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कार्डियक अरेस्ट: पंद्रह मिनट में एंजियोप्लास्टी, मरीज को मिला जीवनदान

जोधपुर के मथुरादास माथुर अस्पताल के डॉक्टरों ने कार्डियक अरेस्ट के बाद मरीज की पंद्रह मिनट में रेस्क्यू एंजियोप्लास्टी कर नया जीवन दिया है।

By अजय त्यागी
1 min read
Advertisement002309202602.jpg advertisement13Aug2026%20copy.jpg परिजनों और डॉक्टर्स के साथ मरीज

परिजनों और डॉक्टर्स के साथ मरीज

जोधपुर, राजस्थान। चिकित्सा जगत में एक बार फिर से चमत्कारी और सराहनीय सफलता देखने को मिली है, जिससे हर कोई हैरान है। ईटीवी भारत की एक रिपोर्ट के अनुसार, जोधपुर के प्रसिद्ध मथुरादास माथुर अस्पताल के कार्डियोलॉजी विभाग ने असाधारण रेस्क्यू एंजियोप्लास्टी का एक जटिल मामला सफलता पूर्वक हल किया है। नागौर से रेफर होकर आए एक इकतालीस वर्षीय मरीज को पसलियों में फ्रैक्चर और गंभीर स्थिति के चलते अस्पताल लाया गया था, जहाँ पहुंचते ही उसे अचानक दिल का दौरा पड़ गया। इस अप्रत्याशित स्थिति से चिकित्सा कर्मियों में हड़कंप मच गया, लेकिन डॉक्टरों ने सूझबूझ से काम लिया।  [1]

गंभीर स्थिति

अस्पताल के अधीक्षक डॉ. विकास राजपुरोहित ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि मरीज की गंभीर हालत उसे सीधे कोमा की श्रेणी में धकेल रही थी और उसका ब्लड प्रेशर भी रिकॉर्ड नहीं हो पा रहा था। इको जांच में सामने आया कि दिल की कार्यक्षमता केवल दस से पंद्रह प्रतिशत ही बची थी, जिसके कारण थ्रोम्बोलिसिस इंजेक्शन देना भी जोखिम भरा था। सीसीयू में पहुंचते ही जैसे ही दिल ने काम करना बंद किया, डॉक्टरों ने तुरंत सीपीआर शुरू किया और शॉक देकर उसकी बंद हो चुकी धड़कन को बमुश्किल वापस चालू किया, हालांकि मरीज की नाजुक हालत लगातार बनी हुई थी।

तमाम मुश्किलों और चुनौतियों के बावजूद डॉक्टरों ने हार नहीं मानी और एक बेहद साहसिक फैसला लेते हुए तुरंत मरीज को वेंटिलेटर पर ही कैथ लैब शिफ्ट कर दिया। ईटीवी भारत की एक रिपोर्ट के अनुसार, जब्ती और सांस की गंभीर समस्याओं के बीच कैथ लैब में एंजियोग्राफी करने पर पता चला कि दिल की मुख्य धमनी पूरी तरह से बंद हो चुकी है। बिना एक भी पल गंवाए कार्डियोलॉजी विभाग की विशेषज्ञ टीम ने मात्र पंद्रह मिनट के भीतर ही रैपिड रेस्क्यू एंजियोप्लास्टी को अंजाम देकर बंद पड़ी उस मुख्य धमनी को सफलतापूर्वक खोल दिया।

सफल उपचार

धमनी के खुलते ही मरीज के शरीर में रक्त का संचार सुचारू होने लगा और उसकी सेहत में तेजी से सुधार दर्ज किया जाने लगा। शुरुआती चौबीस घंटों तक वेंटिलेटर और हाई-डोज दवाओं पर रखने के बाद जब मरीज को होश आया तो डॉक्टरों ने वेंटिलेटर हटा दिया और उसे सामान्य निगरानी में ले लिया। लगातार दस दिनों तक गहन चिकित्सा कक्ष में विशेष देखरेख और उपचार देने के बाद, जब मरीज पूरी तरह से स्वस्थ हो गया तब उसे अस्पताल से छुट्टी देकर सुरक्षित अपने घर भेज दिया गया।

इस अत्यंत जटिल और चुनौतीपूर्ण मेडिकल प्रक्रिया को सफल बनाने में एनेस्थीसिया विभाग के वरिष्ठ डॉक्टरों, कार्डियोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. रोहित माथुर, रेजिडेंट्स तथा पूरी समर्पित नर्सिंग टीम का अभूतपूर्व योगदान रहा। चिकित्सा अधिकारियों और प्रशासनिक प्रमुखों ने इस पूरी टीम की सराहना करते हुए इसे चिकित्सा विज्ञान की एक बड़ी उपलब्धि बताया है। इस सफल रेस्क्यू एंजियोप्लास्टी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि सही समय पर लिया गया त्वरित निर्णय किसी भी इंसान की अनमोल जान बचा सकता है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। चिकित्सा विज्ञान और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े इस मामले में समय और परिस्थितियों के अनुसार नए तथ्य सामने आ सकते हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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