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अस्पताल की लापरवाही: डॉक्टर के स्थान पर उसके ड्राइवर ने देखे मरीज 

अस्पताल की लापरवाही: सरकारी अस्पताल के भीतर डॉक्टर की अनुपस्थिति में उनके ड्राइवर द्वारा मरीजों को देखने और दवा लिखने का मामला सामने आया है।

By अजय त्यागी
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मरीजों को देखता और दावा लिखता ड्राइवर

मरीजों को देखता और दावा लिखता ड्राइवर

कानपुर, उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश के कानपुर स्थित कांशीराम संयुक्त चिकित्सालय एवं ट्रामा सेंटर से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ डॉक्टर के अदालत की सुनवाई में जाने के बाद उनके ड्राइवर ने ओपीडी रूम में बैठकर मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण किया और उन्हें दवाइयां लिखकर दीं। यह गंभीर वाकया तब उजागर हुआ जब इसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसमें कथित तौर पर ड्राइवर मरीजों की समस्याएं सुनते हुए और पर्चे पर दवा लिखते हुए साफ नजर आ रहा है। अस्पताल प्रशासन ने इस घटना को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए त्वरित एक्शन लिया है और आरोपित डॉक्टर से स्पष्टीकरण तलब किया है।   [वायरल विडियो]     [1]

अस्पताल की लापरवाही

सामने आए वीडियो फुटेज के अनुसार आपातकालीन चिकित्सा अधिकारी के कक्ष में उनका ड्राइवर मरीजों से उनकी बीमारी के बारे में पूछताछ कर रहा था और उन्हें बाहर से दवाइयां खरीदने की सलाह दे रहा था। इस प्रकार की गैर-जिम्मेदार हरकत से यह स्पष्ट होता है कि अस्पताल परिसर के भीतर सुरक्षा और प्रशासनिक नियंत्रण के नियमों की कितनी गंभीर अनदेखी की जा रही थी। मरीजों की जिंदगी और उनके स्वास्थ्य के साथ इस तरह का खिलवाड़ देखकर आम जनता और स्थानीय नागरिकों में भारी रोष व्याप्त है। स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इस पूरी घटना का संज्ञान लेते हुए इसे चिकित्सा पेशे की गरिमा और नियमों के पूरी तरह खिलाफ बताया है।

घटना के तूल पकड़ने के बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी हरिदत्त नेमी ने इस पूरे मामले की विस्तृत और निष्पक्ष जाँच के लिए तीन सदस्यीय एक उच्चस्तरीय समिति का गठन कर दिया है। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक पीयूष मिश्रा की अध्यक्षता वाली यह जाँच कमेटी इस बात की बारीकी से पड़ताल करेगी कि आखिर किस परिस्थिति में और किसकी अनुमति से एक बाहरी व्यक्ति ओपीडी के अंदर बैठकर मरीजों का इलाज कर रहा था। समिति को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वह तीन दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपे, जिसके आधार पर आगे की कठोर कानूनी और विभागीय कार्रवाई तय की जाएगी।

प्रशासनिक कार्रवाई

प्रशासनिक स्तर पर त्वरित कदम उठाते हुए संबंधित डॉक्टर के ड्राइवर को अस्पताल से हटा दिया गया है और उसके खिलाफ स्थानीय थाने में लिखित शिकायत भी दर्ज करा दी गई है। अधिकारियों का यह कहना है कि यदि डॉक्टर की ओर से इसका कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इस तरह के मामलों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा अस्पताल में सुरक्षा और प्रवेश नियंत्रण प्रणालियों को और अधिक मजबूत बनाने पर विचार किया जा रहा है।

अस्पताल की लापरवाही से जुडी इस पूरी घटना ने देश भर के सरकारी अस्पतालों में चिकित्सा व्यवस्था और डॉक्टरों की जवाबदेही को लेकर एक बार फिर बड़े और गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आम नागरिकों और मरीजों का कहना है कि यदि सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर इस तरह की लापरवाही बरती जाएगी तो आम गरीब जनता का स्वास्थ्य तंत्र से पूरी तरह भरोसा उठ जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के मामलों में लिप्त दोषियों के खिलाफ मिसाली कार्रवाई होना बेहद आवश्यक है ताकि भविष्य में कोई भी अस्पताल प्रशासन इस तरह की अमानवीय और गैर-कानूनी लापरवाही दोहराने का साहस न कर सके।

अस्वीकरण (Disclaimer)

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। इस रिपोर्ट में दी गई अस्पताल की लापरवाही और प्रशासनिक कार्रवाइयों के विवरण को पाठकों की सामान्य जानकारी के लिए प्रस्तुत किया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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