संगीत जगत की अमर गायिका लता मंगेशकर की याद में विशेष श्रद्धांजलि
दिवंगत गायिका लता मंगेशकर की 97वीं जयंती पर सुदर्शन सैंड आर्ट इंस्टीट्यूट के छात्रों द्वारा एक सुंदर सैंड-आर्ट एनिमेशन तैयार किया गया।
सेंड आर्ट एनीमेशन से लता मंगेशकर को श्रृद्धांजली
पुरी, ओडिशा। दिवंगत गायिका लता मंगेशकर की 97वीं जयंती के अवसर पर सुदर्शन सैंड आर्ट इंस्टीट्यूट की छात्राओं मोनलिसा महाराणा और सोनाली आलुक ने एक शानदार सैंड-आर्ट एनिमेशन तैयार कर इस महान गायिका को अपनी अनूठी श्रद्धांजलि अर्पित की है। इस कलाकृति के माध्यम से दोनों युवा कलाकारों ने स्वर कोकिला के संगीत सफर और उनके योगदान को बेहद खूबसूरती से उकेरा है, जिसे देखने के लिए वहां बड़ी संख्या में कला प्रेमी और स्थानीय लोग एकत्रित हुए। [विडियो]
छात्रों की प्रतिक्रिया
सुदर्शन सैंड आर्ट इंस्टीट्यूट की छात्रा सोनाली आलुक ने इस अवसर पर अपने भाव व्यक्त करते हुए कहा कि हम दोनों सुदर्शन सैंड आर्ट इंस्टीट्यूट की छात्राएं हैं और हमने मिलकर लता जी की 97वीं जयंती पर यह विशेष कलाकृति तैयार की है ताकि उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि दे सकें। उन्होंने आगे कहा कि भले ही आज लता जी शारीरिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी सुरीली आवाज और उनकी यादें हमेशा हमारे दिलों में जिंदा रहेंगी।
स्वर कोकिला का संगीत सफर
लता मंगेशकर का भारतीय संगीत जगत में योगदान पूरी तरह से अविस्मरणीय और ऐतिहासिक रहा है। उन्होंने अपने सात दशक से अधिक लंबे करियर में हजारों गीतों को अपनी जादुई आवाज दी, जिसने हर पीढ़ी के दिलों पर अमिट छाप छोड़ी है। उनके गाए देशभक्ति गीत, शास्त्रीय रचनाएं और रोमांटिक नगमें आज भी देश के कोने-कोने में बड़े चाव से सुने जाते हैं और वे भारतीय संगीत की असली पहचान बन चुकी हैं।
Puri, Odisha: On the 97th birth anniversary of late Lata Mangeshkar, Sudarsan Sand Art Institute students Monalisa Moharana and Sonali Aluk create a sand-art animation in tribute to the legendary singer. pic.twitter.com/bywk2Dt3L2
— IANS (@ians_india) September 28, 2026
वैश्विक सम्मान और पहचान
अपनी असाधारण गायन शैली और सुरों की साधना के कारण लता दीदी को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' सहित कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से नवाजा गया था। उनकी कला और समर्पण ने पूरी दुनिया में भारतीय संस्कृति और संगीत को एक अलग ही ऊंचाई पर पहुंचाया। उनके द्वारा गाए गए हर एक गीत में जो भावना और गहराई होती थी, वह आज भी नए कलाकारों के लिए एक बड़ी प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है।
अमर कला और यादें
पुरी में सैंड-आर्ट के जरिए दी गई यह श्रद्धांजलि इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि महान कलाकार कभी भुलाए नहीं जाते। वे अपनी कला, अपनी सुरीली आवाज और अपने विचारों के माध्यम से हमेशा अमर रहते हैं। इस अनूठे आयोजन ने एक बार फिर से सभी संगीत प्रेमियों को लता दीदी के सुनहरे दौर की याद दिला दी और हर आंख उनकी इस पावन जयंती पर नम हो गई।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट कला आयोजन और प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।
Puri, Odisha: Sonali Aluk, a student of the Sudarsan Sand Art Institute, says, "Both of us are students of the Sudarsan Sand Art Institute, and together we created this artwork to pay tribute to Lata Ji on her 97th birth anniversary. Even though she is no longer with us, she… pic.twitter.com/8RsHuA1RgG
— IANS (@ians_india) September 28, 2026