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चाय पत्ती को राजस्थान कृषि उपज मंडी अधिनियम से बाहर करने की मांग

भीलवाड़ा में चाय का किसी भी प्रकार का उत्पादन न होने के बावजूद व्यापार पर लगाए जा रहे कृषि कल्याण शुल्क के विरोध में ज्ञापन सौंपा गया है।

By अजय त्यागी
1 min read
Advertisement002309202602.jpg advertisement13Aug2026%20copy.jpg ज्ञापन प्रस्तुत करते कार्यकर्ता

ज्ञापन प्रस्तुत करते कार्यकर्ता

भीलवाड़ा, राजस्थान (पंकज पोरवाल)। राजस्थान राज्य में चाय का किसी भी प्रकार का उत्पादन न होने के बावजूद यहाँ के चाय व्यापार पर 0.50 प्रतिशत कृषि कल्याण शुल्क लगाए जाने के विरोध में भीलवाड़ा जिला चाय विक्रेता संस्थान ने मुख्यमंत्री के नाम संबोधित एक ज्ञापन अतिरिक्त जिला कलेक्टर को सौंपा है। व्यापारियों ने इस शुल्क को तत्काल प्रभाव से पूरी तरह समाप्त करने तथा 'चाय पत्ती' को राजस्थान कृषि उपज मंडी अधिनियम से स्थायी रूप से बाहर किए जाने की पुरजोर मांग की है। व्यापारियों द्वारा यह स्पष्ट किया गया कि राजस्थान में मुख्य रूप से असम, पश्चिम बंगाल, सिलीगुड़ी, दार्जिलिंग और कछार जैसे दूरदराज के क्षेत्रों से चाय मंगवाई जाती है।

व्यापार की स्थिति 

व्यापारियों ने जानकारी देते हुए बताया कि चाय का यह कारोबार कृषि उपज मंडी परिसर के बजाय सीधे निजी व्यापारिक प्रतिष्ठानों के माध्यम से संचालित होता है। ऐसे में इसे सामान्य कृषि उपज की श्रेणी में शामिल करके इस पर किसी भी प्रकार का शुल्क वसूलना स्थानीय व्यापारियों की आर्थिक स्थिति पर एक अतिरिक्त बोझ डाल रहा है। ज्ञापन में बताया गया कि पूर्व में 25 जनवरी 2006 की अधिसूचना के तहत 'चाय पत्ती' को राजस्थान कृषि उपज मंडी अधिनियम, 1961 की अनुसूची में शामिल किया गया था, जिसके बाद समय-समय पर जारी अधिसूचनाओं से मंडी शुल्क की वसूली स्थगित की गई थी।

प्रतिस्पर्धा पर असर

वर्तमान स्थिति यह है कि 0.50 प्रतिशत का नया कृषि कल्याण शुल्क लगाए जाने के कारण इस कारोबार की कुल लागत काफी बढ़ रही है, जिससे अन्य पड़ोसी राज्यों के व्यापारियों के मुकाबले यहाँ के कारोबारियों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है। व्यापारियों ने यह मांग प्रमुखता से उठाई कि चाय पत्ती को उसकी वास्तविक प्रकृति तथा राजस्थान में इसका उत्पादन न होने के अकाट्य तथ्य को पूरी तरह ध्यान में रखते हुए मंडी अधिनियम की सूची से स्थायी रूप से हटा दिया जाना चाहिए। साथ ही इस शुल्क की वैधानिक स्थिति को स्पष्ट करते हुए व्यापारियों को इस अनावश्यक आर्थिक भार से बड़ी राहत प्रदान की जाए।

प्रमुख प्रतिनिधि 

इस मामले को कृषि विपणन निदेशालय जयपुर तथा राज्य सरकार के उच्च स्तर पर प्रभावी ढंग से उठाने का भी कड़ा आग्रह किया गया है। ज्ञापन सौंपने वाले प्रमुख सदस्यों में संस्थान के अध्यक्ष महेश जाजू, महासचिव अंकित लखोटिया, मुकेश पलोड़, नवरतन सूर्या, दुर्गेश मून्द्रडा, राजेंद्र झंवर और दिनेश राठी शामिल रहे। इस अवसर पर चंद्रप्रकाश आगाल, राजकुमार अग्रवाल, अमन कोठारी, कंवरलाल झाबक, महावीर सोमानी, विकास मून्द्रडा तथा चाहत सोमानी सहित अन्य कई प्रतिष्ठित व्यापारी और सदस्य भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए मौजूद रहे।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट पूरी तरह से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief