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बच्चों की सुरक्षा पर खास पाठ, डर लगे तो तुरंत बोलें और तुरंत मदद लें

नीम का थाना में बच्चों की सुरक्षा, कानून, बाल अधिकार की अहम जानकारी दी गई। NO GO TELL मंत्र के जरिए अनजान व्यक्ति से खतरे में तुरंत कदम उठाने की सीख दी गई।

By अजय त्यागी
1 min read
Advertisement002309202602.jpg advertisement13Aug2026%20copy.jpg विद्यार्थियों से संवाद

विद्यार्थियों से संवाद

नीम का थाना, राजस्थान (शिंभू सिंह शेखावत)। बच्चों की सुरक्षा को लेकर तालुका विधिक सेवा समिति की ओर से बाल भारती पब्लिक सेकेंडरी स्कूल, छावनी में विशेष विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सीकर के निर्देश पर हुए कार्यक्रम में एडीजे 02 पूनम शर्मा ने विद्यार्थियों से संवाद किया। उन्होंने बच्चों को उनके अधिकार, कानूनी संरक्षण और सुरक्षित व्यवहार की जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान बच्चों को यह समझाया गया कि डर या असहज स्थिति को छिपाने के बजाय तुरंत किसी भरोसेमंद बड़े व्यक्ति को बताना बच्चों की सुरक्षा का सबसे जरूरी कदम है।

सुरक्षा का आसान मंत्र

कार्यक्रम का मुख्य संदेश Stranger Danger और NO GO TELL रहा। न्यायिक अधिकारी ने बच्चों को समझाया कि कोई अनजान व्यक्ति बहलाने, फुसलाने, लालच देने या असहज स्थिति में डालने की कोशिश करे तो घबराने की जरूरत नहीं है। ऐसी स्थिति में पहले NO यानी साफ शब्दों में ना कहना है। इसके बाद GO यानी वहां से तुरंत दूर होकर सुरक्षित स्थान पर जाना है। तीसरा कदम TELL है, यानी घटना की जानकारी माता पिता, शिक्षक या किसी भरोसेमंद वयस्क को तुरंत देना है। बच्चों की सुरक्षा के लिए इस सरल तरीके को रोजमर्रा की जिंदगी में याद रखने पर जोर दिया गया।

बाल अधिकारों की सीख

कार्यक्रम में बाल अधिकार, बाल संरक्षण कानून, गुड टच और बैड टच, शिक्षा का अधिकार, बाल विवाह से जुड़े कानूनी प्रावधान और निशुल्क विधिक सहायता के बारे में भी जानकारी दी गई। विद्यार्थियों को बताया गया कि किसी भी तरह का डर, दबाव या गलत व्यवहार सहना जरूरी नहीं है और जरूरत पड़ने पर कानून की मदद ली जा सकती है। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की जागरूकता सामग्री में भी बच्चों को Stranger Danger और NO GO TELL जैसे संदेशों के जरिए सतर्क रहने की सीख दी गई है। बच्चों की सुरक्षा को लेकर ऐसी जानकारी उन्हें समय रहते सही कदम उठाने में मदद कर सकती है।

साइबर खतरे से सावधानी

डिजिटल दौर में बच्चों की सुरक्षा का एक अहम हिस्सा साइबर सुरक्षा भी है। विद्यार्थियों को सलाह दी गई कि इंटरनेट पर किसी अनजान व्यक्ति के साथ निजी जानकारी साझा न करें और संदिग्ध संदेश, लिंक या ऑनलाइन गतिविधि सामने आने पर तुरंत अभिभावक या शिक्षक को बताएं। सोशल मीडिया और दूसरे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते समय अपनी पहचान और व्यक्तिगत जानकारी को सुरक्षित रखना जरूरी है। न्यायिक अधिकारी ने बच्चों से कहा कि किसी भी परेशानी को अकेले सहने के बजाय भरोसेमंद व्यक्ति की मदद लें। इस तरह जागरूकता और समय पर सूचना बच्चों को ऑनलाइन तथा वास्तविक दुनिया दोनों में सुरक्षित रखने में मदद कर सकती है।

प्रश्नों से बढ़ा आत्मविश्वास

कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने उत्साह के साथ भाग लिया और बच्चों की सुरक्षा तथा कानून से जुड़े कई सवाल पूछे। न्यायिक अधिकारी पूनम शर्मा ने विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का सरल भाषा में जवाब दिया और उन्हें अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने के लिए प्रेरित किया। विद्यालय की प्रिंसिपल मधु सूईवाल ने कहा कि बच्चों को छोटी उम्र से ही अधिकारों और सुरक्षा की जानकारी देना जरूरी है। डायरेक्टर कैलाश सैनी ने तालुका विधिक सेवा समिति और न्यायिक अधिकारियों का आभार जताते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों के आत्मविश्वास और सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

विद्यालय ने जताया आभार

कार्यक्रम के दौरान विद्यालय परिवार ने न्यायिक अधिकारी और विधिक सेवा समिति के प्रयासों की सराहना की। विद्यालय की ओर से कहा गया कि कानून की जानकारी बच्चों की सुरक्षा की पहली सीढ़ी है और विद्यार्थियों को अपने अधिकारों के प्रति सजग बनाना शिक्षण संस्थान की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। कार्यक्रम के समापन पर बच्चों को स्वयं सुरक्षित रहने और अपने साथियों को भी सुरक्षा तथा अधिकारों के प्रति जागरूक करने का संदेश दिया गया। बच्चों की सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए अभिभावकों, शिक्षकों और विद्यार्थियों के बीच लगातार संवाद बनाए रखने पर भी जोर दिया गया।

बच्चों की सुरक्षा के इस कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को यह सीधा संदेश दिया कि किसी अनजान व्यक्ति का दबाव, लालच या डर उन्हें चुप कराने के लिए पर्याप्त नहीं होना चाहिए। NO GO TELL का आसान मंत्र उन्हें खतरे की स्थिति में सही कदम उठाने की दिशा दिखाता है। इसके साथ बाल अधिकार, गुड टच और बैड टच, साइबर सुरक्षा और कानूनी सहायता की जानकारी ने कार्यक्रम को व्यापक बनाया। विद्यालय परिवार ने तालुका विधिक सेवा समिति और न्यायिक अधिकारियों का आभार जताया। बच्चों की सुरक्षा के लिए जागरूकता, संवाद और समय पर मदद मांगना सबसे अहम आधार हैं।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। बच्चों से संबंधित किसी भी सुरक्षा या कानूनी समस्या में तत्काल अभिभावक, शिक्षक, संबंधित अधिकारी या सक्षम कानूनी सहायता तंत्र से संपर्क करना उचित है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief