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माइनिंग में बदलाव तेज, युवा इंजीनियरों ने संभाली तकनीकी कमान

माइनिंग में बदलाव को युवा इंजीनियर नई तकनीक से गति दे रहे हैं। हिंदुस्तान जिंक में 57.8 प्रतिशत अधिकारी इंजीनियरिंग से हैं। 335 प्रतिभाएं जुड़ीं।

By अजय त्यागी
1 min read
Advertisement002309202602.jpg advertisement13Aug2026%20copy.jpg प्रतीकात्मक फोटो

प्रतीकात्मक फोटो

उदयपुर, राजस्थान (पंकज पोरवाल)। माइनिंग में बदलाव अब केवल भारी मशीनों और पारंपरिक खनन प्रक्रियाओं तक सीमित नहीं रह गया है। डिजिटल तकनीक, ऑटोमेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल ने इस क्षेत्र के कामकाज की तस्वीर बदल दी है। इंजीनियर्स डे के अवसर पर हिंदुस्तान जिंक ने अपनी युवा इंजीनियरिंग प्रतिभाओं की भूमिका को सामने रखा है। कंपनी के 2,685 अधिकारियों में 1,551 यानी 57.8 प्रतिशत इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि से हैं। युवा प्रोफेशनल्स में 76 प्रतिशत कोर इंजीनियरिंग क्षेत्रों से जुड़े हैं, जबकि करीब 10 प्रतिशत नेतृत्वकारी भूमिकाओं में शामिल अधिकारी 35 वर्ष से कम उम्र के हैं।

तकनीक की रफ्तार

कंपनी के संचालन में माइनिंग में बदलाव का असर तकनीकी स्तर पर साफ दिखाई दे रहा है। युवा इंजीनियर रिमोट ब्लास्टिंग, टेली रिमोट मशीन संचालन, रियल टाइम मॉनिटरिंग, ऑटोमेटेड प्रक्रियाओं और डिजिटल कंट्रोल रूम जैसी व्यवस्थाओं के जरिए खनन तथा मेटल उत्पादन को अधिक सुरक्षित, स्मार्ट और कुशल बनाने में जुटे हैं। हिंदुस्तान जिंक के सीईओ एवं पूर्णकालिक निदेशक अमरेंदु प्रकाश के अनुसार तेजी से बदलते उद्योग में युवा इंजीनियर नई सोच और तकनीकी क्षमता के साथ जटिल चुनौतियों के समाधान खोज रहे हैं। कंपनी का लक्ष्य ऐसा वातावरण बनाना है, जहां जिज्ञासा और महत्वाकांक्षा नए प्रयोगों और नवाचार में बदल सके।

युवा प्रतिभाओं का दम

हिंदुस्तान जिंक में युवा कार्यबल को भविष्य की तकनीकी जरूरतों के लिए तैयार करने पर भी जोर दिया जा रहा है। कंपनी के 62 प्रतिशत से अधिक कर्मचारी 35 वर्ष से कम आयु के हैं और वित्त वर्ष 2025 26 में 335 कैंपस हायरिंग के जरिए नई तकनीकी प्रतिभाओं को जोड़ा गया। कंपनी के अधिकारियों के अलावा 423 से अधिक गैर अधिकारी कर्मचारी भी इंजीनियरिंग गतिविधियों से जुड़े हैं। महिला अधिकारियों की हिस्सेदारी 20.5 प्रतिशत बताई गई है, जबकि लैंगिक विविधता अनुपात 26.3 प्रतिशत है। ऐसे आंकड़े बताते हैं कि माइनिंग में बदलाव केवल तकनीक तक सीमित नहीं है, बल्कि नई पीढ़ी की भागीदारी और विविध प्रतिभाओं के बढ़ते योगदान से भी जुड़ा है।

नई सोच नई दिशा

कंपनी की एम्प्लॉयी फर्स्ट नीति भी बदलते औद्योगिक माहौल के साथ कर्मचारियों को आगे बढ़ाने पर केंद्रित है। महिलाओं को अलग अलग शिफ्टों और महत्वपूर्ण परिचालन भूमिकाओं में अवसर देने के साथ लचीले कार्य घंटे, स्पाउस हायरिंग, बच्चों की देखभाल के लिए एक वर्ष तक का अवकाश और मानसिक तथा शारीरिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने वाली नीतियां लागू हैं। कर्मचारियों को उनकी रुचि और क्षमता के अनुसार अलग व्यवसायिक कार्यों में भूमिका बदलने का अवसर भी मिलता है। कंपनी के मुताबिक ऐसी कार्यसंस्कृति युवा इंजीनियरों को केवल जिम्मेदारी निभाने तक सीमित नहीं रखती, बल्कि उन्हें नए विचारों को आजमाने और माइनिंग में बदलाव को आगे बढ़ाने की स्वतंत्रता भी देती है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। कंपनी और कर्मचारियों से जुड़े आंकड़े संबंधित स्रोतों में उपलब्ध जानकारी के आधार पर प्रस्तुत किए गए हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief