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कुल 309 शहरी निकायों का लेखा जोखा, कहाँ, किसे मिला मौका?

राजनीतिक वर्चस्व की सबसे बड़ी जंग यानी राजस्थान के कुल 309 शहरी निकायों का लेखा जोखा सामने आ चुका है जिसमें राजनीतिक दलों की स्थिति स्पष्ट हो गई है।

By अजय त्यागी
1 min read
Advertisement002309202602.jpg advertisement13Aug2026%20copy.jpg प्रतीकात्मक फोटो

प्रतीकात्मक फोटो

जयपुर, राजस्थान। राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद स्थानीय स्तर पर राजनीतिक वर्चस्व की सबसे बड़ी जंग यानी नगरीय निकाय चुनाव 2026 की तस्वीर अब पूरी तरह साफ हो चुकी है। राज्य के कुल 309 शहरी निकायों का लेखा जोखा, जिनमें 10 नगर निगम, 47 नगर परिषद और 252 नगर पालिकाएं शामिल हैं, के वार्डों में पार्षदों के चुनाव के बाद मेयर, सभापति और अध्यक्ष पदों के चुनाव संपन्न हो गए हैं। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने इस चुनाव में अपनी शहरी पकड़ को मजबूत करते हुए अधिकांश निकायों में शानदार जीत हासिल की है, वहीं कांग्रेस और निर्दलीय उम्मीदवारों ने कई जगहों पर बड़ा उलटफेर किया है।  [1]  

दलीय स्थिति और वार्ड

राजस्थान के सभी निकायों का लेखा जोखा देखा जाए तो राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी सभी वार्डों के परिणामों में प्रमुख राजनीतिक दलों की स्थिति बेहद दिलचस्प रही है। आंकड़ों के अनुसार भारतीय जनता पार्टी ने 4,179 वार्डों में जीत दर्ज करते हुए राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनने का गौरव हासिल किया है। दूसरी तरफ इंडियन नेशनल कांग्रेस ने 3,613 वार्डों पर जीत दर्ज करते हुए अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखी और दूसरे स्थान पर कब्जा जमाया। इसके अलावा निर्दलीय एवं अन्य उम्मीदवारों ने 2,273 सीटों पर शानदार जीत का परचम लहराकर मुख्य दलों के समीकरणों को पूरी तरह से बिगाड़ दिया जिससे स्थानीय राजनीति में नए समीकरण उभरे हैं।

नगर निगम मेयर चुनाव

राज्य के प्रमुख 10 नगर निगमों में से 7 के परिणाम घोषित हो चुके हैं जबकि तकनीकी कारणों से कुछ निगमों के चुनाव बाद के लिए तय किए गए हैं। अजमेर नगर निगम में कांग्रेस के पास अधिक पार्षद होने के बावजूद राजनीतिक प्रबंधन के बल पर भाजपा की अनामिका शर्मा मेयर चुनी गईं। पाली नगर निगम में कड़े त्रिकोणीय मुकाबले के बीच भाजपा की नमिता बुबकिया ने मेयर पद पर जीत हासिल कर अपना बोर्ड बनाया है। बीकानेर नगर निगम में कांग्रेस पार्टी के लिए बड़ी राहत आई जहाँ अनिल कल्ला स्पष्ट बहुमत के साथ नए मेयर निर्वाचित हुए हैं। भीलवाड़ा में भाजपा को प्रचंड बहुमत मिला और जसवंत कंवर निर्विरोध मेयर चुनी गईं जबकि भरतपुर और अलवर में भी भाजपा समर्थित बोर्ड का गठन हुआ है।

नगर परिषद और चेयरमैन

प्रदेश के सभी 47 नगर परिषदों में चेयरमैन और सभापति पद के लिए दिनभर जबरदस्त राजनीतिक खींचतान और रणनीतिक खेल देखने को मिला है। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के गढ़ झालावाड़ नगर परिषद में बड़ा उलटफेर हुआ जहाँ कांग्रेस ने बड़ी जीत दर्ज करते हुए अपना सभापति बनाया है। अलवर जिले की भिवाड़ी नगर परिषद में भाजपा की डॉ. गुंजन खटाना निर्विरोध सभापति चुनी गईं जबकि राजगढ़ में निर्दलीयों ने इतिहास रचते हुए अपना स्वतंत्र बोर्ड बना लिया है। सीकर जिले के लक्ष्मणगढ़ और लोसल में कांग्रेस ने अपना बोर्ड बनाया जबकि झुंझुनूं के डूंडलोद में केवल 2 पार्षदों वाली भाजपा ने निर्दलीयों को साधकर अध्यक्ष पद हासिल किया। डूंगरपुर में भाजपा ने लगातार आठवीं बार बोर्ड बनाया है।

