हिंदुस्तान जिंक द्वारा खनन क्षेत्रों में 1105 हेक्टर भूमि का पुनर्वास
हिंदुस्तान जिंक ने खनन क्षेत्रों में 1,105 हेक्टेयर भूमि के पुनर्वास और सस्टेनेबिलिटी गोल्स 2030 के तहत पर्यावरण संरक्षण के कई बड़े लक्ष्य तय किए हैं।
प्रतीकात्मक फोटो
उदयपुर और भीलवाड़ा (पंकज पोरवाल)। हिंदुस्तान जिंक ने अपने खनन क्षेत्रों में अब तक कुल 1,105 हेक्टेयर भूमि के पुनर्वास का बड़ा दावा किया है। कंपनी के अधिकारियों के अनुसार यह कुल क्षेत्रफल 1,500 से अधिक फुटबॉल मैदानों के बिल्कुल बराबर है। कंपनी का मुख्य रूप से कहना है कि भूमि सुधार, बड़े पैमाने पर पौधरोपण, जैव विविधता संरक्षण और टिकाऊ भूमि उपयोग के जरिए खनन क्षेत्रों में प्राकृतिक वातावरण को पुनर्जीवित करने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। हिंदुस्तान जिंक के अनुसार यह सभी पहल उसके निर्धारित सस्टेनेबिलिटी गोल्स 2030 का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जिससे पर्यावरण को बेहतर बनाया जा रहा है।
पर्यावरण रणनीति
मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमरेंदु प्रकाश ने अपने बयान में कहा कि भविष्य के खनन में उत्पादन के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों के जिम्मेदार प्रबंधन पर भी समान रूप से जोर देना होगा। कंपनी ने भूमि पुनर्वास के साथ-साथ जल संरक्षण और कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी को भी अपनी मुख्य पर्यावरणीय रणनीति का एक अहम हिस्सा बताया है। कंपनी के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2020 से लेकर वित्त वर्ष 2026 तक कुल 8.5 लाख पौधे लगाए जा चुके हैं। इनमें अकेले वित्त वर्ष 2026 के दौरान लगाए गए 1.14 लाख पौधे भी पूरी तरह से शामिल हैं, जो खनन क्षेत्रों में पर्यावरण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।
हरित पहल
पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने के लिए राजपुरा दरीबा, चंदेरिया, देबारी और कायड़ क्षेत्रों में मियावाकी पद्धति का उपयोग करके विशेष पौधरोपण किया गया है। इसके साथ ही ग्रीन जावर पहल के माध्यम से स्थानीय समुदायों के बीच पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का कार्य भी किया गया है। चंदेरिया स्मेल्टर परिसर में टेरी के सहयोग से 250 हेक्टेयर के विशाल खनन क्षेत्रों में एक नई पारिस्थितिक पुनर्स्थापन परियोजना शुरू किए जाने की जानकारी भी कंपनी द्वारा दी गई है। इसमें जारोफिक्स यार्ड के पुनर्वास और प्राकृतिक वन विकास से जुड़ी हुई विभिन्न प्रकार की गतिविधियां प्रमुख रूप से शामिल हैं।
जल संरक्षण
जल संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य करते हुए कंपनी ने खुद को 3.32 गुना वॉटर पॉजिटिव संगठन के रूप में प्रमाणित बताया है। कंपनी के अनुसार यह आंकड़ा पहले केवल 2.41 गुना दर्ज किया गया था। कुल जल आवश्यकता का 30 प्रतिशत से अधिक हिस्सा रिसाइकल किए गए सीवेज जल से पूरा करने तथा सभी इकाइयों में जीरो लिक्विड डिस्चार्ज प्रणाली को पूरी तरह से अपनाने की जानकारी दी गई है। अपने सस्टेनेबिलिटी गोल्स 2030 के तहत कंपनी ने वर्ष 2020 के आधार स्तर की तुलना में शुद्ध जल की खपत को 50 प्रतिशत तक घटाने का बड़ा लक्ष्य तय किया है।
ऊर्जा लक्ष्य
वित्त वर्ष 2026 के दौरान कुल ऊर्जा खपत में नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी लगभग 18 प्रतिशत के आसपास रही है। कंपनी ने इस हिस्सेदारी को वित्त वर्ष 2028 तक बढ़ाकर 70 प्रतिशत करने का एक निश्चित लक्ष्य तय किया है, जिसके लिए 530 मेगावाट रिन्यूएबल एनर्जी को लेकर आवश्यक एमओयू किए जाने की जानकारी भी साझा की गई है। कंपनी ने वर्ष 2030 तक स्कोप-1 और स्कोप-2 उत्सर्जन में 50 प्रतिशत तथा स्कोप-3 उत्सर्जन में 25 प्रतिशत की कमी लाने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिससे सतत विकास को बल मिलेगा।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट कंपनी द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति और प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।