CBI का बड़ा एक्शन, 11 करोड़ की डिजिटल अरेस्ट लूट मामले में 2 गिरफ्तार
CBI ने साइबर फ्रॉड के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 11.4 करोड़ रुपये की ‘डिजिटल अरेस्ट’ लूट के मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया।
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India (AI)
नई दिल्ली, भारत। देश में बढ़ते संगठित साइबर अपराध और डिजिटल अरेस्ट के मामलों के खिलाफ केंद्रीय जांच एजेंसी ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देशों का पालन करते हुए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने ‘ऑपरेशन चक्र-VI’ के तहत देश के 10 अलग-अलग राज्यों में 22 से अधिक ठिकानों पर एक साथ समन्वित छापेमारी की कार्रवाई को अंजाम दिया है। इस उच्च स्तरीय राष्ट्रव्यापी अभियान के दौरान एजेंसी ने गुजरात के एक पीड़ित से तीन महीने तक डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 11.4 करोड़ रुपये की भारी-भरकम रकम ठगने वाले एक बड़े साइबर फ्रॉड नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए दो मुख्य ऑपरेटर्स को धर दबोचा है। [1]
ठगी का तरीका
विस्तृत जानकारियों के मुताबिक, इस सनसनीखेज मामले में साइबर अपराधियों ने बेहद शातिर तरीके से जालसाजी को अंजाम दिया था। अपराधियों ने खुद को पुलिस और दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) के बड़े अधिकारी बताकर गुजरात के एक पीड़ित को लगातार तीन महीने तक ऑनलाइन वीडियो कॉल और सर्विलांस पर रखकर ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर रखा था। आरोपियों ने मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध गतिविधियों में शामिल होने का झूठा डर दिखाकर पीड़ित को मानसिक रूप से इतना प्रताड़ित किया कि उसने अपनी गाढ़ी कमाई से कुल 11.4 करोड़ रुपये सिंडिकेट द्वारा बताए गए अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए।
गिरफ्तार आरोपियों की भूमिका
इस मामले की तकनीकी और वित्तीय जांच के दौरान सीबीआई ने हिमांशु प्रसाद और यूनिस बिस्वास नामक दो व्यक्तियों की मुख्य संलिप्तता का खुलासा किया है, जिन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। जांच में सामने आया है कि इन दोनों का मुख्य काम ठगी से मिलने वाली अवैध रकम को रिसीव करना, उसे विभिन्न खातों में घुमाना (लेयरिंग करना) और आगे के सहयोगियों तक पहुंचाना था। आरोप है कि इन्होंने ठगी गई कुल राशि में से 2.5 करोड़ रुपये 'हेक्साक्वेस्ट ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड' के बैंक खाते के माध्यम से रूट किए थे और बाद में पैसे को छिपाने के लिए कई अन्य फर्जी खातों में ट्रांसफर कर दिए थे।
फॉरेंसिक और तकनीकी जांचगिरफ्तार किए गए आरोपियों के पास से जब्त किए गए डिजिटल उपकरणों की जब फॉरेंसिक जांच की गई, तो कई चौकाने वाले खुलासे हुए हैं। उनके पास से संदिग्ध चैटिंग, बैंकिंग दस्तावेज और फर्जी अकाउंट रिकॉर्ड बरामद किए गए हैं, जो यह दर्शाते हैं कि वे म्यूल खातों (मूला खातों) के प्रबंधन और दुर्भावनापूर्ण एपीके (APK) फाइलों के इस्तेमाल में सक्रिय रूप से संलिप्त थे। सीबीआई के वरिष्ठ अधिकारी इन डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर इस पूरे अंतरराष्ट्रीय और अंतर-राज्यीय नेटवर्क की तकनीकी और वित्तीय जड़ों को खंगालने में जुटे हुए हैं ताकि इस रैकेट से जुड़े अन्य चेहरों को भी बेनकाब किया जा सके।
एजेंसी की कड़ी चेतावनी
केंद्रीय जांच एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि सर्वोच्च अदालत के आदेशानुसार साइबर अपराधियों और उनके मददगारों के खिलाफ यह देशव्यापी अभियान पूरी सख्ती के साथ आगे भी जारी रहेगा। पिछले कुछ हफ्तों में सीबीआई ने इस तरह के बड़े मामलों में कई राज्यों में छापेमारी कर दर्जनों आरोपियों को दबोचा है। एजेंसी ने आम नागरिकों से अपील की है कि कानून प्रवर्तन एजेंसियां कभी भी वीडियो कॉल पर डिजिटल अरेस्ट या पैसों के लेन-देन जैसी प्रक्रिया नहीं करती हैं। इस तरह के किसी भी फर्जी कॉल या फ्रॉड की तुरंत राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर पर रिपोर्ट करें।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।