WA Join our WhatsApp Group
Advertisement Advertisement
View in Newspaper Form

एमजीएसयू में राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लेकर हुआ विशेष आयोजन

महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति एवं भारतीय ज्ञान परम्परा विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया।

By अजय त्यागी
1 min read
Advertisement002309202602.jpg advertisement13Aug2026%20copy.jpg MGSU में विशेष कार्यक्रम का आयोजन

MGSU में विशेष कार्यक्रम का आयोजन

बीकानेर, राजस्थान। महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ के तत्वावधान में मंगलवार को विद्या परिषद सभागार में राष्ट्रीय शिक्षा नीति एवं भारतीय ज्ञान परम्परा विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय अजमेर के कुलगुरु प्रो. एस. के. अग्रवाल रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. अखिल रंजन गर्ग ने की। इस अकादमिक आयोजन का मुख्य उद्देश्य नई शिक्षा नीति के प्रावधानों और भारतीय संस्कृति के मूल्यों को छात्रों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना था।

मुख्य वक्ता

मुख्य वक्ता प्रो. एस. के. अग्रवाल ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के विभिन्न महत्वपूर्ण आयामों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए समकालीन शिक्षा व्यवस्था में भारतीय ज्ञान परम्परा की प्रासंगिकता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि हमारी प्राचीन ज्ञान परम्परा शिक्षा को केवल ज्ञानार्जन तक सीमित न रखते हुए मूल्यबोध, संस्कार, नैतिकता और समग्र व्यक्तित्व विकास से जोड़ती है। उन्होंने उपस्थित विद्यार्थियों तथा शिक्षकों से आह्वान किया कि वे भारतीय ज्ञान-विरासत को गहराई से समझें और उसे वर्तमान अकादमिक संदर्भों से जोड़कर आगे बढ़ाएं।

पीढ़ी और संस्कृति

विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. अखिल रंजन गर्ग ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि जेन-जी पीढ़ी को भारतीय ज्ञान परम्परा से परिचित कराना आज के समय की एक बेहद महत्वपूर्ण आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यह परंपरा युवाओं को उनकी सांस्कृतिक एवं बौद्धिक विरासत से जोड़ने के साथ-साथ जीवन-मूल्यों, सामाजिक जिम्मेदारी और समग्र दृष्टिकोण के विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। विश्वविद्यालय स्तर पर ऐसे आयोजनों से युवाओं में अपनी संस्कृति के प्रति सकारात्मक और प्रगतिशील दृष्टिकोण विकसित होता है।

पाठ्यक्रम और पहल

कार्यक्रम के संयोजक एवं आईक्यूएसी निदेशक डॉ. धर्मेश हरवानी ने बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा भारतीय ज्ञान परम्परा को विभिन्न पाठ्यक्रमों में शामिल किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि यह अनूठी पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की मूल भावना के पूरी तरह अनुरूप है जो विद्यार्थियों को उनकी समृद्ध विरासत से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इस दौरान विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक, विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, संकाय सदस्य, अधिकारी तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

अतिथियों की उपस्थिति

कार्यक्रम के दौरान डूंगर कॉलेज के प्रोफेसर दिग्विजय सिंह, एम.एस. कॉलेज के प्रोफेसर असीत गोस्वामी और बीकानेर अभिलेखागार के निदेशक डॉ. नितिन गोयल सहित शहर के कई गणमान्य शिक्षाविद उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में विश्वविद्यालय के कुलसचिव यशपाल आहूजा ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए मुख्य वक्ता, कुलगुरु और सभी आगंतुक अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस सफल आयोजन से शैक्षणिक वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय में आयोजित व्याख्यान कार्यक्रम से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना और शैक्षणिक जागरूकता के उद्देश्य से किया गया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति और पाठ्यक्रमों से जुड़े मामलों में विश्वविद्यालय के आधिकारिक दिशा-निर्देश सर्वमान्य होते हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

Rex TV Verification Metrics
Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief