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ऊँटनी के दूध पर हुए नए शोध पर पेटेंट हासिल करने में मिली कामयाबी

बीकानेर, राजस्थान के पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय के वैज्ञानिकों ने ऊँटनी के दूध पर किए गए शोध पर पेटेंट हासिल किया है।

By अजय त्यागी
1 min read
Advertisement002309202602.jpg advertisement13Aug2026%20copy.jpg प्रतीकात्मक फोटो

प्रतीकात्मक फोटो

बीकानेर, राजस्थान। पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय, बीकानेर के वैज्ञानिकों ने ऊँटनी के दूध पर किए गए एक बेहद महत्वपूर्ण अनुसंधान के लिए भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय से शोध पर पेटेंट आधिकारिक तौर पर प्राप्त कर लिया है। शोधकर्ताओं डॉ अनीता तंवर, डॉ आर के बेरवाल, डॉ योगेश कुमार और डॉ अनिल हर्ष की टीम को दुग्ध में मौजूद प्रोटीन हाइड्रोलायटेट के कार्यात्मक गुणों और इसकी जैवसक्रिय क्षमता को बढ़ाने वाली एक विशेष तकनीक विकसित करने के लिए यह सफलता मिली है। इस गौरवमयी उपलब्धि से संस्थान और पूरे क्षेत्र का नाम रोशन हुआ है।

अनुसंधान और सफलता

वैज्ञानिकों की इस समर्पित टीम ने अपने शोध के माध्यम से ऊँटनी के दुग्ध के औषधीय और पोषण संबंधी लाभों को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित किया है। प्रोटीन हाइड्रोलायटेट के कार्यात्मक गुणों को उन्नत करने वाली यह नई तकनीक स्वास्थ्य और डेयरी उद्योग के क्षेत्र में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकती है। इस प्रकार के अनुसंधान से न केवल पारंपरिक पशुपालन को बढ़ावा मिलता है, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सुदृढ़ करने में मदद मिलती है। इस अनोखी खोज को आधिकारिक रूप से मान्यता मिलने के बाद देश भर के शोधकर्ताओं में उत्साह का माहौल है।

कुलगुरु की बधाई

शोध पर पेटेंट की इस गौरवशाली उपलब्धि पर वेटरनरी विश्वविद्यालय, बीकानेर के कुलगुरु डॉ सुमंत व्यास ने पूरी वैज्ञानिक टीम को हार्दिक बधाई दी है। कुलगुरु ने अपने संबोधन में कहा कि यह अनुसंधान न केवल संस्थान के लिए गर्व की बात है, बल्कि भविष्य में दुग्ध की उपयोगिता को बढ़ाने में भी अत्यधिक सहायक होगा। उन्होंने विश्वविद्यालय के अन्य शोधार्थियों को भी ऐसे नवाचार करने के लिए प्रेरित किया ताकि समाज और देश के कल्याण के लिए नए तकनीकी आयाम स्थापित किए जा सके और शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य हो सके।

भविष्य की उपयोगिता

इस पेटेंट के मिलने के बाद अब डेयरी उत्पादों के व्यावसायिक और चिकित्सीय उपयोग की संभावनाएं और अधिक मजबूत हो गई हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस तकनीक के माध्यम से दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार किया जा सकेगा, जिससे आम नागरिकों को भी इसका सीधा लाभ मिलेगा। आने वाले समय में विश्वविद्यालय इस दिशा में और भी कई शोध कार्य करने की योजना बना रहा है, जिससे डेयरी विज्ञान के क्षेत्र में भारत की स्थिति वैश्विक स्तर पर और अधिक मजबूत हो सकेगी तथा लोगों को इस नए शोध पर पेटेंट का व्यापक लाभ मिल सकेगा।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। वैज्ञानिक अनुसंधान और पेटेंट से जुड़े आधिकारिक तथ्यों की पुष्टि के लिए पाठकों को संबंधित स्रोतों की जानकारी लेनी चाहिए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief