डिजिटल दौर में माटी की खुशबू लेकर आया दो कृतियों का लोकार्पण समारोह
डिजिटल युग के इस दौर में दो अनमोल कृतियों के लोकार्पण से माटी की खुशबू महक उठी, जहां भावों के प्रस्फुटन ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

राजाराम स्वर्णकार की दो कृतियों का विमोचन
बीकानेर, राजस्थान। डिजिटल युग की चकाचौंध के बीच साहित्य की दुनिया से एक बेहद खूबसूरत और दिल को छू लेने वाली खबर सामने आ रही है, जहां शब्दरंग साहित्य एवं कला संस्थान के पावन तत्वावधान में कवि कथाकार राजाराम स्वर्णकार की दो चर्चित पुस्तकों का भव्य विमोचन संपन्न हुआ। नरेन्द्रसिंह ओडिटोरियम में आयोजित इस शानदार कार्यक्रम के दौरान जब रचनाकार ने अपनी चुनिंदा रचनाएं पेश कीं, तो पूरा सभागार भाव विभोर हो उठा। इस दौरान नगरभर की विभिन्न सांस्कृतिक एवं साहित्यिक संस्थाओं ने रचनाकार का गर्मजोशी से सम्मान किया, जिससे यह आयोजन शहर की सांस्कृतिक थाती में एक नया स्वर्ण अक्षर जोड़ गया और लोकार्पण समारोह की गूंज दूर-दूर तक सुनाई दी।
साहित्य की मिठास
समारोह की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ साहित्यकार एवं रंगकर्मी मधु आचार्य आशावादी ने अपने शुरुआती उद्बोधन में कहा कि राजाराम स्वर्णकार की पुस्तक उडीक पाठकों के भीतर सकारात्मक जीवन जीने का अटूट संदेश प्रसारित करती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आज के इस अति-व्यस्त और मशीनीयुग में ऐसी कृतियां समाज को भीतर से मजबूत करती हैं और इंसानियत के धरातल पर जोड़ती हैं, जिससे आमजन को वैचारिक संबल प्राप्त होता है।

इसी कड़ी में आगे अपनी बात बढ़ाते हुए अध्यक्ष महोदय ने इस बात पर जोर दिया कि साहित्य जब माटी से जुड़ता है तो वह केवल कागज के पन्ने तक सीमित नहीं रहता बल्कि समाज का आईना बन जाता है। लोकार्पण समारोह के इस पड़ाव पर उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि कृतियों की यह शैली नई पीढ़ी को अपनी वैचारिक जड़ों की ओर लौटने का मार्ग प्रशस्त करती है, जिससे साहित्यिक फलक पर एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
रचनाओं की खुशबू
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रोफेसर डॉक्टर उमाकांत गुप्त ने अपने उद्बोधन में स्पष्ट किया कि आज के इस डिजिटल युग में स्वर्णकार की रचनाओं के भीतर असली माटी की सौंधी खुशबू रसी बसी है। उनकी इन पंक्तियों और कविताओं में आंखों से बरसते पानी के जरिए भावों का ऐसा स्वाभाविक प्रस्फुटन होता है जो पढ़कर किसी भी संवेदनशील व्यक्ति का हृदय झकझोर जाता है और रचनाएं जीवंत प्रतीत होती हैं।

विशिष्ट अतिथि एवं कवि कथाकार राजेन्द्र जोशी ने इस वैचारिक संवाद को आगे बढ़ाते हुए कहा कि राजाराम स्वर्णकार की रचनाएं सीधे पाठकों के मन से आत्मीय संवाद स्थापित करती हैं। उन्होंने भाषा और बोली की शुद्धता पर बल देते हुए माना कि आज के दौर में लोकार्पण समारोह जैसे आयोजन ही हमारी भाषा की आत्मीयता को जीवित रखे हुए हैं और पाठकों को जड़ों से जोड़ते हैं।
साहित्य का अनुराग
एक अन्य विशिष्ट अतिथि डॉक्टर हरिदास हर्ष ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि रचनाकार स्वर्णकार की पुस्तकों के पन्ने-पन्ने में मातृभाषा और साहित्य के प्रति अगाध अनुराग साफ झलकता है। उन्होंने कहा कि यह अनुराग ही साहित्य को अमर बनाता है और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मार्गदर्शक की तरह दिशा प्रदान करने का काम करता है जिससे साहित्य समृद्ध होता है।

कार्यक्रम के इस महत्वपूर्ण चरण में लोकार्पित राजस्थानी कहानी संग्रह उडीक पर संजय आचार्य वरुण तथा हिंदी मुक्तक संग्रह पर जनसंपर्क उप निदेशक डॉक्टर हरिशंकर आचार्य ने विस्तृत पत्रवाचन किया। दोनों वक्ताओं ने पुस्तकों के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए रचनाकार के सृजनर्म की गहराई को रेखांकित किया और श्रोताओं के समक्ष गहरी समीक्षा प्रस्तुत की।
रचनापाठ प्रस्तुति
इस अवसर पर कवि कथाकार राजाराम स्वर्णकार ने अपना रचनाकर्म साझा करते हुए अपनी चुनिंदा रचनाएं पेश कीं जिसमें दीप बनकर कालिमा को खल रहा हूं वेदना की धूप में मैं पल रहा हूं तय करूंगा राह की दूरी क्षणों में निर्बाध साहस से धरा पर चल रहा हूं जैसी ओजस्वी पंक्तियों ने श्रोताओं का मन मोह लिया और तालियों की गड़गड़ाहट से सभागार गूंज उठा।

शब्दरंग के संयोजक अशफाक कादरी ने स्वागत भाषण प्रस्तुत करते हुए कहा कि स्वर्णकार बहुआयामी रचनाकार हैं जबकि व्यंग्यकार डॉक्टर अजय जोशी द्वारा लिखित व्यक्तित्व-कृतित्व पर डॉक्टर नासिर जैदी ने प्रकाश डाला। वंदना युवा गायक गौरीशंकर सोनी ने प्रस्तुत की और युवा चित्रकार योगेन्द्र कुमार पुरोहित ने राजाराम स्वर्णकार को उनका स्कैच भेंट किया।
सम्मान समारोह
लोकार्पण कार्यक्रम में मंच संचालक ज्योतिप्रकाश रंगा सहित अतिथियों और पत्रवाचकों का शानदार सम्मान किया गया जिससे आयोजन की गरिमा बढ़ गई। अंत में व्यंग्यकार बुलाकी शर्मा और फिल्मकार मंजूर अली चंदवानी समेत अनेक गणमान्य नागरिकों की मौजूदगी में कवयित्री मीनाक्षी स्वर्णकार ने सभी का आभार व्यक्त किया और कार्यक्रम का सफल समापन हुआ।
अस्वीकरण (Disclaimer):
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