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ई-कॉमर्स कंपनियों पर सीसीपीए की सख्त कार्रवाई, लगाया भारी जुर्माना

ई-कॉमर्स कंपनियों द्वारा बिना पंजीकरण के हर्बीसाइड बेचने के मामले में सीसीपीए ने सख्त कार्रवाई करते हुए बड़ा जुर्माना लगाया है।

By अजय त्यागी
1 min read
Advertisement002309202602.jpg advertisement13Aug2026%20copy.jpg प्रतीकात्मक फोटो

प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली, भारत। व्यापार और तकनीक जगत से इस वक्त एक बेहद अहम और बड़ी खबर सामने आ रही है, जो देश के प्रमुख ऑनलाइन बाजारों की कार्यप्रणाली से जुड़ी हुई है। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने नियमों का उल्लंघन करने और अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से बिना पंजीकरण वाले उत्पादों की बिक्री करने के आरोप में देश की दिग्गज ई-कॉमर्स कंपनियों के खिलाफ सख्त एक्शन लिया है। इस बड़ी कार्रवाई के तहत नियामक ने नियमों की अनदेखी करने वाली इन कंपनियों पर भारी भरकम आर्थिक जुर्माना लगाया है, जिससे ऑनलाइन व्यापार जगत में हड़कंप मच गया है।  [1]

नियामक की कार्रवाई

विस्तृत जानकारियों के मुताबिक, केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण ने अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसी प्रमुख ई-कॉमर्स कंपनियों पर दस-दस लाख रुपये का जुर्माना ठोका है, जबकि जियोमार्ट पर पांच लाख रुपये का मौद्रिक दंड लगाया गया है। जांच के दौरान यह बात सामने आई थी कि ये सभी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म अपने उपभोक्ताओं को ‘साइक्लोसिनोन हर्बीसाइड’ नामक एक ऐसा कृषि-रासायनिक उत्पाद बेच रहे थे, जिसका देश के संबंधित कानूनों के तहत कोई आधिकारिक पंजीकरण नहीं था। इस तरह के प्रतिबंधित और बिना वैधानिक अनुमति वाले उत्पादों की खुलेआम मार्केटिंग किए जाने के कारण उपभोक्ता सुरक्षा के नियमों का सीधा उल्लंघन हुआ है।

कानूनी प्रावधान

कृषि मंत्रालय और उपभोक्ता मामलों के जानकारों का यह स्पष्ट कहना है कि देश में किसी भी प्रकार के कीटनाशक या हर्बीसाइड की बिक्री, आयात और वितरण के लिए इंसेक्टिसाइड्स एक्ट, 1968 के तहत कड़े कानूनी प्रावधान तय किए गए हैं। इन नियमों का मुख्य उद्देश्य आम जनता, किसानों और पर्यावरण को संभावित खतरों से पूरी तरह सुरक्षित रखना है। परंतु, इन ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर बेचे जा रहे इस उत्पाद के मामले में न तो इसके सक्रिय रासायनिक घटकों की सही जानकारी दी गई थी और न ही इसकी संरचना या गुणवत्ता से जुड़े अनिवार्य मानकों का पालन किया गया था, जो सीधे तौर पर कानून के विरुद्ध है।

कंपनियों की दलील

इस मामले की सुनवाई के दौरान आरोपित ई-कॉमर्स कंपनियों ने अपनी सफाई में यह तर्क दिया था कि वे केवल एक डिजिटल मध्यस्थ (इंटरमीडियरी) के रूप में कार्य करती हैं और उनके प्लेटफॉर्म पर सामान बेचने वाले तीसरे पक्ष के विक्रेता (थर्ड-पार्टी सेलर्स) उत्पादों की सूची तैयार करते हैं। हालांकि, केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण ने कंपनियों के इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया। नियामक ने यह स्पष्ट शब्दों में कहा कि ऑनलाइन मार्केटप्लेस केवल यह कहकर अपनी वैधानिक जिम्मेदारियों से नहीं बच सकते कि वे सीधे सामान नहीं बेचते हैं, क्योंकि उपभोक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना हर प्लेटफॉर्म की नैतिक और कानूनी प्राथमिकता है।

भविष्य के निर्देश

नियामक ने अपनी इस हालिया कार्रवाई के साथ-साथ सभी संबंधित ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स को यह सख्त निर्देश भी जारी किया है कि वे इस तरह के अवैध उत्पादों की बिक्री और उनके विज्ञापनों को तुरंत प्रभाव से बंद करें। इसके साथ ही, कंपनियों से कहा गया है कि वे अपने सिस्टम की सुरक्षा और सटीकता जांचने के लिए एक व्यापक सेल्फ-ऑडिट करें और पंद्रह दिनों के भीतर अपनी अनुपालन रिपोर्ट जमा करें। जानकारों का मानना है कि इस सख्त कदम के बाद अब सभी ऑनलाइन बाजार अपनी उत्पाद सूची और विक्रेता नीति को लेकर पहले से अधिक सतर्क और जवाबदेह बनेंगे।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief