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संयम और संकल्प की मिसाल बनकर छाया यह सुंदर पावन पर्युषण महापर्व

चेंबूर तेरापंथ समाज में प्रथम बार 10 घंटे की ज्ञानगंगा और 500 से अधिक पौषध के साथ पर्युषण महापर्व की भव्य आराधना हुई जिसने नया इतिहास रचा।

By अजय त्यागी
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Advertisement002309202602.jpg advertisement13Aug2026%20copy.jpg पर्युषण महापर्व

पर्युषण महापर्व

चेंबूर, महाराष्ट्र। चेंबूर तेरापंथ समाज में इस बार प्रथम बार अत्यंत भव्य और नव्य वातावरण में पर्युषण महापर्व की पावन आराधना संपन्न हुई है जिसने आस्था के फलक पर एक नया और अकल्पनीय कीर्तिमान स्थापित कर दिया है। ग्रांड नालंदा बैंक्वेट के दोनों सभागारों में प्रतिदिन लगातार उमड़ती श्रद्धालुओं की भारी भीड़ इस ऐतिहासिक आयोजन के प्रति आमजन के अगाध उत्साह, अटूट श्रद्धा और गहरे विश्वास की स्पष्ट द्योतक साबित हुई है। एक ही प्रांगण में करीब 10 घंटे लगातार चलने वाली ज्ञानवर्धक व्याख्यानमाला और 500 से अधिक पौषध की अनुठी साधना ने इस पूरे आयोजन को इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज करा दिया और हर भक्त का मन श्रद्धा से भावविभोर हो उठा।

खाद्यसंयम तप

पर्युषण महापर्व का आगाज पूरी तरह नए, ऊर्जावान और प्रेरणादायी अंदाज में हुआ जहां सैकड़ों भाई-बहनों ने दृढ़ता के साथ द्रव्य संयम आदि का पवित्र संकल्प अपने जीवन में उतारा। इस दौरान 90 भाई-बहनों ने अठ्ठम तप की कठिन साधना की तो करीब 51 भाई-बहन अठाई व उससे आगे के उग्र तप से जुड़कर अपनी अटूट श्रद्धा का परिचय दिया। विदुषी साध्वीश्री निर्वाणश्रीजी ने भगवान महावीर के नयसार के भव की गहन व्याख्या के साथ आध्यात्मिक यात्रा का अद्भुत निरूपण किया, जबकि साध्वी डॉ योगक्षेमप्रभा जी ने भगवान ऋषभ के पूर्वजन्मों की ऐसी मार्मिक प्रस्तुति दी जिसे सुनकर हर आंख नम हो गई और पूरा वातावरण वैचारिक गहराई से ओतप्रोत हो गया।

साध्वी लावण्यप्रभाजी ने खाद्यसंयम की महिमा का विस्तार से वर्णन किया तो साध्वी मधुरप्रभाजी ने विषय से संबद्ध भावपूर्ण गीत की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम के दौरान चेम्बूर महिला मंडल ने श्रद्धापूर्वक मंगलाचरण किया और सभाध्यक्ष लक्ष्मणजी कोठारी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए समाज के इस ऐतिहासिक प्रयास की सराहना की। साध्वीवृंद ने समवेत स्वरों में सुंदर गीत प्रस्तुत कर सभागार में आध्यात्मिक ऊर्जा का ऐसा संचार किया कि श्रोता घंटों तक मंत्रमुग्ध बैठे रहे और व्यवस्थाओं की गरिमा ने इस आयोजन को वैचारिक ऊंचाई प्रदान की तथा हर सहभागी के मन में आत्मिक शांति का भाव प्रवाहित हुआ।

