुविधाओं और अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा करना होगा। समिति पर्यटन और वाणिज्य विभागों को भी शामिल कर रही है, जिससे आयोजन को केवल खेल प्रतियोगिता की बजाय आर्थिक और पर्यटन गतिविधि के रूप में देखने की कोशिश दिखाई देती है। अंतिम स्थल और मॉडल पर फैसला अध्ययन और सरकार की आगे की नीति के बाद ही हो सकेगा।
अब रिपोर्ट का इंतजार
फॉर्मूला 1 टास्क फोर्स अब भारत में रेस वापसी की वास्तविक संभावनाओं का आकलन करेगी। बिजनेस स्टैंडर्ड के अनुसार, समिति का उद्देश्य मोटरस्पोर्ट्स के टिकाऊ विकास के तरीके तलाशना और 2028 में फॉर्मूला 1 रेस की मेजबानी के लिए जरूरी नीति हस्तक्षेपों की पहचान करना है। भारत में आखिरी रेस 2013 में हुई थी और उसके बाद आयोजन रुक गया था। इसलिए इस पहल को सीधे रेस की पुष्टि मानना जल्दबाजी होगी। पहले टास्क फोर्स को चुनौतियां, लागत और नीति संबंधी जरूरतें सामने रखनी होंगी। इसके बाद सरकार तय करेगी कि फॉर्मूला 1 टास्क फोर्स की सिफारिशों के आधार पर भारत वापसी की दिशा में अगला कदम क्या होगा।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। फॉर्मूला 1 टास्क फोर्स का गठन संभावित वापसी का आकलन करने के लिए हुआ है और 2028 की रेस की अंतिम पुष्टि अभी नहीं हुई है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।