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आठ दिवसीय पर्युषण पर्व के दौरान भक्ति और साधना का अद्भुत संगम हुआ

आठ दिवसीय पर्युषण पर्व के दौरान आयोजित विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से पूरा क्षेत्र आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत हो गया।

By अजय त्यागी
1 min read
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पर्युषण पर्व

पर्युषण पर्व

मुंबई, महाराष्ट्र। दक्षिण मुंबई स्थित महाप्रज्ञ पब्लिक स्कूल कालबादेवी में पर्युषण पर्व के आठों दिन श्रद्धा साधना संयम एवं आध्यात्मिक चेतना का विशेष वातावरण रहा। युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी की प्रबुद्ध सुशिष्या शासनश्री साध्वी श्री कंचनप्रभाजी एवं शासनश्री साध्वी श्री मंजूरेखाजी आदि ठाणा पांच के सान्निध्य में आयोजित पर्युषण पर्व में दक्षिण मुंबई सहित दादर पारेल एल्फिंस्टन तथा सायन कोलीवाड़ा क्षेत्र के बड़ी संख्या में श्रावक श्राविकाओं ने सहभागिता की। सभा प्रचार मंत्री नितेश धाकड़ एवं तेयुप उपाध्यक्ष दर्शन डागलिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस धार्मिक आयोजन ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण बना दिया है।  

धर्म और संयम

आठों दिनों में प्रतिदिन विभिन्न धार्मिक उपक्रमों के साथ खड्य संयम स्वाध्याय सामायिक वाणी संयम जप एवं अन्य आध्यात्मिक गतिविधियों का आयोजन हुआ। साध्वीवृंद के प्रतिदिन के प्रेरणादायी प्रवचनों ने उपस्थित श्रावक श्राविकाओं को आत्मचिंतन संयम त्याग एवं आध्यात्मिक जीवन की दिशा में प्रेरित किया। प्रवचनों में धर्म के साथ साथ सामाजिक जीवन में सद्भाव अनुशासन नैतिकता एवं सकारात्मक सोच को अपनाने का संदेश भी दिया गया। विभिन्न दिनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सामायिक जप एवं अन्य धार्मिक आराधनाओं में भाग लिया जिससे पूरा परिसर भक्ति और साधना का केंद्र बन गया। इस दौरान समाज के सभी वर्गों के लोगों ने बढ़-चढ़कर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और आत्मिक शांति का अनुभव किया।

आठों दिनों में प्रतिदिन विभिन्न धार्मिक उपक्रमों के साथ खड्य संयम स्वाध्याय सामायिक वाणी संयम जप एवं अन्य आध्यात्मिक गतिविधियों का आयोजन हुआ। साध्वीवृंद के प्रतिदिन के प्रेरणादायी प्रवचनों ने उपस्थित श्रावक श्राविकाओं को आत्मचिंतन संयम त्याग एवं आध्यात्मिक जीवन की दिशा में प्रेरित किया। प्रवचनों में धर्म के साथ साथ सामाजिक जीवन में सद्भाव अनुशासन नैतिकता एवं सकारात्मक सोच को अपनाने का संदेश भी दिया गया। विभिन्न दिनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सामायिक जप एवं अन्य धार्मिक आराधनाओं में भाग लिया जिससे पूरा परिसर भक्ति और साधना का केंद्र बन गया। इस दौरान समाज के सभी वर्गों के लोगों ने बढ़-चढ़कर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और आत्मिक शांति का अनुभव किया।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियां

पर्युषण पर्व के दौरान आयोजित रात्रिकालीन कार्यक्रम भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहे जिनके माध्यम से समाज को महत्वपूर्ण संदेश मिले। धार्मिक एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए नई पीढ़ी को संस्कार सेवा सद्भाव और सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ने का सार्थक प्रयास किया गया। इन कार्यक्रमों में समाजजनों की उत्साहपूर्ण सहभागिता देखने को मिली जिससे सभी को एकता का संदेश मिला। इस प्रकार यह पर्युषण पर्व सभी आयु वर्ग के लोगों को अपनी समृद्ध संस्कृति और नैतिक मूल्यों से जोड़ते हुए सफलतापूर्वक संपन्न हुआ और इसने सभी के दिलों पर अमिट छाप छोड़ी।

पर्युषण पर्व के दौरान आयोजित रात्रिकालीन कार्यक्रम भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहे जिनके माध्यम से समाज को महत्वपूर्ण संदेश मिले। धार्मिक एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए नई पीढ़ी को संस्कार सेवा सद्भाव और सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ने का सार्थक प्रयास किया गया। इन कार्यक्रमों में समाजजनों की उत्साहपूर्ण सहभागिता देखने को मिली जिससे सभी को एकता का संदेश मिला। इस प्रकार यह पर्युषण पर्व सभी आयु वर्ग के लोगों को अपनी समृद्ध संस्कृति और नैतिक मूल्यों से जोड़ते हुए सफलतापूर्वक संपन्न हुआ और इसने सभी के दिलों पर अमिट छाप छोड़ी।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। धार्मिक आयोजनों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से जुड़े तथ्य सभा के प्रतिनिधियों द्वारा प्रदान किए गए विवरण के अनुरूप हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief