Meta का बड़ा फैसला, बच्चों की सुरक्षा पर कानून प्रवर्तन को रिपोर्ट
Meta का बड़ा फैसला: बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों की रिपोर्ट अब सीधे भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों को देने पर सहमति, सरकार ने सख्ती दिखाई।
प्रतीकात्मक फोटो
नई दिल्ली, दिल्ली। Meta का बड़ा फैसला बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़े मामलों में सामने आया है। टेक कंपनी Meta ने भारत में बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों और बाल यौन शोषण से संबंधित घटनाओं की जानकारी उचित कानून प्रवर्तन एजेंसियों को सीधे देने पर सहमति जताई है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार लगातार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर दबाव बढ़ा रही है और इसे देश में काम करने वाले हर प्लेटफॉर्म की मूल जिम्मेदारी बताया गया है। ANI की एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने साफ किया है कि बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के मामले में किसी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। [1]
Meta ने बदली नीति
Meta की ओर से भी इस बदलाव की पुष्टि की गई है। कंपनी के मुताबिक, अब बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामले सीधे भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र यानी I4C के साइबरक्राइम पोर्टल को रिपोर्ट किए जाएंगे। Meta ने कहा है कि उसके प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा उसकी प्राथमिकता है और वह सरकार के साथ मिलकर ऐसे अपराधों के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए काम करना चाहती है। इससे पहले ऐसे मामलों की रिपोर्टिंग मुख्य रूप से अमेरिका स्थित National Center for Missing and Exploited Children के माध्यम से की जाती थी।
केंद्र सरकार ने Meta के इस फैसले को बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में शुरुआती कदम बताया है। हालांकि, सरकारी सूत्रों ने यह भी स्पष्ट किया है कि अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। सरकार दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के साथ भी बातचीत कर रही है ताकि बच्चों के लिए नुकसानदायक और अवैध सामग्री की पहचान कर उसे सक्रिय रूप से हटाया जा सके। साथ ही, ऐसे प्लेटफॉर्म जो बच्चों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम नहीं उठाएंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
I4C को मिलेगी सूचना
Meta का बड़ा फैसला ऐसे समय सामने आया है जब भारत में Meta के प्लेटफॉर्म पर बच्चों से जुड़े आपत्तिजनक कंटेंट और कथित विज्ञापनों को लेकर जांच बढ़ी है। 9 सितंबर को Meta India के प्रतिनिधि राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सामने भी पेश हुए थे। NCPCR ने कथित Child Sexual Exploitation and Abuse Material से जुड़े विज्ञापनों को लेकर कंपनी से जवाब मांगा था। इससे पहले राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी दिल्ली पुलिस को Instagram पर कथित आपत्तिजनक विज्ञापनों और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े कानूनी प्रावधानों के पालन की जांच करने का निर्देश दिया था।
सरकार के बढ़ते दबाव के बीच Meta का बड़ा फैसला डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों की सूचना भारतीय साइबर अपराध तंत्र तक सीधे पहुंचने से स्थानीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ कार्रवाई का समन्वय तेज हो सकता है। हालांकि, इस व्यवस्था का वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि संदिग्ध सामग्री की पहचान, रिपोर्टिंग और उसके बाद कार्रवाई कितनी तेजी से होती है। Meta का बड़ा फैसला फिलहाल बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर भारत में बढ़ती सख्ती और प्लेटफॉर्म की जवाबदेही की दिशा में एक अहम कदम है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़े मामलों में अंतिम कार्रवाई संबंधित कानून प्रवर्तन एजेंसियों और जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।