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NGT का आदेश: यमुना में गणपति विसर्जन पर रोक, मची हलचल

राष्ट्रीय हरित अधिकरण के आदेश के बाद गणपति विसर्जन पर नया अपडेट सामने आया है जिससे शहर में चर्चा तेज है। अब सीधे नदी में मूर्तियां प्रवाहित नहीं की जाएंगी।

By अजय त्यागी
1 min read
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गणपति विसर्जन - फाइल फोटो

गणपति विसर्जन - फाइल फोटो

आगरा, उत्तर प्रदेश। राष्ट्रीय हरित अधिकरण के कड़े निर्देशों के बाद इस बार गणेशोत्सव के दौरान बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। शहर में धार्मिक परंपराओं का निर्वहन करते हुए प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि गणपति विसर्जन पर नया अपडेट के तहत अब सीधे नदी में मूर्तियां प्रवाहित नहीं की जाएंगी।पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है ताकि नदी के बढ़ते प्रदूषण को रोका जा सके और जल स्रोतों को सुरक्षित रखा जा सके।  [1]

पर्यावरण और जलीय सुरक्षा

प्लास्टर ऑफ पेरिस और हानिकारक रंगों से बनी मूर्तियों के कारण नदी का पानी लगातार दूषित हो रहा है। इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। पर्यावरणविदों का मानना है कि रासायनिक तत्वों के पानी में घुलने से जलीय जीवों की जान को बड़ा खतरा पैदा हो जाता है। इसी वजह से प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे नियमों का पालन करें और प्रकृति को बचाने के इस अभियान में अपनी पूरी जिम्मेदारी निभाएं।

गणपति विसर्जन पर नया अपडेट के तहत नगर निगम ने शहर के प्रमुख घाटों पर विशेष और वैकल्पिक व्यवस्थाएं पूरी कर ली हैं। हाथीघाट, कैलाश घाट, बल्केश्वर और दशहरा घाट पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। इन सभी स्थानों पर प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष रूप से कृत्रिम कुंड तैयार कराए हैं। इन सभी कुंडों को पवित्र गंगाजल से भरा गया है ताकि किसी भी भक्त की धार्मिक आस्था और भावनाओं को ठेस न पहुंचे और परंपराएं भी सुरक्षित रहें।

घाटों पर विशेष तैयारी

घाटों पर उमड़ने वाली भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस और निगम कर्मचारियों की तैनाती कर दी गई है। गणपति विसर्जन पर नया अपडेट के अनुसार सभी प्रमुख मार्गों और घाट परिसरों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। अधिकारियों ने खुद मौके पर पहुंचकर तैयारियों का जायजा लिया है और साफ-सफाई की व्यवस्था को पूरी तरह दुरुस्त कराया है। श्रद्धालुओं से यह लगातार आग्रह किया जा रहा है कि वे तयशुदा कुंडों का ही इस्तेमाल करें और प्रशासन के नियमों का पूरा सहयोग करें।

यह पावन अवसर हमें यह सिखाता है कि उत्सव मनाने के साथ पर्यावरण की रक्षा करना भी हमारा मुख्य कर्तव्य है। गणपति विसर्जन पर नया अपडेट यही संदेश देता है कि हमें अपनी संस्कृति को बचाए रखते हुए प्राकृतिक संसाधनों को दूषित होने से बचाना चाहिए। यदि हम सब मिलकर इन नियमों का पालन करेंगे तो हमारी आने वाली पीढ़ियों को भी स्वच्छ और निर्मल जल मिल सकेगा। आइए इस गणेशोत्सव पर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लें और प्रशासन के साथ मिलकर इस बड़े पर्व को बेहद सुरक्षित तरीके से संपन्न बनाएं।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। इस रिपोर्ट का उद्देश्य एनजीटी के नियमों और गणपति विसर्जन से जुड़ी ताजा जानकारियों को पाठकों तक पहुँचाना है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief