37 साल पुरानी हाथ की विकृति, सर्जरी ने लौटाई काम की ताकत, जगी उम्मीद
37 साल पुरानी हाथ की विकृति से जूझ रहे बाबूलाल की सफल जटिल प्लास्टिक सर्जरी के बाद हाथ की कार्यक्षमता लौटी और वे फिर से मजदूरी कर रहे हैं।

हाथ की विकृति से ठीक हुए बाबूलाल
बीकानेर, राजस्थान। 37 साल पुरानी हाथ की विकृति से जूझ रहे बाबूलाल के लिए अब जिंदगी ने नई करवट ली है। महज 8 माह की उम्र में चूल्हे में गिरने से उनका दायां हाथ बुरी तरह झुलस गया था। समय के साथ हाथ में गंभीर विकृति विकसित हुई और इसका असर उनके रोजमर्रा के काम तथा रोजगार पर पड़ा। करीब 37 वर्षों तक परेशानी झेलने के बाद एसपी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में उनकी जटिल प्लास्टिक सर्जरी की गई। प्लास्टिक सर्जन डॉ. अजयपाल चौधरी के उपचार के बाद हाथ की कार्यक्षमता में सुधार हुआ और अब बाबूलाल अपने दैनिक काम के साथ मजदूरी भी कर पा रहे हैं।
37 साल का दर्द
बाबूलाल की परेशानी केवल हाथ की बनावट तक सीमित नहीं थी। बचपन में जलने के बाद दायां हाथ इस तरह प्रभावित हुआ कि समय के साथ हाथ की विकृति बढ़ती गई। इसका सीधा असर उनकी रोजमर्रा की गतिविधियों और कमाई पर पड़ा। लंबे समय तक वह अपने काम के लिए दूसरों पर निर्भर रहने की स्थिति में रहे। करीब 37 वर्षों तक यह समस्या उनके साथ रही, लेकिन इलाज की उम्मीद ने उन्हें सुपर स्पेशलिटी अस्पताल तक पहुंचाया। विशेषज्ञों ने स्थिति का परीक्षण करने के बाद पुनर्निर्माण की जरूरत तय की और 37 साल की विकृति को सुधारने के लिए जटिल सर्जरी के जरिए हाथ की संरचना तथा उपयोगिता सुधारने की कोशिश की गई।
डॉ. अजयपाल चौधरी ने बाबूलाल की जटिल प्लास्टिक सर्जरी के दौरान बोन ग्राफ्टिंग, टेंडन की लंबाई बढ़ाने और फ्लैप कवरेज जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया। इन प्रक्रियाओं का उद्देश्य हाथ को बेहतर आकार देना और उसकी कार्यक्षमता बढ़ाना था। लंबे समय से चली आ रही हाथ की विकृति के कारण यह उपचार चुनौतीपूर्ण था, लेकिन सर्जरी के बाद बाबूलाल के हाथ में उपयोगी सुधार दिखाई दिया। अब वह अपने रोजमर्रा के काम खुद करने के साथ मजदूरी करने में भी सक्षम हैं। 37 साल पुरानी विकृति के मामले में की गई यह पुनर्निर्माण सर्जरी क्षतिग्रस्त हिस्से की संरचना और कार्य को बेहतर करने की दिशा में महत्वपूर्ण रही।

मिली काम की ताकत
एसएसबी अधीक्षक डॉ. संजीव बुरी ने इसे लंबे समय से विकृति के साथ जी रहे मरीज के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। एसपी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुरेन्द्र कुमार ने कहा कि सुपर स्पेशलिटी सेवाओं के विस्तार से जटिल प्लास्टिक सर्जरी का लाभ मरीजों तक पहुंच रहा है। उन्होंने बताया कि बाबूलाल के मामले में बोन ग्राफ्टिंग, टेंडन लंबाई बढ़ाने और फ्लैप कवरेज के जरिए हाथ को नया आकार देने के साथ कार्यक्षमता सुधारने पर जोर रहा। ऑपरेशन में निश्चेतन विभाग की डॉ. कांता भाटी, डॉ. सोनाली धवन, डॉ. शिवा तंवर और ओटी स्टाफ ने सहयोग किया।
सर्जरी के बाद बाबूलाल अब आत्मनिर्भर होकर सामान्य जीवन की ओर लौट रहे हैं और मजदूरी कर अपने परिवार की जरूरतें पूरी करने की कोशिश कर रहे हैं। उपचार टीम से जुड़े लोगों के मुताबिक ऐसे मामलों में लक्ष्य केवल बाहरी रूप सुधारना नहीं, बल्कि प्रभावित अंग की उपयोगी क्षमता लौटाना भी होता है। हाथ की पुनर्निर्माण सर्जरी इसी दिशा में काम करती है और मरीज में दैनिक गतिविधियों को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है। बाबूलाल की कहानी बताती है कि लंबे समय से चली आ रही 37 साल की हाथ की विकृति के बावजूद विशेषज्ञ उपचार से कार्यक्षमता में सुधार की उम्मीद बनी रह सकती है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। सर्जरी के परिणाम और मरीज की आगे की कार्यक्षमता व्यक्ति की चिकित्सकीय स्थिति और उपचार के बाद की देखभाल पर निर्भर करती है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।