नगरपालिका अध्यक्ष पद

राज्य की 252 नगरपालिकाओं में स्थानीय क्षत्रपों, विधायकों और निर्दलीयों का खासा बोलबाला रहा जहाँ 32 निकायों में अध्यक्ष पहले ही निर्विरोध चुने जा चुके थे। बालोतरा जिले ने इस चुनाव में सबसे अनोखा रिकॉर्ड बनाते हुए अपनी सभी 7 नगरपालिकाओं में भाजपा के पूर्ण बहुमत वाले अध्यक्षों को स्थापित किया है। टोंक जिले की मालपुरा, टोडा रायसिंह, डिग्गी और लांबा हरसिंह जैसी पालिकाओं में भाजपा ने पूर्ण बोर्ड गठित किया है। धार्मिक नगरी पुष्कर में भाजपा के राजेंद्र बाकोलिया निर्विरोध अध्यक्ष चुने गए जबकि केकड़ी नगरपालिका में कांग्रेस ने 20 सीटें जीतकर अपना बोर्ड बनाया। धौलपुर में निर्दलीय प्रत्याशी गिरीश गर्ग ने बाजी मारी और डीग तथा तिंवरी में भी भाजपा ने अपनी मजबूत पकड़ का पूरा प्रदर्शन किया है।

चुनावी रुझान और निष्कर्ष

सत्तारूढ़ दल को शहरी वोटर्स का भरपूर साथ मिला है जिससे यह साबित होता है कि विधानसभा चुनाव के बाद भी मतदाताओं का विश्वास बना हुआ है। राजस्थान के कुल 53 जिलों के निकायों का लेखा जोखा यह बताता है कि भाजपा राज्य के लगभग 65 प्रतिशत से अधिक निकायों में अपना बोर्ड बनाने में पूरी तरह कामयाब रही है। दूसरी तरफ 2,200 से अधिक वार्डों में निर्दलीयों की जीत यह दर्शाती है कि स्थानीय चुनावों में पार्टी के चुनाव चिह्न से ज्यादा उम्मीदवार की व्यक्तिगत छवि मायने रखती है। अजमेर और पाली जैसे बड़े निगमों में निर्दलीयों और क्रॉस वोटिंग ने पूरी बाजी ही पलट दी जिससे राजनीतिक विश्लेषक भी हैरान रह गए हैं और चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं।

बाड़ेबंदी और राजनीति

पार्षदों को टूटने से बचाने और अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने के लिए विभिन्न दलों द्वारा होटलों और रिसॉर्ट्स में की गई बाड़ेबंदी इस बार भी मुख्य चर्चा का विषय रही। मतदान से ठीक पहले पार्षदों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की होड़ मची रही ताकि विपक्षी दल किसी भी प्रकार की सेंधमारी न कर सकें। अजमेर में कांग्रेस पार्षदों द्वारा की गई क्रॉस वोटिंग ने यह दिखा दिया कि लाख बंदिशों के बावजूद अंदरूनी असंतोष को रोक पाना किसी भी दल के लिए आसान नहीं होता है। राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेताओं ने इन चुनावों में अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी ताकि आने वाले समय में स्थानीय निकायों पर अपना मजबूत राजनीतिक नियंत्रण स्थापित किया जा सके।

भविष्य की राजनीतिक दिशा

इन निकायों का लेखा जोखा सामने आने से राज्य की आगामी राजनीति के लिए एक नया और स्पष्ट संदेश मिला है जिससे सभी दलों को अपनी रणनीति पर काम करना होगा। शहरी क्षेत्रों में भाजपा की यह पैठ पार्टी कार्यकर्ताओं में नया जोश भर रही है वहीं कांग्रेस के लिए यह आत्ममंथन का एक बड़ा अवसर साबित हो रहा है। नवनिर्वाचित मेयर, सभापति और अध्यक्षों के सामने अब शहर के विकास कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी आ गई है। जनता को उम्मीद है कि नए बोर्ड के गठन के बाद उनके वार्डों और शहरों में रुकी हुई विकास योजनाओं को गति मिलेगी और बुनियादी समस्याओं का त्वरित समाधान हो सकेगा जिससे नागरिकों का जीवन आसान बनेगा।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। राजस्थान के कुल 53 जिलों के निकायों का लेखा जोखा और राजनीतिक गतिविधियों से जुड़ी जानकारी पाठकों की जागरूकता के लिए दी गई है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief