युवाओं के भारी उत्साह के बीच दक्षिण मुंबई में रक्तदान शिविर आयोजित
दक्षिण मुंबई की एचएसएनसी यूनिवर्सिटी में रक्तदान कर्तव्यम् अभियान के तहत आयोजित रक्तदान शिविर में विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
विद्यार्थियों एवं एनएसएस यूनिट का मिला सराहनीय सहयोग
मुंबई, महाराष्ट्र। अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद के निर्देशन में देश भर में चलाए जा रहे सामाजिक सरोकारों के अभियानों के तहत युवाओं में सेवा भाव लगातार देखने को मिल रहा है। इसी कड़ी में एमबीडीटी रक्तदान कर्तव्यम् अभियान के अंतर्गत तेरापंथ युवक परिषद दक्षिण मुंबई द्वारा आज एचएसएनसी यूनिवर्सिटी में एक भव्य रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया है। इस शिविर को विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों और युवाओं का बेहद उत्साहपूर्ण समर्थन मिला तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। विद्यार्थियों ने रक्तदान के प्रति गहरी जागरूकता दिखाते हुए इस महान कार्य में बढ़-चढ़कर अपनी सहभागिता सुनिश्चित की जिससे समाज में एक सकारात्मक संदेश गया है। इस प्रकार के आयोजनों से जरूरतमंद लोगों के लिए रक्त की कमी को पूरा करने में बहुत बड़ी सहायता मिलती है।
सक्रिय सहयोग
इस महत्वपूर्ण आयोजन को पूरी तरह सफल बनाने में एचएसएनसी यूनिवर्सिटी की एनएसएस यूनिट ने भी बहुत ही सक्रिय और महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया है। राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों ने परिसर के अन्य विद्यार्थियों को रक्तदान के लिए प्रेरित करने के साथ-साथ शिविर की सभी व्यवस्थाओं को भी सुचारू रूप से संभाला। विद्यार्थियों का यह जोश और अनुशासन देखकर वहां मौजूद सभी लोग काफी प्रभावित हुए तथा आयोजकों ने युवाओं की इस पहल की भूरी-भूरी प्रशंसा की। एनएसएस के इन स्वयंसेवकों ने आपसी तालमेल के साथ काम करते हुए यह साबित कर दिया कि युवा पीढ़ी देश के सामाजिक और मानवीय कार्यों में सबसे आगे रहने के लिए पूरी तरह तैयार है। ऐसे सहयोगात्मक प्रयासों से ही किसी भी बड़े सामाजिक अभियान को जमीन पर सफलतापूर्वक उतारा जा सकता है।
चिकित्सकीय सेवाएं
इस रक्तदान शिविर के दौरान रक्त संग्रहण और अन्य सभी आवश्यक चिकित्सकीय सेवाओं की जिम्मेदारी जसलोक हॉस्पिटल ब्लड बैंक की विशेषज्ञ टीम द्वारा संभाली गई। अस्पताल की प्रशिक्षित चिकित्सा टीम ने पूरी सावधानी और सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए रक्तदाताओं से सुरक्षित तरीके से रक्त का संग्रहण किया। रक्तदान शिविर में भाग लेने वाले युवाओं की सक्रिय भागीदारी ने यह स्पष्ट रूप से दर्शा दिया कि आज की युवा पीढ़ी सेवा, सामाजिक जिम्मेदारी और मानवता के प्रति कितना अधिक समर्पण रखती है। रक्त संग्रहण के दौरान हर एक बात का विशेष ध्यान रखा गया ताकि दानदाताओं को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। चिकित्सीय टीम ने भी युवाओं के इस जज्बे की सराहना की और उन्हें इस नेक काम के लिए धन्यवाद दिया।
विशेष आभार
कार्यक्रम के समापन पर तेरापंथ युवक परिषद दक्षिण मुंबई के पदाधिकारियों ने एचएसएनसी यूनिवर्सिटी प्रशासन, एनएसएस यूनिट, जसलोक हॉस्पिटल ब्लड बैंक तथा सभी रक्तदाताओं का हृदय से आभार व्यक्त किया। परिषद के प्रतिनिधियों ने कहा कि इस तरह के आयोजनों के माध्यम से न केवल युवाओं को रक्तदान के प्रति जागरूक करने का बड़ा अवसर मिलता है बल्कि गंभीर बीमारियों से जूझ रहे जरूरतमंद मरीजों के लिए समय पर रक्त उपलब्ध कराने में भी अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान मिलता है। उन्होंने सभी से अपील की कि वे भविष्य में भी ऐसे मानवीय अभियानों से जुड़े रहें ताकि समाज के कल्याण के लिए निरंतर कार्य किए जा सके। इस सफल आयोजन ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि सामूहिक प्रयासों से बड़े से बड़े सामाजिक लक्ष्यों को आसानी से हासिल किया जा सकता है।
प्रेरणास्त्रोत
इस प्रकार के रक्तदान शिविर आज के समय में समाज के लिए एक बहुत बड़ी प्रेरणास्त्रोत साबित हो रहे हैं जिनसे आम जनता में भी रक्तदान को लेकर फैली भ्रांतियां दूर हो रही हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का हमेशा से यही मानना रहा है कि स्वेच्छा से किया गया रक्तदान किसी भी इंसान की अनमोल जान बचाने में सबसे बड़ा योगदान होता है। युवाओं द्वारा दिखाई गई इस प्रकार की संवेदनशीलता यह बयां करती है कि आने वाला कल सामाजिक सरोकारों के मामले में और अधिक मजबूत और जागरूक होने वाला है। स्थानीय नागरिकों और गणमान्य लोगों ने भी इस आयोजन की मुक्तकंठ से प्रशंसा की है और आयोजकों से उम्मीद जताई है कि वे आगे भी इस तरह के सेवा कार्यों को निरंतर जारी रखेंगे।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। स्वास्थ्य और रक्तदान से जुड़े आयोजनों में सभी चिकित्सकीय नियमों और मानकों का कड़ाई से पालन होना अनिवार्य है तथा किसी भी प्रकार की आधिकारिक पुष्टि के पश्चात ही ऐसे कार्यक्रमों को अंतिम रूप दिया जाता है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।