दस साल बाद टैक्सी आगजनी के प्रकरण में अभियुक्त दोषमुक्त घोषित
स्थानीय न्यायालय ने टैक्सी आगजनी से जुड़े लगभग दस साल पुराने मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए अभियुक्त को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया।
प्रतीकात्मक फोटो
बीकानेर, राजस्थान। टैक्सी जलाने के आरोप से जुड़े आगजनी के प्रकरण में अभियुक्त शिवसिंह पुत्र छगनसिंह जाति राजपुरोहित निवासी हनुमान हत्था गली नं 05 बीकानेर को माननीय अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय संख्या 3, बीकानेर से बड़ी राहत मिली है। न्यायालय की पीठासीन अधिकारी इंदु चौधरी ने अभियोजन एवं बचाव पक्ष के साक्ष्यों, अभिलेखों तथा दोनों पक्षों की दलीलों के परीक्षण के पश्चात 22 सितंबर 2026 को धारा 435 भारतीय दण्ड संहिता के अन्तर्गत विचाराधीन इस प्रकरण में अभियुक्त को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त करने का आदेश पारित किया।
प्रकरण के तथ्य
संक्षेप में प्रकरण के तथ्य इस प्रकार हैं कि अभियोजन के अनुसार, दिनांक 17 अप्रैल 2016 को रात्रि 3 बजकर 15 मिनट पर हुई घटना में अभियुक्त शिवसिंह पर टैक्सी जलाने का आरोप लगाया गया था। अभियुक्त एवं परिवादी पक्ष दोनों बीकानेर के हनुमान हत्था क्षेत्र की गली नं 5 में आमने-सामने निवास करते हैं। प्रकरण बीकानेर के थाना सदर से सम्बन्धित है और घटना वर्ष 2016 की होने के कारण प्रकरण भारतीय दण्ड संहिता के प्रावधानों के अन्तर्गत विचारित हुआ। आगजनी जैसे गम्भीर आरोप के कारण अभियुक्त को दीर्घकाल तक न्यायिक प्रक्रिया से गुजरना पड़ा तथा विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 5 गवाह न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए गए।
कानूनी पैरवी
बचाव पक्ष ने प्रकरण को गम्भीरता से लेते हुए अभियुक्त की ओर से एक डिफेन्स विटनेस न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया। इस प्रकार प्रकरण में अभियोजन के 5 तथा बचाव पक्ष के 1 गवाह न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत हुए। अभियुक्त की ओर से अधिवक्ता गोपाल लाल हर्ष एवं अधिवक्ता निमिषा शर्मा ने प्रभावी पैरवी करते हुए अभियोजन साक्ष्य में विद्यमान महत्वपूर्ण बिन्दुओं को न्यायालय के समक्ष रेखांकित किया। बचाव पक्ष का मुख्य तर्क रहा कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अभियुक्त के विरुद्ध धारा 435 का आरोप विधि के अनुसार सिद्ध नहीं होता क्योंकि आपराधिक विधि का स्थापित सिद्धान्त है कि प्रत्येक अभियुक्त को दोषी सिद्ध होने तक निर्दोष माना जाता है।
अदालत का निर्णय
माननीय न्यायालय ने अभियोजन एवं बचाव पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों, अभिलेखों तथा दोनों पक्षों की दलीलों का परीक्षण करने के पश्चात यह निष्कर्ष दिया कि अभियोजन की ओर से गवाह प्रस्तुत किए जाने के बावजूद अभियुक्त के विरुद्ध आरोप साक्ष्यों से सिद्ध नहीं हो सका। तदनुसार, न्यायालय ने अभियुक्त शिवसिंह को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया। इस निर्णय के साथ अभियुक्त शिवसिंह को घटना के दस वर्ष से अधिक समय बाद इस प्रकरण में दोषमुक्ति प्राप्त हुई है और न्यायालय के आदेश से उन्हें लम्बी विधिक लड़ाई के पश्चात बड़ी राहत मिली है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
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