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तेरापंथ युवक परिषद की प्रेरणा से दिवंगत धनराज बैद का नेत्रदान 

परोपकार की मिसाल पेश करते हुए नोखा में दिवंगत धनराज जी बैद के परिजनों की सहमति से मरणोपरांत नेत्रदान का प्रेरक कार्य संपन्न हुआ है।

By अजय त्यागी
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दिवंगत धनराज बैद का नेत्रदान 

दिवंगत धनराज बैद का नेत्रदान 

नोखा, राजस्थान। समाज में मानवीय सेवा और परोपकार की मिसाल पेश करते हुए नोखा में एक अत्यंत प्रेरणादायक घटना सामने आई है। अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद की शाखा तेरापंथ युवक परिषद, नोखा के सहयोग से दिवंगत धनराज जी बैद का मरणोपरांत नेत्रदान कराया गया। यह महान कार्य उनकी पत्नी विजया लक्ष्मी बैद, भाई मेघराज जी बैद और अन्य पारिवारिक जनों की पूर्ण सहमति से आई बैंक सोसाइटी ऑफ राजस्थान, बीकानेर के माध्यम से सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस नेक कदम से समाज में अंगदान के प्रति जागरूकता का संदेश गया है तथा परिजनों के इस त्याग की हर तरफ सराहना हो रही है।

श्रद्धांजलि सभा

तेरापंथ युवक परिषद, नोखा के अध्यक्ष गजेंद्र पारख ने स्व. धनराज जी बैद के प्रति अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शोकाकुल परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पारिवारिक जनों ने इस कठिन समय में भी आगे आकर नेत्रदान महादान जैसे पुण्य कार्य में पूरा सहयोग प्रदान किया है, जो एक उच्च मानवीय सेवा का महनीय कार्य है। अभातेयुप द्वारा पूरे भारत और नेपाल में अपनी तीन सौ पिचहत्तर शाखा परिषदों के सहयोग से अब तक तीन हजार से भी ज्यादा लोगों का मृत्युपरांत नेत्रदान करवाया जा चुका है। यह राष्ट्रव्यापी अभियान लगातार लोगों को अंधकार से बाहर निकालने और जरूरतमंदों के जीवन में रोशनी लाने का एक बहुत बड़ा जरिया बन चुका है।

जागरूकता अभियान

तेयुप नोखा के मंत्री अरिहन्त सुखलेचा ने इस अभियान में शाखा परिषद की सक्रिय जागरूकता और नेत्रदाता के परिवारजन की उत्कृष्ट भावना के प्रति साधुवाद प्रकट किया। उन्होंने आम जनता से अपील की कि वे अभातेयुप के इस पवित्र नेत्रदान महादान अभियान में अधिक से अधिक संख्या में आगे आकर सहयोग करें। तेयुप नोखा के नेत्रदान संयोजक निर्मल चौपड़ा ने नेत्रदान से जुड़ी कई प्रकार की भ्रांतियों का विस्तार से समाधान किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि नेत्रदान प्रक्रिया के दौरान व्यक्ति की पूरी आंखें नहीं निकाली जाती हैं, बल्कि केवल उसके अन्दर की एक हल्की सी पतली परत निकाली जाती है, जो शरीर के किसी भी बाहरी ढांचे को बिल्कुल भी प्रभावित नहीं करती है।

प्रेरणादायक पहल

संयोजक निर्मल चौपड़ा ने यह भी जानकारी दी कि मरणोपरांत परिवारजनों की आपसी सहमति से नेत्रदान किसी भी आयु के व्यक्ति का आसानी से हो सकता है। विदित हो कि चिकित्सा विज्ञान के अनुसार एक व्यक्ति के नेत्रदान करने से दो अंधकारमय जीवन हमेशा के लिए रोशन हो जाते हैं। इस प्रकार की पहल से समाज के अन्य लोगों को भी प्रेरणा मिलती है कि वे मृत्यु के बाद अपने अंगों को दान करके किसी जरूरतमंद की जिंदगी संवार सकते हैं। नोखा में हुई इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि जागरूकता और संवेदना के बल पर समाज में बड़े सकारात्मक बदलाव लाए जा सकते हैं।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। नेत्रदान महादान और सामाजिक अभियानों से जुड़ी यह जानकारी सामान्य जनहित और जागरूकता के लिए है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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