वरिष्ठ साहित्यकार की पुस्तक धर्मक्षेत्रे कर्मक्षेत्रे पर विशेष गोष्ठी
बीकानेर के स्वामी सदन में राजस्थान साहित्य चेतना मंच द्वारा डॉ शंकरलाल स्वामी की पुस्तक धर्मक्षेत्रे कर्मक्षेत्रे पर चर्चा की गई।
अपने विचार व्यक्त करते प्रो. बिनानी
बीकानेर, राजस्थान। नत्थुसर बास स्थित स्वामी सदन में राजस्थान साहित्य चेतना मंच द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन दिवस के अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार व चिकित्सक डॉ शंकरलाल स्वामी की यात्रा वृत्तांत पुस्तक धर्मक्षेत्रे कर्मक्षेत्रे पर पुस्तक चर्चा कार्यक्रम अत्यंत गरिमामय ढंग से आयोजित किया गया। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम के अध्यक्ष पूर्व प्रिंसिपल, चिंतक व लेखक प्रोफेसर डॉ नरसिंह बिनानी थे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजस्थान साहित्य चेतना मंच के संस्थापक व अध्यक्ष वरिष्ठ कवि जुगल किशोर पुरोहित तथा विशिष्ट अतिथि लेखक-कथाकार उमा शंकर बागड़ी रहे। पुस्तक चर्चा कार्यक्रम के द्वय प्रमुख वक्ता वरिष्ठ साहित्यकार व कवि डॉ जगदीश दान बारहठ और शिक्षाविद डॉ कृष्णा गहलोत रहे।
व्यापक महत्व
पुस्तक चर्चा कार्यक्रम में अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रोफेसर डॉ नरसिंह बिनानी ने कहा कि हमारे देश में पर्यटन का अत्यंत व्यापक महत्व है। पर्यटन क्षेत्र परिवार, समाज, राष्ट्र सहित साहित्यिक, सांस्कृतिक, धार्मिक आदि की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी है। आज पर्यटन उद्योग आर्थिक विकास को गति देने वाला एक महत्ती क्षेत्र माना जाता है। वर्तमान समय में युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार देने में पर्यटन उद्योग का अद्वितीय योगदान है। प्रोफेसर डॉ बिनानी ने कहा कि डॉ शंकरलाल स्वामी की पुस्तक धर्मक्षेत्रे कर्मक्षेत्रे में भारत के विभिन्न धार्मिक तथा सांस्कृतिक स्थलों के यात्रा संस्मरणों से जुड़े विभिन्न वृतान्तों व पहलुओं को केंद्र में रखा गया है।
सांस्कृतिक विरासत
समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए वरिष्ठ कवि जुगल किशोर पुरोहित ने कहा कि वरिष्ठ साहित्यकार डॉ शंकर लाल स्वामी ने अपने पर्यटन अनुभवों पर आधारित पुस्तक धर्मक्षेत्रे कर्मक्षेत्रे के माध्यम से धर्म, कर्म और भारतीय संस्कृति के पावन तीर्थों का उल्लेख करते हुए तीर्थयात्रा के पौराणिक और आध्यात्मिक महत्व को उजागर किया है। उन्होंने भारत के पर्यटन स्थानों को भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि देश के विकास में पर्यटन का बड़ा योगदान रहता है। डॉ शंकर लाल स्वामी ने पुस्तक धर्मक्षेत्रे कर्मक्षेत्रे के माध्यम से भारत के महत्वपूर्ण तीर्थों का वर्णन किया है जो हमारी महान सांस्कृतिक विरासत का एक अहम हिस्सा हैं।
विषय सामग्री
पुस्तक चर्चा कार्यक्रम के दौरान लेखक डॉ शंकरलाल स्वामी ने कहा कि पर्यटन मनुष्य के जीवन का एक अभिन्न अंग है। मनुष्य में विभिन्न स्थानों की जानकारी प्राप्त करने की लालसा सदैव बनी रहती है। भारतीय लोगों में तीर्थ स्थलों की यात्रा करने का अधिक चाव रहता है। विभिन्न देशों, पर्यटन स्थलों, प्राकृतिक स्थलों और महानगरों की यात्राएं मनुष्य के मनोरंजन के साथ ज्ञानार्जन में भी सहायक होती हैं। डॉ शंकरलाल स्वामी ने अपनी पुस्तक धर्मक्षेत्रे कर्मक्षेत्रे की विषय सामग्री का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करते हुए बताया कि यह उनके यात्रा संस्मरणों की तीसरी पुस्तक है।
तीर्थ स्थलों का विवरण
डॉ स्वामी ने बताया कि पुस्तक धर्मक्षेत्रे कर्मक्षेत्रे में उत्तराखण्ड के प्रसिद्ध धामों यथा केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री आदि के यात्रा संस्मरण शामिल किए गए हैं। इसके साथ ही हिमाचल प्रदेश की पवित्र देवियों के दर्शनीय स्थल, जम्मू-कश्मीर, वैष्णोदेवी, कुल्लू, मनाली, रोहतांग, चण्डीगढ़, एलोरा और श्रीरंगम की यात्राओं के संस्मरण भी इसमें समाहित हैं। सूर्यग्रहण के अवसर पर कुरुक्षेत्र तीर्थ-स्थल की यात्रा का विशेष संस्मरण भी इसमें शामिल किया गया है। पाठकों के ज्ञानार्जन के साथ-साथ इन संस्मरणों को पढ़ने से पर्यटकों को पर्यटन यात्रा से पूर्व पर्याप्त मार्गदर्शन भी मिल सकता है।
अतिथियों के विचार
समारोह में विशिष्ट अतिथि उमा शंकर बागड़ी ने कहा कि पर्यटन बाह्य दुनिया का ज्ञान प्राप्त करने और जीवन की नीरसता दूर करने का एक बेहतरीन माध्यम है। प्रमुख वक्ता डॉ जगदीश दान बारहठ ने कहा कि हमारे प्राचीन ग्रंथों में भी देशाटन का उल्लेख मिलता है। वहीं डॉ कृष्णा गहलोत ने कहा कि पर्यटन उद्योग जगत का एक महत्वपूर्ण आय का स्रोत बन चुका है। इस अवसर पर अनेक पर्यटन प्रेमी व गणमान्यजन उपस्थित थे, अंत में छात्रा दिव्या वैष्णव ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
अस्वीकरण (Disclaimer):
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