स्वाध्याय ज्ञान

पर्युषण महापर्व के द्वितीय दिन स्वाध्याय की पावन प्रेरणा देते हुए विदुषी साध्वीश्री निर्वाणश्रीजी ने भगवान महावीर के पूर्व जन्मों की अत्यंत भावपूर्ण और सजीव प्रस्तुति दी। साध्वीश्री योगक्षेमप्रभाजी ने अपने अत्यंत प्रेरणादायी वक्तव्य में भगवान ऋषभ की अध्यात्म यात्रा की सूक्ष्म अवगति कराई, साध्वी कुंदनयशाजी ने स्वाध्याय दिवस पर सारगर्भित वक्तव्य रखा और साध्वी मुदितप्रभाजी ने मधुर गीत का संगान किया जिससे घाटकोपर तेममं के मंगलाचरण के साथ दिन की शुरुआत दिव्य बन गई। सामायिक दिवस पर दि. 10 सितम्बर को सामायिक पचरंगी और अभिनव सामायिक के साथ मुख्य प्रवचन में साध्वीश्री निर्वाणश्रीजी की सारगर्भित प्रस्तुति ने दिल जीत लिया और सभी को आत्ममंथन के लिए प्रेरित किया।

साध्वी योगक्षेमप्रभाजी ने भगवान शांतिनाथ चरित्र व 63 शलाका पुरुष का विवेचन किया, साध्वी मुदितप्रभाजी और कुंदनयशाजी ने सामायिक व गीत प्रस्तुत किए। पूर्व नगरसेविका संगीता हंडोरे व राज्यसभा सांसद चंद्रकांत भाई हंडोरे ने अपनी शुभकामनाएं दीं तो कूर्ला तेममं के मंगलाचरण ने इस अनुष्ठान को और अधिक पवित्र व यादगार बना दिया। वाणी संयम दिवस पर चर्चा करते हुए विदुषी साध्वीश्री निर्वाणश्रीजी ने वाणी संयम क्यों करें और कैसे करें विषय पर बेहद भावपूर्ण और व्यावहारिक प्रस्तुति दी, जिससे श्रोताओं में मधुरभाषी बनने का संकल्प स्वतः जागृत हुआ और सभा का पूरा माहौल आत्मीयता से सुवासित हो उठा।

क्षमायाचना पर्व

पर्युषण महापर्व के दौरान व्रतचेतना दिवस का शुभारंभ साकीनाका तेमम्म के मधुर संगान से हुआ जहां साध्वी लावण्यप्रभाजी का वक्तव्य और मधुरप्रभाजी का गीत हुआ। साध्वीश्री योगक्षेमप्रभाजी ने अव्रत का महासागर और व्रतों की नौका के दृष्टांत के साथ भगवान अरिष्टनेमि के पूर्वजन्मों की सरस प्रस्तुति दी। विदुषी साध्वीश्री निर्वाणश्रीजी ने भगवान महावीर के आध्यात्मिक आरोहण व बारह व्रतों के संदर्भ में ऐसा व्यापक विवेचन किया कि सभी ने अपने जीवन में व्रतों की सार्थकता को गहराई से महसूस किया। जप दिवस पर विक्रोली महिला मंडल के सुरों के साथ विधायक रामकदम और स्थानीय नेताओं ने भाव रखे, जबकि ध्यान दिवस पर विधायक तुकाराम काते की मौजूदगी और साध्वी मुदितप्रभाजी की नवग्रहगर्भित पार्श्व स्तुति ने मन मोह लिया।

सुबह 6 बजे से ही उमड़े सैलाब और आठ-प्रहरी पौषध के बीच भगवती संवत्सरी और मैत्री पर्व की रंगत निराली रही। नालंदा बैंक्वेट के दोनों तलों पर श्रोता बिना डिगे लगातार 10 घंटे तक साध्वीवृंद के सान्निध्य और ओजस्वी प्रस्तुतियों से जुड़े रहे। अंतिम दिन आबाल-वृद्ध के सामूहिक पौषध, उपवास और क्षमायाचना के दृश्यों ने भावविभोर कर दिया। लक्ष्मण कोठारी, रमेश धोका सहित विभिन्न संस्थाओं के प्रबुद्धजनों ने विचार रखे, साध्वी योगक्षेमप्रभाजी के कुशल मंच संचालन में रात्रि प्रतिक्रमण और उपक्रमों से महापर्व का समापन दिव्य ऊर्जा के साथ हुआ और समाज में प्रेम तथा भाईचारे का संदेश प्रसारित हुआ।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। प्रस्तुत धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों के संदर्भ आयोजक मंडल व प्रवचनकार संघ के विवरण पर आधारित हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief